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Thursday, August 5, 2021

दुनिया भर में कहा जा रहा है स्टेन की हत्या सत्ता प्रायोजित: दीपंकर

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रांची। सभी गैर भाजपा राजनीतिक दलों और सामाजिक जन संगठनों ने 9 जुलाई को महेंद्र सिंह भवन, रांची में आयोजित संकल्प सभा में जन अधिकारों की मुखर आवाज़ फादर स्टेन स्वामी की न्यायिक हिरासत में हुई मौत के खिलाफ 15 जुलाई को राजभवन मार्च की घोषणा की।

जन आंदोलनों की मुखर आवाज़ और वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्त्ता फादर स्टेन स्वामी की न्यायिक हिरासत में हुई मौत के खिलाफ ‘आक्रोश को अंजाम तक ले जायेंगे’ के आह्वान के साथ ‘फादर स्टेन स्वामी न्याय मंच’ द्वारा शहादत संकल्प सभा का आयोजन किया गया तथा उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण के साथ दो मिनट का मौन रखा गया। इस मौके पर झारखण्ड जन संस्कृति मंच द्वारा प्रस्तुत शहीद गीत से कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।

संकल्प सभा के मुख्य वक्ता भाकपा माले के महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने फादर स्टेन की मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश ही नहीं दुनिया भर में कहा जा रहा है ‘ये सत्ता प्रायोजित ह्त्या है।’ विचाराधीन बंदियों और विस्थापन के सवाल लगातार लड़ने वाले योद्धा को ही मोदी सरकार विचाराधीन बंदी और विस्थापित करके मारा है, ताकि सभी आन्दोलन करने वालों को एक सबक मिल सके। इसलिए फादर की मौत पर उठ रहे देश भर में आक्रोश के स्वर को संगठित राजनीतिक दिशा देने के लिए झारखण्ड को पहल लेनी होगी। पहले के समय में देश में कुछ महीनों की इमरजेंसी लगी थी, लेकिन मोदी राज में तो हर दिन इमरजेंसी जैसे हालात हो गए हैं। 

कामरेड दीपंकर ने आगे कहा कि लोकतंत्र व संविधान को नष्ट करने पर आमादा और देश को कॉरपोरेट निजी कंपनियों के हाथों तहस—नहस करा रही मोदी सरकार आज अपने खिलाफ उठनेवाले हर विरोध व असहमति की आवाज़ों पर एनआईए-यूएपीए का इस्तेमाल कर आन्दोलनकारियों को जेल में ही मार दे रही है। जिसे हटाने के लिए झारखण्ड से लेकर देश स्तर पर एक ऐसे व्यापक कारगर विपक्ष की ज़रूरत है जो सड़कों पर जारी फादर स्टेन की सामूहिक संघर्ष परम्परा का वाहक बन सके।

जिससे अलग होकर तटस्थ होने का सीधा मतलब है, वर्तमान की दमनकारी–जनविरोधी सत्ता का हिमायती होना। सभी गैर भाजपा विपक्ष की राज्य सरकारों पर यह अतिरिक्त दायित्व बनता है कि वह अपने प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप काम करते हुए अपने—अपने प्रदेश के सभी विचाराधीन बंदियों के साथ सही न्याय करें।

विशेष वक्ता के तौर पर बोलते हुए झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने भी फादर की मौत को सत्ता नियोजित हत्या बताते हुए मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश के नागरिकों को अपनी प्रजा बनाकर राजशाही चलाना चाह रही है। इसे जनता का प्रजा की बजाय जागरूक नागरिक बनना कत्तई पसंद नहीं है। इसीलिए वह तमाम नागरिक व मानवाधिकारों के साथ—साथ राज्यों के भी संघीय अधिकारों को ख़त्म करने पर आमादा है।      

इस अवसर पर भाकपा माले विधायक विनोद सिंह ने कहा कि जल जंगल ज़मीन की लूट और पांचवीं अनुसूची के भाजपा सरकारों द्वारा उल्लंघन के साथ—साथ आदिवासी–वंचित जनों के मानवाधिकार हनन के सवालों को उठाने के कारण ही फादर को पिछली भाजपा गठबंधन सरकारों और खासकर रघुवर दास सरकार के समय से ही निशाना बनाया जा रहा था।

सीपीएम के प्रकाश विप्लव ने कहा कि फादर स्टेन की मौत और यूएपीए–राज्य दमन के खिलाफ इन्साफ के लिए 15 जुलाई को गैर भाजपा विपक्षी दलों व सभी जन संगठनों द्वारा राजभवन मार्च को जोरदार ढंग से साफल बनाने में पूरी कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने विपक्षी गठबंधन को कारगर बनाने के लिए वामपंथी दलों को उसका केंद्र बनने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सीपीआई के महेंद्र पाठक और राजद के राजेश यादव ने भी अपने दल की ओर से फादर स्टेन की मौत व मोदी सरकार के दमन राज्य के खिलाफ भाजपा विरोधी दलों व जन संगठनों द्वारा शुरू किये जा रहे संयुक्त संघर्ष कार्यक्रमों के प्रति एकजुटता जताई।

वरिष्ठ आदिवासी बुद्धिजीवी व झारखण्ड एआईपीएफ़ के प्रेमचंद मुर्मू ने फादर की भांति आमजनों को वैचारिक संघर्ष से लैस बनाने को आवश्यक बताया।  

आन्दोलनकारी दयामनी बारला ने कहा कि ये बात सर्व विदित हो चुकी है कि फादर स्टेन को सिस्टम ने मारा है। उनको सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम दमनकारी मोदी राज के खिलाफ गांव—गांव जाकर लोगों से जुड़कर उन्हें एकजुट करेंगे। 

संकल्प सभा को फादर स्टेन स्वामी न्याय मंच के सामाजिक कार्यकर्त्ता कुमार वरुण, सोशल एक्टिविस्ट सिराज दत्ता, आवामी इन्साफ मंच के एडवोकेट इम्तियाज़, एडवोकेट श्याम व झारखण्ड जन संस्कृति मंच के प्रदेश संयोजक जेवियर कुजूर समेत कई अन्य ने भी संबोधित किया।

सभा का संचालन एआईपीएफ़ के नदीम खान और धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ कर्मचारी नेता सुशीला तिग्गा ने किया।

सभा से वक्ताओं ने फादर स्टेन की हिरासत में हुई मौत की स्वतंत्र जांच कराकर दोषियों को सज़ा देने, सरकार के विरोधियों पर यूएपीए का इस्तेमाल फ़ौरन बंद करने, तमाम राजनीतिक बंदियों, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं और आन्दोलनकारियों की अविलम्ब रिहाई, झारखण्ड प्रदेश के सभी विचाराधीन और निर्दोषों की रिहाई व प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में जारी पुलिस ज़ुल्म व हत्याओं पर रोक लगाने की मांग करते हुए सर्वसम्मति से तय किया गया कि 15 जुलाई को राजभवन मार्च कर उक्त मांगों पर व्यापक गैर भाजपा संयुक्त और सामाजिक जन संगठनों द्वारा व्यापक जन आन्दोलन खड़ा किया जाएगा।

(रांची से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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