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माली में सेना का विद्रोह, बंधक बनाए जाने के बाद राष्ट्रपति का इस्तीफा

विद्रोहियों द्वारा बंधक बनाए जाने और तख्तापलट की कोशिश के बाद माली का राष्ट्रपति ने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति ने इस्तीफा देते हुए कहा, “उनके पास ख़ूनखराबा रोकने के लिए बहुत कम विकल्प थे। नेशनल एसेंबली और सरकार अब भंग हो जाएगी।”

बता दें कि सत्ता पलट की कोशिश के तहत विद्रोहियों ने राष्ट्रपति इब्राहिम बोउबकार कीता और पीएम को बंधक बनाया हुआ है। राजधानी में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी जश्न मनाते हुए देखे गए हैं। इस घटना के बाद देश अस्थिरता का शिकार होगा।


विवादित चुनाव के बाद से ही जनता में थी नाराज़गी

मार्च महीने में चुनाव बाद विवाद गहराने के साथ ही राजधानी समेत अन्य शहरों में हिंसा भड़क गई थी। मई महीने में देश की शीर्ष संवैधानिक अदालत द्वारा विवादित संसदीय चुनावों से नतीजे पलटने के बाद से ही माली के 75 वर्षीय राष्ट्रपति कीटा को जनता के व्यापक आक्रोश और असंतोष का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें कि राष्ट्रपति कीटा ने अधिकांश रिक्त सीटों पर अपनी पार्टी का कब्जा करने का मार्ग प्रशस्त किया। उसके बाद से ही कीता को राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए कई महीनों से विरोध-प्रदर्शन हो रहा है।

सैनिकों ने राष्ट्रपति भवन को चारों तरफ से घेरकर गोलीबारी की और राष्ट्रपति को हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद सैनिक राजधानी बमाकों की सड़कों पर घूमते नजर आए। साल 2012 में हुए तख्तापलट में देश में इस्लामी चरमपंथियों का वर्चस्व कायम हो गया।

इससे पहले साल 2012 में भी माली में तख्तापलट हुआ था, तब देश को बड़े विद्रोह का सामना करना पड़ा था। उस वक्त मध्य-रैंकिंग वाले सेना अधिकारियों की मदद से जेहादी समूहों और देश में लंबे समय तक हाशिए पर रहे तुआरेग विद्रोहियों ने देश के एक महत्वपूर्ण हिस्से को कब्जे में ले लिया था।

माली की सीमा अल्जीरिया, नाइजर और मॉरिटानिया के साथ लगी हुई हैं और सभी चार देशों को क्षेत्र में इस्लामी समूहों की बढ़ती उपस्थिति से संघर्ष करना पड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ, अफ्रीकी संघ समेत अमेरिका, फ्रांस ने घटना की निंदा की
अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष मोउसा फाकी महामत ने माली के नेताओं को ‘जबरन हिरासत’ में लिए जाने की निंदा करते हुए इन नेताओं को तुरंत रिहा करने की मांग की है। मोउसा ने ‘सरकार को असंवैधानिक तरीके से बदलने’ के प्रयास को खारिज किया है।

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने आधिकारिक बयान में कहा, “संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने माली में संवैधानिक आदेशों एवं कानून के शासन को तुरंत बहाल करने की मांग की है।

माली के इस घटनाक्रम की संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, क्षेत्रीय ब्लॉक इकोवास और फ्रांस ने निंदा की है। माली फ्रांस का उपनिवेश रह चुका है। फ्रांस ने 2013 से संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर इस देश को स्थिर करने का प्रयास किया है।

संयुक्त राष्ट्र के दो राजनयिक सूत्रों ने मंगलवार को सीएनएन को बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद स्थिति पर चर्चा के लिए आपातकालीन बैठक आयोजित कर रहा है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, फ्रांस और नाइजर द्वारा संयुक्त राष्ट्र वार्ता का अनुरोध किया गया था।

इससे पहले मंगलवार को, मालियान प्रधानमंत्री Boubou Cisse ने फेसबुक पर सैनिकों के लिए एक दलील पोस्ट की थी, जिसमें सेना को अपने हथियार डालने और बातचीत में शामिल होने के लिए कहा था।

माली के प्रधानमंत्री ने हिरासत में लिए जाने से पहले एक फेसबुक बयान में लिखा, “सरकार तर्क और देशभक्ति की भावना की अपील करती है और हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के लिए कहती है। ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसे बातचीत में हल नहीं किया जा सकता है।” नजरबंदी।

मंगलवार को, राजधानी शहर के स्वतंत्रता स्मारक के आसपास, बामाको में सड़कों पर भीड़ लग गई। शहर के फुटेज में, मोटरबाइकों पर प्रदर्शनकारियों को संदिग्ध तख्तापलट की खबरों पर खुशी मनाते हुए देखा जा सकता है, जबकि कुछ विपक्षी समर्थकों ने मालियान झंडे और वुज़ुलास के साथ जश्न मनाया।

कहीं और, राष्ट्रपति के घर के बाहर एक हजार से अधिक लोग इकट्ठा हुए, हालांकि उन्हें सैनिकों द्वारा प्रवेश करने से रोका गया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने कीता के बेटे करीम के खाली घर में प्रवेश किया और लूटपाट की, जो पास में स्थित है। करीम कीटा ने जुलाई में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि संसद की रक्षा समिति के प्रमुख ने हिंसा के बीच अपने पिता के इस्तीफे की मांग की थी। माली के न्याय मंत्री के स्वामित्व वाली एक इमारत को भी लूट लिया गया और आग लगा दी गई।

यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि फॉरेक्स जोसेप बोरेल ने एक बयान में कहा, “यूरोपीय संघ माली में तख्तापलट के प्रयास की निंदा करता है और किसी भी असंवैधानिक बदलाव को खारिज करता है। यह किसी भी तरह से गहरे सामाजिक-राजनीतिक संकट का जवाब नहीं हो सकता है। हिंसा ने कई महीनों तक माली को अशांत रखा है।

माली स्थित विदेशी दूतावासों में अलर्ट

माली में फ्रांसीसी और अमेरिकी दूतावासों ने मंगलवार को हिंसा के बीच नागरिकों को घर में रहने की चेतावनी जारी की है।

अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा, “अमेरिकी दूतावास कट्टी के क्षेत्र में गोलाबारी और अशांति के साथ-साथ बमाको में चल रहे सैन्य अभियानों से अवगत हैं और नज़र रखे हुए हैं।”

पूरे शहर में गोलीबारी की कई खबरें आ रही हैं और साथ ही सैनिकों द्वारा ट्रकों में सवार होकर अपने हथियारों से हवाई फायरिंग करने की खबरें आई हैं। अमेरिका ने सभी नागरिकों को बचने की सलाह दी है और कहा है कि इन क्षेत्रों में न जाएं।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on August 23, 2020 3:22 pm

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