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पंजाब में सिख्स फ़ॉर जस्टिस और गुरपतवंत पन्नू के खिलाफ कानूनी घेराबंदी तेज

जालंधर। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) एक्ट के तहत सिख्स फ़ॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू को बाकायदा आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद पंजाब पुलिस और सरकार ने भी उसके खिलाफ ज्यादा सख्ती के साथ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पंजाब में पन्नू के खिलाफ दो अलग-अलग जिलों में दो नई एफआईआर दर्ज की गईं हैं।

पन्नू के करीबी सहयोगी और सिख्स फ़ॉर जस्टिस (एसएफजे) के सक्रिय सदस्य जोगिंदर सिंह गुज्जर उर्फ गोगा को भी नामजद किया गया है। गौरतलब है कि एसएफजे ने चार जुलाई से खालिस्तान के पक्ष में अपने तईं कराए जाने वाले जनमत सर्वेक्षण के लिए मतदाता पंजीकरण अभियान शुरू करने का एलान किया हुआ है।

इस मद्देनजर भी पंजाब पुलिस हाई अलर्ट पर है। अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर साहिब के इर्द-गिर्द कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। भरोसेमंद सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि पन्नू के खिलाफ राज्य के विभिन्न शहरों और कस्बों में यथाशीघ्र कई एफआईआर दर्ज की जाने की कवायद की जा रही है। उधर, गुरपतवंत सिंह पन्नू के भारत सरकार द्वारा आतंकी घोषित होने से पाकिस्तान की आईएसआई को तगड़ा झटका लगा है। इसलिए भी कि भारत में पाकिस्तान में पनाह लिए बैठे कुछ अन्य अलगाववादियों को भी आतंकवादी करार देकर पाकिस्तान पर भारत ने सीधा निशाना साधा है।                             

गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके करीबी सहयोगी जोगिंदर सिंह गुज्जर उर्फ गोगा के खिलाफ ताजा पहली एफआईआर अमृतसर के थाना बी डिवीजन में दलित सुरक्षा सेना की शिकायत पर दर्ज की गई है। दूसरी एफआईआर जिला कपूरथला के भुलत्थ थाने में दर्ज हुई है। साथ नामजद उसका साथी जोगिंदर सिंह गुज्जर इसी साल इटली से भारत आया था। वह पन्नू को एसएफजे की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए फंड उपलब्ध करवा रहा था।

उसे गिरफ्तार करके रिमांड पर लिया गया है। पन्नू की ओर से भारत के संविधान, भारत के राष्ट्रीय ध्वज व पिछड़ी श्रेणियों के खिलाफ ऑडियो व वीडियो मैसेज वायरल कर प्रचार किया जा रहा था। इसे लेकर दलित सुरक्षा सेना ने अमृतसर के पुलिस कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज करवाई थी। वायरल ऑडियो-वीडियो में पन्नू की ओर से भारतीय झंडे को जलाते हुए दिखाया गया है। वह खालिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगा रहा है।

सिख समुदाय को भारतीय संविधान के खिलाफ जाकर खालिस्तान के पक्ष में किए जा रहे रेफरेंडम-2020 में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया गया है। दलित सुरक्षा सेना का आरोप है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। अमृतसर के पुलिस कमिश्नर ने एफआईआर की पुष्टि करते हुए बताया कि पन्नू व उसके साथियों के खिलाफ एक्ट 1971, सेक्शन 504, 124ए, 153 ए आईपीसी, सेक्शन 10 ए, 13 ऑफ यूएपीए व सेक्शन 3 एससी/एसटी के तहत मामला दर्ज किया गया है। कपूरथला में पन्नू व जोगिंदर सिंह गुज्जर के खिलाफ देशद्रोही और अलगाववादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

