Wednesday, October 27, 2021

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यूपी में राज्य उपभोक्ता आयोग के न्यायिक सदस्यों के मंहगाई और अन्य भत्तों पर रोक

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उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्यों को मंहगाई भत्ता खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पत्र दिनांक 01 जून, 2020 के द्वारा बन्द कर दिया गया है। इससे उन्हें 50 प्रतिशत आर्थिक क्षति हुयी। उन्हें मिलने वाले वाहन भत्तों को भी उप्र शासन के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक पत्र दिनांक 01-जून-2020 द्वारा रोक दिया गया। उसी प्रकार एक दूसरे पत्र दिनांक 01-जून 2020 द्वारा राज्य आयोग से प्राप्त होने वाले मंहगाई भत्ते को भी रोक दिया गया और इन दोनों पत्रों के संबंध में वित्त विभाग से कोई सहमति नहीं ली गयी।

उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्यों की कल 22 सितम्बर, 2021 को एक आपातकालीन बैठक सम्पन्न हुयी, जिसमें आयोग के सदस्यों को दिये जाने वाले वेतन एवं भत्तों के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। आयोग का नियंत्रण प्रदेश के सभी जिला आयोगों पर रहता है और इसके अतिरिक्त राज्य आयोग प्रथम अपीलीय आयोग है जहां पर समस्त जिलों के निर्णयों आदि के विरूद्ध अपीलें प्रस्तुत की जाती हैं। इस दृष्टि से राज्य आयोग, जिला आयोगों से वरिष्ठ श्रेणी में आता है।

भारत सरकार अथवा राज्य आयोग के सदस्यों का वेतन अतिरिक्त सचिव के वेतन के बराबर दिये जाने का सुझाव दिया गया था किन्तु् उत्तर प्रदेश सरकार ने अपर सचिव, एडिशनल सेक्रेटरी भारत सरकार के समकक्ष यहां के विशेष सचिव स्पेशल सेक्रेटरी को माना और यह कहा कि स्पेशल सेक्रेटरी का न्यूनतम वेतन मान ही राज्य आयोग के सदस्यों को देय होगा और यदि राज्य‍ आयोग के सदस्य पेंशनधारक हैं तब इस धनराशि से पेंशन की धनराशि घटायी जाएगी।

समस्त भारत वर्ष में न्यायिक अधिकारियों से संबंधित राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग जो सातवें राष्ट्रीय आयोग के समकक्ष है का मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है और वर्तमान समय में पूरे भारत वर्ष के न्यायिक अधिकारी प्रथम राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग जो षष्टम राष्ट्रीय वेतन के समकक्ष है, वेतन आहरित कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य के विशेष सचिव का निम्नतम वेतन 1,31,100/-रू० है। वर्तमान समय में उप्र राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में तीन न्यायिक सदस्य कार्यरत हैं और तीनों सदस्य जिला जज/ सुपर टाइम स्केल के अन्तर्गत सेवानिवृत्त् हुए थे। राष्ट्रीय वेतन आयोग के अंतर्गत जिला जज/सुपर टाइम स्केल का वेतन वर्तमान में 2.1 से 2.4 लाख प्रतिमाह प्रस्तावित है। अगर इस सम्बन्ध में हम अपना नवीन वेतन 2.20 लाख मान लें तब पेंशन की धनराशि 1.10 लाख होगी। उनका कहना है कि यदि इस धनराशि को उत्तर प्रदेश के विशेष सचिव के निम्नतम वेतनमान 1,31,100/- रूपये से घटाया जाए तो यह धनराशि 21,100/-रुपये आती है। अर्थात हम राज्य आयोग के सदस्य उत्तर प्रदेश सरकार से मात्र 21,100/-रुपये प्रतिमाह प्राप्त करेंगे, यह है उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के आईएएस अधिकारियों का निर्णय ?

समस्त जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष जो या तो (जिला जज) सुपर टाइम स्केल अथवा अपर जिला जज हो सकते हैं या जिन्हें अभी जिला जज का वेतनमान स्वीकृत न हुआ हो। यदि उन्हें जिला उपभोक्ता आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है तब वह जिला जज का सुपरटाइम स्केल प्राप्त करेंगे, भले ही अपनी सेवानिवृत्ति के दिन वह उससे कम धनराशि आहरित कर रहे हों अर्थात जो अपनी सेवा के दौरान कभी भी जिला जज सुपर टाइम स्केल वेतनमान में नहीं थे। वह न्यायिक अधिकारी सेवानिवृत्त होने के पश्चात जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष बनने पर जिला जज सुपर टाइम स्केल के अन्तर्गत वेतन प्राप्त करेंगे जो राज्य आयोग के सदस्य‍ के वेतनमान से अधिक है।

