Tuesday, January 18, 2022

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आत्महत्या मामलाः अर्णब और दो अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

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रायगढ़ पुलिस ने शुक्रवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी और दो अन्य आरोपी फिरोज शेख और नीतीश सारदा के खिलाफ 2018 के अन्वय नाइक को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में चार्जशीट दाखिल की। यह चार्जशीट पड़ोसी रायगढ़ जिले के अलीबाग की एक अदालत के समक्ष दायर की गई है, जहां इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद के आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। इस बीच अर्णब गोस्वामी ने गुरुवार को बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष एक अत्यावश्यक याचिका दायर कर 2018 के अन्वय नाइक को खुदकुशी के लिए उकसाने के मामले में आरोप-पत्र दायर करने और आगे की जांच पर रोक लगाने की मांग की है, जिस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है।

चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपियों ने पीड़ित इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की धमकी पर ध्यान नहीं दिया। नाइक ने कहा था कि अगर उसका बकाया नहीं चुकाया गया, तो वह अपनी जान दे देगा। अर्णब सहित तीनों आरोपियों पर धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने), 109 (उकसाने के लिए सजा) और 34 (आम इरादे को आगे बढ़ाते हुए कई लोगों द्वारा किया गया कृत्य) आईपीसी के तहत आरोप लगाया गया है। 1914 पन्नों वाली चार्जशीट में 65 लोगों को गवाह के रूप में नामित किया गया है।

नाइक की लिखावट का मिलान सुसाइड नोट में लिखी गई तहरीर से किया गया है और फोरेंसिक रिपोर्ट में बताया गया है कि इसे लिखते समय वह दबाव में नहीं था। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज छह बयान भी चार्जशीट का हिस्सा है। ट्रायल के दौरान इस तरह के बयानों को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

चार्जशीट में सबसे खास यह है कि अर्णब गोस्वामी के खिलाफ लगे प्रमुख आरोप को हटा लिया गया है। इससे पहले आरोप लगा था कि वे नाइक की आत्महत्या के मामले में उकसाने वाले मुख्य साजिशकर्ता में से एक थे। अब चार्जशीट में कहा गया है कि 2018 के इस मामले में वे आत्महत्या के लिए उकसाने वाले मुख्य साजिशकर्ता में शामिल नहीं हैं।

हालांकि, चार्जशीट में अब भी धारा 306 (सुसाइड के लिए उकसाने) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा धारा 109 (अपराध के लिए उकसाना) भी जोड़ी गई है। इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक ने अपने सुसाइड नोट में अर्णब गोस्वामी, आईकास्टएक्स/स्कीमीडिया के फिरोज शेख और स्मार्ट वर्क्स के नीतेश शारदा को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था।

चार्जशीट में धारा 164 सीआरपीसी के तहत 6 इकबालिया बयानों का उल्लेख भी है। गवाहों में मृतक के परिवार के सदस्य और उनके लिए काम करने वाले कर्मचारी हैं। इसके अलावा तीनों आरोपियों के कर्मचारियों का बयान भी इसमें शामिल किया गया है।

चार्जशीट में पुलिस ने कहा है कि उनके पास अर्णब और अन्य आरोपियों के खिलाफ मजबूत डिजिटल सबूत हैं। इसके अलावा अन्वय नाइक द्वारा आरोपियों को भेजे गए ईमेल भी आरोप की पुष्टि करते हैं। सुसाइड नोट को डाइंग डिक्लेरेशन मानते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोप पत्र में कहा गया है कि क्राइम ब्रांच के फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट ने इसकी पुष्टि की है कि सुसाइड नोट अन्वय ने लिखा था। फोरेंसिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वह नोट लिखते समय दबाव में नहीं थे।

इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक, अपनी मां कुमुद नाइक के साथ, मई 2018 में अलीबाग में उनके बंगले में मृत पाए गए थे। अन्वय बंगले के पहली मंजिल पर लटके हुए पाए गए थे। घटना के बाद एक सुसाइड नोट मिला था, जो कथित तौर पर अन्वय ने लिखा था। इस सुसाइड नोट में अन्वय ने आरोप लगाया था कि अर्णब गोस्वामी और दो अन्य लोगों ने 5.40 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है, जिसके चलते उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्हें तीन कंपनियों के मालिकों द्वारा बकाया पैसों की मंजूरी नहीं दी गई थी, जिसमें रिपब्लिक टीवी के अर्णब गोस्वामी, आई कास्ट/स्काई मीडिया के फिरोज शेख और स्मार्ट वर्कर्स के नीतीश सारडा शामिल हैं। जांच में पता चला की अन्वय कर्ज में थे और कर्ज चुकाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पुलिस ने भी कहा था कि अन्वय ने आत्महत्या की थी।

गोस्वामी, शेख और सारदा को अलीबाग पुलिस ने इस मामले में 4 नवंबर को गिरफ्तार किया था, लेकिन उन्हें 11 नवंबर को उच्चतम न्यायाल से जमानत मिल गई थी, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने मामले की जांच पर रोक नहीं लगाई थी। क्राईम ब्रांच ने जांच के बाद यह चार्जशीट दाखिल की है।

अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद ने 2018 में कथित तौर पर गोस्वामी और अन्य दो आरोपियों की फर्मों द्वारा बकाया राशि का भुगतान न करने के कारण आत्महत्या कर ली थी। 2019 में सबूतों के अभाव में बंद हुए इस मामले को इस साल मई में फिर से खोल दिया गया था, जिसमें गोस्वामी ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र सरकार टीवी पत्रकार के रूप में उनके काम के लिए उनके खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई कर रही है।

बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल अर्णब गोस्वामी की याचिका में कहा गया कि मामले की सीआईडी द्वारा फिर से जांच कराने का आदेश देने वाले महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि रायगढ़ जिले में अलीबाग पुलिस द्वारा पिछली जांच गत वर्ष ही बंद कर दी गई थी।

इस मामले में आरोपियों में से एक गोस्वामी को अलीबाग पुलिस द्वारा पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था। उन्हें उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली थी। चार नवंबर को हुई अपनी गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए गोस्वामी ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले की जांच सीबीआई या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी को स्थानांतरित की जाए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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