गुज्जर जिला कपूरथला की तहसील भुलुत्थ के गांव अकाल का रहने वाला है। वह रेफरेंडम-2020 के सम्मेलनों में  शिरकत के लिए जेनेवा और स्विट्जरलैंड गया था। इन एफआईआर से साफ है कि पंजाब सरकार गुरपतवंत सिंह पन्नू को पूरी तरह से घेर लेना चाहती है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद कई बार उसका नाम लेकर लताड़ चुके हैं।    इन सारी गतिविधियों को देखते हुए 3 जुलाई दोपहर तक पूरा अमृतसर जिला पुलिस ने सील कर दिया है। श्री हरमंदिर साहिब जाने वाले हर रास्ते और गलियों तक में भारी तादाद में पुलिस जवान तैनात कर दिए गए हैं। जगह-जगह बैरीकेट लगाए गए हैं।

सादी वर्दी में भी पुलिस चौतरफा फैली हुई है। पुलिस को शक है कि 4 जुलाई को एसएफजे के कारकून विशेष अरदास करने श्री हरमंदिर साहिब परिसर आ सकते हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के एक अधिकारी ने इस पत्रकार को बताया कि कमेटी ने भी परिसर के भीतर अपनी टास्क फोर्स तैनात करने का फैसला किया है। हालांकि अमृतसर में पुलिस की इस मानिंद घेराबंदी की बाबत फिलहाल वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुलकर कुछ नहीं बोल रहे लेकिन यह सारी कवायद सिख्स फ़ॉर जस्टिस की घोषणा की वजह से है। सरकारी सूत्र इसकी पुष्टि करते हैं।                                       

जिक्र-ए-खास है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू को बाकायदा आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को फौरी तौर पर मायूसी मिली है। पन्नू की पाक खुफिया एजेंसी से हालिया नज़दीकियां जगजाहिर हैं। भारत सरकार ने अपनी सूची में जिन अन्य अलगाववादियों को शुमार तथा आतंकवादी करार दिया है उनमें बब्बर खालसा इंटरनेशनल के चीफ वधावा सिंह बब्बर, अंतरराष्ट्रीय सिख यूथ फेडरेशन के लखबीर सिंह, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के रंजीत सिंह नीटा, खालिस्तान कमांडो फोर्स के परमजीत सिंह पंजवड़ भी शुमार हैं। ये सब फिलहाल पाकिस्तान की पनाह में हैं।

माहिर मानते हैं कि भारत सरकार द्वारा इन्हें आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव होगा कि इन्हें पकड़ कर भारत के हवाले किया जाए। (बेशक पाकिस्तान कतई ऐसा नहीं करने वाला। अतीत के सबक यही बताते हैं)। साथ ही, भारत सरकार अब इस स्थिति में भी आ गई है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू का समय आने पर प्रत्यारोपण मांग सके। 2019 में इंग्लैंड में हुई रेफरेंडम-2020 की रैली के बाद भारतीय केंद्रीय खुफिया एजेंसियां लगातार पन्नू की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

सूत्रों के मुताबिक एजेंसियों के हाथ सबूत हैं कि गुरपतवंत सिंह पन्नू तमाम खालिस्तानी नेताओं, आईएसआई, चीन के संपर्क में तो है ही, कश्मीर के अलगाववादियों से भी उसकी निकटता है। कश्मीरी आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीएच) से एसएफजे और खालिस्तान गदर फोर्स के गठजोड़ का खुलासा पंजाब पुलिस कर चुकी है। इसी साल आईबी को सुराग मिलाा था कि सिख्स फ़ॉर जस्टिस ने 11 बार पंजाब के स्थानीय आतंकवादियों को धन तथा अन्य प्रकार की सहायता विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए दी।                                     

सिख्स फ़ॉर जस्टिस और गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अपनी गतिविधियां पंजाब के साथ-साथ पड़ोसी सूबे हरियाणा में भी फैला दी हैं। हरियाणा के बेशुमार सिखों को विदेशी नंबरों से कॉल आ रहीं हैं कि खालिस्तान के पक्ष में काम किया जाए। भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक देर-सवेर हरियाणा में भी पन्नू के खिलाफ मामले दर्ज होना तय है। हरियाणाा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस गहन छानबीन कर रही है और पन्नू तथा उसके संगठन के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

(पंजाब से वरिष्ठ पत्रकार अमरीक सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on July 4, 2020 2:46 pm

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