जी हां, शाहीन बाग़ विचार है, और यही जीतेगा!

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जी हां, शाहीन बाग़ विचार है, और यही जीतेगा!

क्योंकि, यह विचार ही भारत है !

तो अब यह तय हो गया कि दिल्ली चुनाव तक शाहीन बाग को सरकार उजाड़ना नहीं चाहेगी,

क्योंकि मुद्दाविहीन अमित शाह को इसी मुद्दे पर दिल्ली का चुनाव लड़ना है !

कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बिल्कुल ठीक कहा कि शाहीन बाग़ कोई भूगोल का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक विचार है।

यह भी उन्होंने सही कहा कि उसके पीछे वे खड़े हैं जिन्हें भाजपा टुकड़े टुकड़े गैंग मानती है, अर्थात JNU के छात्र (बल्कि और तमाम संस्थानों के भी), तमाम उदारवादी प्रगतिशील बुद्धिजीवी नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, अभिजीत बनर्जी से लेकर रोमिला थापर, इरफान हबीब, प्रभात पटनायक से लेकर राम चन्द्र गुहा तक, नागरिक समाज, जनवादी-वामपंथी ताकतें और अब तो उन्होंने सारे विपक्ष को भी उसमें शामिल कर लिया है!

जी हां, शाहीन बाग़ एक विचार है, वह विचार है, Idea of India !-बहुलता और विविधता का सम्मान करने वाला धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणतंत्र !

यह वही विचार है जिसकी रक्षा के लिए देश आज़ाद होते ही हमारे राष्ट्रपिता गांधी ने अपनी जान जोखिम में डाली और अंततः शहादत का वरण किया!

आदमी के द्वारा आदमी के शोषण, गैर बराबरी का अंत करने के इसी विचार को अपने दिलो दिमाग में लिए 23 साल की उम्र में शहीदे आज़म भगत सिंह ने फांसी के फंदे को चूमा !

भारत के इसी विचार के लिए तो राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खां ने एक साथ शहादत दिया !

यह वही विचार है, Justice, Equality, Liberty, Fraternity का जिसके लिए डॉ0 आंबेडकर आजीवन लड़ते रहे और जिसे हमारे संविधान के Preamble में हमारा राष्ट्रीय ध्येय घोषित किया गया।

यह वही विचार है, जो कभी शिकागो में स्वामी विवेकानंद के सुप्रसिद्ध उद्घोष में गूंजा था, “मुझे अपने देश पर गर्व है, जिसने दुनिया के सारे धर्मों को सत्य का रूप माना तथा दुनिया के सभी धर्मों, समुदायों के उत्पीड़ितों को बिना किसी भेदभाव के शरण दिया। (केवल कुछ खास धर्मों के लोगों को ही नहीं !)

यह वही विचार है जो महाकवि चंडीदास के शब्दों में हर तरह के भेदभाव के विरुद्ध मनुष्य की सर्वोच्चता का उद्घोष था “”शुनह मानुष भाई, शबार उपरे मानुष सत्य, ताहार उपर नाहीं!””

यह वही विचार है जो बुद्ध, गोरख, सूफी संतों, कबीर, नानक, रैदास की अमर वाणी में कभी हमारी धरती पर गूंजा था!

जाहिर है यह विचार हिटलर-सावरकर-गोडसे के विचार मानने वालों की राह में रोड़ा है, इसीलिए इसे जोर का करंट लगाने, इसे गोली मारने का दिवास्वप्न वे देखते हैं।

लेकिन यह विचार ही जीतेगा, दिल्ली चुनाव में भी और इसके Beyond भी !

क्योंकि इस विचार का मूर्तिमान रूप ही भारत है !

यह विचार नहीं, तो भारत नहीं !!

(लाल बहादुर सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं।)

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