Friday, April 19, 2024

पांच वर्षों में 13,000 से अधिक एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई छोड़ी

नई दिल्ली। पिछले पांच वर्षों में 13,626 एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई छोड़ दी है। इस बात की जानकारी आज शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने लोकसभा में दी।

लोकसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कि क्या सरकार ने इन उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों के बीच उच्च ड्रॉपआउट दर के पीछे के कारणों को समझने के लिए कोई अध्ययन किया है, सरकार ने कहा कि “उच्च शिक्षा क्षेत्र में, छात्रों के लिए कई विकल्प होते हैं और वे अलग-अलग संस्थानों में और एक ही संस्थान में एक पाठ्यक्रम/कार्यक्रम से दूसरे में स्थानांतरित होने का विकल्प चुनते हैं। प्रवासन/वापसी, यदि कोई हो, मुख्य रूप से छात्रों की ओर से अपनी पसंद के दूसरे विभागों या संस्थानों में सीट सुरक्षित करना या किसी व्यक्तिगत आधार पर है।”

यह डेटा शेयर करते हुए, सरकार ने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों में 4,596 ओबीसी उम्मीदवार, 2,424 एससी और 2,622 एसटी छात्र केंद्रीय विश्वविद्यालयों से बाहर हो गए हैं। इसी समय में 2,066 ओबीसी उम्मीदवार, 1,068 एससी और 408 एसटी छात्र आईआईटी से बाहर हो गए और 163 ओबीसी, 188 एससी और 91 एसटी उम्मीदवार आईआईएम से बाहर हो गए हैं।

सरकार ने कहा, सरकार ने गरीब छात्रों को उनकी शिक्षा को आगे बढ़ाने में सहायता करने के लिए शुल्क में कमी, अधिक संस्थानों की स्थापना, छात्र वृत्ति, राष्ट्रीय स्तर की छात्र वृत्ति तक प्राथमिकता पहुंच जैसे कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी छात्रों के कल्याण के लिए ‘आईआईटी में ट्यूशन फीस की छूट’, केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत राष्ट्रीय छात्रवृत्ति का अनुदान, संस्थानों में छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं भी हैं।

मंत्री ने कहा कि “एससी/एसटी छात्रों के किसी भी मुद्दे को सक्रिय रूप से संबोधित करने के लिए, संस्थानों ने एससी/एसटी छात्र सेल, समान अवसर सेल, छात्र शिकायत सेल, छात्र शिकायत समिति, छात्र सामाजिक क्लब, संपर्क अधिकारी, संपर्क समिति आदि जैसे तंत्र स्थापित किए हैं। इसके अलावा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों के बीच बराबरी और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए हैं।”

सरकार ने डेटा शेयर करते हुए ये नहीं बताया कि इन छात्रों ने पढ़ाई क्यों छोड़ी है। इतनी बड़ी संख्या में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों का इन संस्थानों से पढ़ाई छोड़ना चिंता का विषय है।

(‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित खबर पर आधारित।)

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