भारत सरकार के एडिशनल सेक्रेटरी उप्र सरकार के अन्तर्गत कार्यरत प्रमुख सचिव के समकक्ष आते हैं और इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत सरकार की मंशा राज्य आयोग के सदस्य गण को प्रमुख सचिव का वेतनमान दिये जाने की थी और प्रमुख सचिव जिला जज/ सुपर टाइम स्केल के समकक्ष होते हैं क्योंकि शासन में जिला जज स्तर के अधिकारी ही प्रमुख सचिव, न्या‍य एवं विधि परामर्शी के पद पर आसीन हैं।

राज्य आयोग और जिला आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का वेतन भत्ते एवं सेवा की शर्तें मॉडल नियम, 2020 की धारा-4 कहती है-

धारा-4 राज्य आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को देय वेतन एवं भत्ते-

 (1)    राज्य आयोग का अध्यक्ष, राज्य के उच्च न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश को अनुज्ञेय वेतन और अन्य भत्ते प्राप्त करेगा।

 (2) राज्य आयोग का सदस्य, राज्य सरकार के अपर सचिव के वेतनमान के न्यूनतम स्तर के वेतन तथा उस अधिकारी को अनुमेय अन्‍य भत्तों के बराबर वेतन प्राप्त करेगा।

 (3) अध्यक्ष अथवा सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया कोई ऐसा व्यक्ति जो पेंशनभोगी है, के वेतन में उसके द्वारा आहरित पेंशन की सकल राशि की कटौती की जाएगी।

(4) सदस्य के वेतन में 3 प्रतिशत की दर से वार्षिक उत्तरोत्‍तर वृद्धि की जाएगी।

वर्तमान समय में राज्य आयोग के सदस्यों की तुलना उप्र शासन में नियुक्त विशेष सचिव से की जा रही है जबकि उक्त मॉडल रूल भारत सरकार ने राज्य आयोग के सदस्यों को अपर सचिव के वेतनमान के न्यूनतम स्तर पर रखने के लिए कहा है। अपर सचिव अथवा एडिशनल सेक्रेटरी भारत सरकार में प्रमुख सचिव के पद के समकक्ष होता है जबकि उत्तर प्रदेश शासन ने उन्हें विशेष सचिव (स्पेाशल सेक्रेटरी) के समकक्ष रखा है जो उन लोगों से नीचे आते हैं। प्रभावितों का कहना है कि हम लोग जिला जज सुपर टाइम स्केल से सेवानिवृत्त हुए थे और जिला जल सुपर टाइम का वेतनमान उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव के वेतनमान के समकक्ष होता है क्यों कि प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय जिला जज स्पेशल सेक्रेटरी के अन्तर्गत हैं।

शासन का यह मानना है कि प्रभावितों को विशेष सचिव का न्यूनतम वेतन अर्थात लगभग 1,31,000-रुये मिलेगा। अगर इसमें से पेंशन की धनराशि घटा दी जाए तब राज्य आयोग के सदस्यों का वेतन बद से बदतर हो जाएगा। राज्य आयोग के अधिकारी यदि सेवानिवृत्ति के उपरान्त किसी प्राधिकरण/आयोग या अन्य जगहों पर पुन: नियुक्त किये जाते हैं तब उन्हें उनके द्वारा आहरित वेतन में से पेंशन की धनराशि घटाते हुए वेतन प्रदान किया जाता है और मंहगाई भत्ता भी वहीं से प्राप्त होता है। राज्य उपभोक्ता आयोग में वर्तमान समय में तीन न्या‍यिक सदस्य हैं जो जिला जज सुपर टाइम स्केल से सेवा निवृत्त हुये थे और उनकी नियुक्ति इस आयोग में की गयी।

वर्तमान समय में राज्य उपभोक्ता आयोग में मात्र तीन सदस्यगण कार्यरत हैं और एक महिला सदस्य की नियुक्ति होना है। पहले इस आयोग में 9 से 10 सदस्य गण कार्यरत थे किन्तु बाद में उनकी संख्या घटाकर 4 कर दी गयी। जबकि अब मात्र तीन सदस्य ही कार्यरत हैं। स्पष्ट है कि प्रति सदस्यों पर लम्बित वादों की संख्या का भार अत्यधिक बढ़ गया है दूसरी ओर मंहगाई भत्ता और वेतन में कटौती, वाहन भत्ता आदि बन्द करते हुए राज्य सरकार सीधे-सीधे राज्य उपभोक्ता आयोग के सदस्यों के आत्म-सम्मान पर चोट पहॅुचा रही है।

इन विसंगतियों के बारे में कई बार भारत सरकार, उप्र राज्य सरकार को पत्र लिखे गये लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुयी जिससे राज्य् उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्यों का मनोबल गिर रहा है। लिहाजा प्रभावितों ने यह निर्णय लिया कि इसके विरूद्ध उ०प्र० राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के तीनों सदस्यगण काली पट्टी बांधकर अपना सामूहिक विरोध व्यक्त करेंगे और विरोध व्यक्त‍ करते हुए उप्र के मुख्य्मंत्री जी से आग्रह करेंगे कि वे अपने स्तर से इस प्रकरण पर विचार करें और इस समस्या का अविलम्ब निदान करें।

( वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)            

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