आरएसएस का केस नंबर 176 और भाजपा की तिरंगा यात्रा

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गुड़गाँव। स्वतंत्रता दिवस अभी बहुत दूर है लेकिन जनता का ध्यान बांटने और उसे मूर्ख बनाने के लिए भाजपा ने हरियाणा में 1 अगस्त को पूरे हरियाणा में तिरंगा यात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा दो हफ़्ते तक चलेगी। आरएसएस के निर्देश पर हरियाणा के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों ने तिरंगा यात्रा की अगुआई की। यह वही भाजपा है, जिसके जन्मदाता संगठन आरएसएस के मुख्यालय में 55 साल तक तिरंगे की जगह बेशर्मी से भगवा झंडा फहराया जाता रहा।

अंधेर नगरी के दलाल

फ़रीदाबाद, करनाल, गुड़गाँव, रेवड़ी, भिवानी, रोहतक, जींद समेत समूचे हरियाणा के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। बारिश ने तमाम सड़कों की बखिया उधेड़ दी है। तमाम शहरों में टूटी सड़कों पर पानी भरने की वजह से हादसे हो रहे हैं। जल भराव की वजह से कई कॉलोनियाँ, अफ़सरों के आवास पानी में डूबे हुए हैं। करोड़ों रुपये नालों की सफ़ाई पर खर्च कर दिए गए लेकिन शहर के नालों का पानी सड़कों पर बह रहा है। 

सड़कों को बनाने वाले ठेकेदार या तो भाजपा नेताओं के रिश्तेदार हैं या भाजपा नेताओं को हर टेंडर पर कमीशन मिला हुआ है। मामूली बारिश में सड़कों का इतना बुरा हाल होने के लिए कमीशनखोर मंत्री और भाजपा नेता सीधे ज़िम्मेदार हैं।

 सीएम सिटी करनाल, फ़रीदाबाद, गुड़गाँव में जनता सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है। इन शहरों में जल संकट से भाजपा नेताओं को कोई सरोकार नहीं है। सरकारी पानी बेचने और चोरी में उनकी संलिप्तता सामने आ रही है। आये दिन सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन भाजपा नेता उन प्रदर्शनों का संज्ञान तक नहीं लेते। अभी हाल ही में फ़रीदाबाद में एक भाजपा पार्षद को रात में सेक्टर 25 के बूस्टर पंप पर एमसीएफ के जेई के साथ शराब पार्टी करते पाया गया। 

पेट्रोल सौ रूपये लीटर जा पहुँचा है और महंगाई उच्चतम स्तर पर है। इसका सबसे ज़्यादा असर असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों और मेहनतकश लोगों पर पड़ रहा है। कोरोना काल में जिन लोगों की नौकरियाँ चली गई थीं, वे अभी भी बेरोज़गार बैठे हैं।

भाजपा की केंद्र सरकार के पास इन समस्याओं कोई इलाज नहीं है। लेकिन जनता का ध्यान बँटाने के लिए उसके पास तमाम तरह के नाटक खेलने का पर्याप्त अनुभव है। इस काम में अपने राजनीतिक मुखौटे भाजपा की मदद के लिए आरएसएस ने तमाम फ्रंटल संगठन बनाये हुए हैं जिनका काम है देशभक्ति के नाम पर कार्यक्रमों का आयोजन। यह तिरंगा उसी नाटक का हिस्सा है।

हैरानी यह है कि हरियाणा के तमाम शहरों में जो लोग अभी कल तक बिगड़ती क़ानून व्यवस्था की दुहाई दे रहे थे, जलभराव की शिकायत कर रहे थे, पेयजल संकट का रोना रो रहे थे, वे तिरंगा यात्रा के दौरान मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को माला ऐसे पहना रहे थे, जैसे देश को इन लोगों ने ही आज़ाद कराया था।

किसान नेता समझ गए चाल

किसान नेता आरएसएस और भाजपा की इस चाल को फ़ौरन समझ गए। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने हरियाणा के किसानों और जनता से अपील की है कि वे भाजपा की तिरंगा यात्रा का विरोध नहीं करें। लेकिन अन्य कार्यक्रमों और बीजेपी-जेजेपी का विरोध जारी रहेगा। किसान नेताओं ने कहा है कि यह किसानों को भड़काने और बदनाम करने की ‘कुटिल चाल’ है। एसकेएम ने बयान में कहा कि हरियाणा भाजपा की प्रस्तावित तिरंगा यात्रा मुख्य रूप से किसानों को भड़काने और उन्हें बदनाम करने के लिए है। किसान इसे भाजपा की कुटिल चाल के तौर पर देखें और उनकी राष्ट्रीय ध्वज की आड़ में गंदी चाल को सफल नहीं होने दें। 

