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मानसिक प्रताड़ना के शिकार बनाये जा रहे हैं पत्रकार रूपेश कुमार सिंह

7 जून 2019 से जेल में बंद स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक रूपेश कुमार सिंह को मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाया जा रहा है। यह बात सामने तब आई जब रूपेश कुमार सिंह के परिजन उनसे मिलने गया सेंट्रल जेल गये। रूपेश कुमार सिंह से मिलने के बाद उनके परिजनों ने बताया कि पिछले 25 सितंबर को रूपेश कुमार सिंह सहित आठ विचाराधीन कैदियों को शेरघाटी जेल से गया सेन्ट्रल जेल स्थानांतरित किया गया। गया सेंट्रल जेल में लाने के बाद रूपेश कुमार सिंह को जेल के सबसे खराब सेल के जर्जर कमरे में रखा गया, जिसकी छत के 80 प्रतिशत हिस्से से लगातार पानी टपकता रहता है। जिससे बंदी रूपेश कुमार सिंह को शारीरिक व मानसिक रूप से काफी परेशानी हो रही है। वहीं बाकी सात लोगों को एक साथ अन्य सेल में रखा गया है।

बताते चलें कि जब रूपेश कुमार सिंह को सेल में लाया गया तो वहां पहले से एक और बंदी था। रूपेश कुमार सिंह द्वारा छत से पानी टपकने की स्थिति से जेल प्रशासन को अवगत कराने के बाद उस बंदी को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया  गया, जबकि रूपेश कुमार सिंह को अकेले उसी सेल में छोड़ दिया गया। परिजनों का आरोप है कि रूपेश को प्रशासन मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है जो अमानवीय है।
दरअसल 4 जून को रूपेश कुमार सिंह का उनके एक रिश्तेदार व पेशे से वकील मिथलेश कुमार सिंह और एक ड्राइवर मो. कलाम के साथ बिहार पुलिस द्वारा अपहरण कर लिया गया था और दो दिनों बाद छः जून को उन पर एक फर्जी मामला बनाकर गिरफ्तारी दिखायी गयी थी। और फिर उसके बाद 7 जून को शेरघाटी जेल भेज दिया गया।

बिहार की डोभी पुलिस ने रूपेश कुमार सिंह को प्रतिबंधित नक्सली संगठन के ERB CC Tech. में SAC (स्पेशल एरिया कमेटी) का सदस्य होने का आरोप लगाते हुए भारतीय दंड विधान की धारा 414, 120 बी और यूएपीए के तहत 10,13,18, 20, 38, 39 का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में लिखा है कि रूपेश कुमार सिंह पत्रिका लाल चिंगारी का संपादन करते हैं तथा स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करने के लिए पत्रिका, सोशल मीडिया एवं अन्य प्लेटफार्म का सहारा लेते हैं। यहां उल्लेखनीय है कि पुलिस यह मानती है कि सरकार की नीतियां जनविरोधी है, जिसका खुलासा करना अपराध की श्रेणी में आता है।
यहां जिक्र करना जरूरी हो जाता है कि 4 जून 2019 को रूपेश कुमार सिंह अपने रिश्तेदार वकील मिथलेश कुमार सिंह के साथ रामगढ़ से अपने पैतृक गांव औरंगाबाद के लिए निकले थे, एक भाड़े की निजी कार को मो. कलाम चला रहे थे।

उन्हें शाम तक लौट आना था मगर 10 बजे मिथलेश सिंह के घरवालों ने उन्हें फोन किया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ पाया गया, शाम तक उनका कुछ  अता-पता नहीं चला। अंततोगत्वा  दूसरे दिन 5 जून को उनके परिजनों ने रामगढ़ पुलिस थाना में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। 6 जून को दोपहर एक बजे मिथिलेश कुमार सिंह के मोबाइल में फोन आया कि वे लोग सुरक्षित हैं और लौट रहे हैं, उसके बाद उनका मोबाइल फिर बंद हो गया। लेकिन वे 6 जून की रात तक भी नहीं लौटे। वहीं 7 जून को बिहार पुलिस रामगढ़ पहुंची और रूपेश कुमार सिंह के परिजनों में उनके छोटे भाई तथा ससुर को बोकारो स्थित आवास सर्च करने के लिए ले गयी।

सर्च में पुलिस ने कुछ पत्रिकाएं एवं शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जीवनी की किताब, फणीश्वर नाथ रेणु का मैला आंचल, कार्ल मार्क्स की एक किताब सहित गुजरात फाइल्स नामक किताब ले गई। साथ ही एक खराब पड़ा लैपटॉप भी ले गयी। पुलिस ने बताया कि तीनों को गिरफ्तार कर शेरघाटी जेल भेज दिया गया है। शेरघाटी जेल जब इनसे मिलने इनके परिजन गये तब पता चला कि तीनों को चार जून को ही झारखंड के हजारीबाग के पद्मा से बिहार पुलिस द्वारा उठा लिया गया था तथा दो दिन अपने कब्जे में रखने के बाद उनकी गाड़ी में विस्फोटक रखकर उन्हें 6 जून को गिरफ्तार दिखाया गया।

इस दौरान रूपेश कुमार सिंह को सोने नहीं दिया गया और पुलिस जब इनसे कुछ भी अपने मन की बात नहीं कबुलवा पायी, तब छः जून को फर्जी मामला बनाकर उन्हें 7 जून को शेरघाटी जेल भेज दिया गया।
शेरघाटी जेल में जेल की अव्यवस्था के खिलाफ 4 सितंबर के 4 बजे से बंदियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। बंदियों की आठ सूत्री मांगों को लेकर यह भूख हड़ताल शुरू की गयी थी जिसमें निम्नलिखित मांगें थीं।

1. जेल मैनुअल के हिसाब से सभी बंदियों को नाश्ता, खाना व चाय दी जाए तथा पाकशाला में जेल मैनुअल टांगा जाए।

2. जेल अस्पताल में 24 घंटे डाक्टर की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

3. मुलाकाती से पैसा लेना बंद किया जाए और मुलाकाती कक्ष में लाइट व पंखा की व्यवस्था की जाए।

4. बंदियों को अपने परिजनों व वकील से बात करने के लिए  STD चालू करवाया जाए।

5. शौचालय के सभी नल व गेट ठीक करवाया जाए।

6. मच्छर से बचाव के लिए सप्ताह में एक बार मच्छर मारने की दवा का छिड़काव किया जाए।

7. बंदियों पर जेल प्रशासन द्वारा लाठी चलाना व थप्पड़ मारना बंद किया जाए।

8. हरेक वार्ड में इमरजेंसी लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बंदियों के भूख हड़ताल का परिणाम यह हुआ कि कई मांगों को जेल प्रशासन ने मान तो लिया,  लेकिन जेल के कर्मचारियों की ऊपरी आमदनी खत्म हो गयी। रोज की गैरकानूनी तरीके से हजारों रूपये की आर्थिक उगाही बंद हो गयी।  प्रतिदिन का आमद बंद हो गया। ऐसे में बौखलाया जेल प्रशासन इन मांगों को लेकर हड़ताल करने वाले 9 बंदियों को गया सेंट्रल जेल ट्रांसफर कर सेल में डाल दिया। जिसमें मांगों का नेतृत्व करने वाले रूपेश कुमार सिंह को सबसे खराब सेल के जर्जर रूम में डाल दिया गया है और शिकायत करने पर भी अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसे प्रशासन की बदले की भावना ही मानी जा सकती है, जहां उन्हें मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का शिकार बनाने की कोशिश की जा रही है।

(गया से स्वतंत्रत पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on September 30, 2019 1:43 pm

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