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Monday, September 20, 2021

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भाजपा को शिवसेना ने दिया जवाब, देवेंद्र फडनवीस के करीबी के खिलाफ शुरू हुई जांच

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आपने कहावत सुनी होगी, नौ नकद न तेरह उधार। बस यही चरितार्थ हो रहा है महाराष्ट्र में। शिवसेना जवाबी कीर्तन में देर नहीं लगाती, क्योंकि यही उसकी विशेषता है। शिवसेना की राजनीति हमेशा से आक्रामक रही है और यही उसकी पहचान है। शिवसेना ने क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाला मामले में जांच शुरू करके महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अगर तुम हमारे लोगों को परेशान कर रहे हो तो हम जवाबी कीर्तन करने में विलंब नही करेंगे। इसके बाद में फडनवीस के और भी करीबी या फिर वो खुद भी महाराष्ट्र पुलिस के रडार पर आ सकते हैं।

अभी तक केंद्रीय जांच एजेंसियां, सीबीआई, ईडी, एनसीबी और इनकम टैक्स, लगातार शिवसेना नेताओं के यहां छापे मार रही थी। उद्धव सरकार ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के राइट हैंड कहे जाने वाले गिरीश महाजन के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस ने जलगांव स्थिति एक क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी घोटाला मामले में जांच शुरू कर दी है और इसी दौरान उनके निवास पर छापेमारी की गई।

बीएचआर (भाईचंद हीराचंद रायसोनी) मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी संस्था में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर गिरीश महाजन के करीबी व्यवसायी सुनील झंवर के जलगांव स्थित ठिकानों पर छापे मारे गए हैं। बीएचआर से संबंधित पांच ठिकानों पर ईओडब्ल्यू की पुणे टीम के 135 अधिकारियों के दस्ते ने एकसाथ छापे मारे हैं। गिरीश महाजन के करीबी सुनील झंवर के फॉर्म हाउस पर भी छापा मारा गया है।

आरोप है कि डेढ़ हजार करोड़ रुपये के इस आर्थिक घोटाले में निवेशकों की रकम वापस देने के नाम पर कर्जदारों की संपत्तियों को ओने-पौने दाम पर नेताओं और उनके करीबियों को बेच दिया गया। उन संपत्तियों को खरीदने में सुनील झंवर का नाम सबसे आगे है।

एनसीपी नेता एकनाथ खडसे का कहना है कि वह 2018 से इस मामले की जांच के लिए 15 से 16 बार शिकायतें कर चुके हैं। उनकी बहू और बीजेपी सांसद रक्षा खडसे भी इस मामले की शिकायत दिल्ली तक कर चुकी हैं, लेकिन तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। खडसे के अनुसार सोसायटी कानून 2002 के तहत बीएचआर मल्टीस्टेट क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी पर कार्रवाई का अधिकार केंद्र का है और राज्य के सहकारिता आयुक्त इस मामले में कार्यवाही नहीं कर सकते थे, इसलिए उन्होंने जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी थी। बावजूद इसके राज्य सरकार ने इस जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की।

इसके पहले मुंबई पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को अरेस्ट किया था। उसी के साथ कंगना का घर टूटने वाली घटना हुई और इसके बाद में ईडी ने प्रताप सरनाईक के घर छापेमारी कर उनके बेटे जो शिवसेना नेता हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

गौरतलब है कि शिवसेना देश की दूसरी राजनीतिक दलों की तरह कभी गंभीरता से सियासत करने वाली पार्टी नहीं रही है, बल्कि सड़क पर भीड़तंत्र के साथ उतरने वाली पार्टी है। शिवसेना इस तरह से आलोचना से घबराती नहीं है। हालांकि, शिवसेना सत्ता में है और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री हैं। यही नहीं उद्धव ठाकरे ने पिछले दिनों गैर-एनडीए के मुख्यमंत्रियों की बैठक में जिस तरह से मोदी सरकार के खिलाफ तेवर दिखाए थे, उसी दिन यह बात साफ हो गई थी कि केंद्र बनाम राज्य के टकराव महाराष्ट्र में और भी गहरे होने वाले हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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