आरएसएस और केस नंबर 176

आरएसएस मुख्यालय नागपुर और उसके फ्रंटल संगठनों के दफ़्तरों में 2002 से तिरंगा यानी राष्ट्रीय ध्वज फहराने की शुरुआत हुई। 2001 तक संघ मुख्यालय और उसके अन्य दफ़्तरों में तिरंगे की जगह भगवा ध्वज फहराया जाता था। 

संघ मुख्यालय पर हुई एक घटना जो लोग भूल चुके हैं, उसे याद दिलाना ज़रूरी है। यह घटना नागपुर केस नंबर 176 के नाम से मशहूर है।

अगस्त 2013 को नागपुर की एक निचली अदालत ने 2001 के एक मामले में दोषी तीन आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया था। इन तीनों आरोपियों बाबा मेंढे, रमेश कलम्बे और दिलीप चटवानी का कथित अपराध मात्र इतना था कि वे 26 जनवरी 2001 को नागपुर के रेशमीबाग स्थित आरएसएस मुख्यालय में घुसकर गणतंत्र दिवस पर तिरंगा झंडा फहराने की कोशिश में शामिल थे। संघ इस कोशिश पर इतना तिलमिला गया कि तीनों युवकों पर मुकदमा (केस नंबर 176) दर्ज हो गया और 12 साल तक वो युवक संघ के निशाने पर बने रहे।


इसके बाद कांग्रेस ने इस मामले को उठाना शुरू कर दिया। संघ बैकफ़ुट पर आ गया। आरएसएस यह समझ गया कि इस मुकदमे का हवाला देकर उसकी देश के प्रति निष्ठा पर सवाल खड़े किये जायेंगे। इसके बाद आरएसएस ने वो शिकायत वापस ले ली और संघ मुख्यालय पर तिरंगा फहराने वाले वो युवक बरी हो गए। इसके बाद संघ ने तिरंगे को लेकर ऐसा प्रचार किया कि अब ऐसा लगता है कि देश को संघ ने आज़ाद कराया था। आरएसएस की इस घिनौनी घटना का कांग्रेस प्रचार करने में नाकाम रही।

एक और घटना राजस्थान में हुई थी। उदयपुर कोर्ट पर 14 दिसंबर 2017 को भगवा झंडा आरएसएस के संगठनों से जुड़े उन्मादियों ने फहराया था। कोर्ट पर तिरंगा पहले से ही लहरा रहा था। संघी बदमाशों ने अदालत से तिरंगा उतारकर भगवा झंडा फहरा दिया था। दरअसल, एक मुस्लिम की हत्या में शंभूनाथ रैगर को गिरफ़्तार किया गया था। उसी घटना को संघ के स्वयंसेवकों ने उन्माद में बदला और जबरदस्त साम्प्रदायिक हिंसा की।

तीसरी घटना भी जान लीजिए। पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाने वाले भारतीय सेना के सूबेदार वीर अब्दुल हमीद की शहादत को हर साल 26 जनवरी को यूपी के कासगंज में वीर अब्दुल हमीद चौक पर याद किया जाता है। 26 जनवरी 2018 को जब यह कार्यक्रम चौक पर चल रहा था तो उसी समय आरएसएस से जुड़े संगठनों के युवक तिरंगा यात्रा लेकर पहुँच गए। उन्होंने वहाँ उत्तेजक साम्प्रदायिक नारे लगाए। इसके बाद वहाँ ज़बर्दस्त हिंसा हुई। इस घटना में यूपी सरकार के संघी मानसिकता वाले वो अधिकारी और कासगंज का पुलिस प्रशासन भी शामिल था, जिसने तिरंगा यात्रा को उस चौक तक आने की इजाज़त दी थी।

इन घटनाओं से साफ़ है कि आरएसएस और भाजपा तिरंगे की आड़ में तमाम साम्प्रदायिक गतिविधियों को जारी रखना चाहते हैं।

(यूसुफ किरमानी वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

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