Tuesday, December 7, 2021

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एक्टिविस्ट ओस्मान कवाला की रिहाई की मांग करने पर अमेरिका समेत 10 देशों के राजदूतों को तुर्की ने ‘अस्वीकार्य’ घोषित किया

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, फ़्रांस, फ़िनलैंड, कनाडा, डेनमार्क, न्यूजीलैंड , नीदरलैंड्स, नॉर्वे और स्वीडन के राजदूतों को “अस्वीकार्य” घोषित कर दिया है। उनके इस फैसले के बाद 10 देशों के राजदूतों को अब तुर्की छोड़ना पड़ सकता है। बता दें कि तुर्की राष्ट्रपति अर्दोआन कल शनिवार को एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जनसभा में उन्होंने कहा कि दूसरे देशों से आकर राजदूत तुर्की के विदेश मंत्रालय को ‘आदेश देने का दुःस्साहस’ नहीं कर सकते।

राष्ट्रपति ने आगे कहा, “मैंने हमारे विदेश मंत्रियों को ज़रूरी आदेश दिए हैं और बताया है कि क्या होना चाहिए। इन 10 राजदूतों को एक झटके में अस्वीकार्य घोषित किया जाना चाहिए। “

वहीं तुर्की के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त बयान को “गैर-जिम्मेदार” और तुर्की की अदालत प्रणाली को प्रभावित करने वाला प्रयास बताते हुये ख़ारिज कर दिया। इसके बाद राष्ट्रपति के आदेश के बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय ने सभी 10 राजदूतों को कवाला मामले में उनके “ग़ैरज़िम्मेदाराना बयान” का विरोध दर्ज़ कराने के लिए उन्हें समन भेजा था।

इससे पहले राष्ट्रपति अर्दोआन ने तुर्की की न्यायिक व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा था कि, “मैंने अपने विदेश मंत्री से कहा था कि हमारे पास इन लोगों को अपने देश में रखने की सुविधा नहीं है। क्या अब वो तुर्की को सबक सिखाएंगे? वो ख़ुद को समझते क्या हैं?”

क्या था 10 राजदूतों के साझा बयान में

18 अक्टूबर को संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, फ़्रांस, फ़िनलैंड, कनाडा, डेनमार्क, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड्स, नॉर्वे और स्वीडन के राजदूतों ने एक साझा बयान में 64 वर्षीय ओस्मान कवाला की तुरंत रिहाई की माँग की थी। ये सभी 10 देश तुर्की के नाटो सहयोगी भी हैं। और तुर्की राष्ट्रपति अर्दोआन का यह फ़ैसला नाटो सदस्य देशों के राजदूतों के साझा वक्तव्य के बाद आया है। जिसमें तुर्की एक्टिविस्ट ओस्मान कवाला की तत्काल रिहाई की माँग की गयी है।

राजदूतों के बयान में ओस्मान कवाला की रिहाई और मुक़दमे के निष्कर्ष में लगातार होने वाली देरी की आलोचना की गई थी। और मामले को जल्दी निबटाने और कवाला की तत्काल रिहाई के लिए कहा गया था। राजदूतों ने साझा वक्तव्य में कहा था कि कवाला की रिहाई में देरी तुर्की के लोकतंत्र, न्यायिक व्यवस्था और क़ानून की छवि धूमिल करता है।

इससे पहले मानवाधिकारों के लिए यूरोप की प्रमुख संस्था काउंसिल ऑफ़ यूरोप ने भी तुर्की को यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय के उस आदेश का पालन करने की आख़िरी चेतावनी दी है। मानवाधिकार न्यायालय ने तुर्की एक्टिविस्ट ओस्मान कवाला को लंबित मुक़दमे से मुक्त करने का आदेश दिया था।

पांच सालों से जेल में क़ैद है ओस्मान कवाला

बता दें कि 64 वर्षीय तुर्की एक्टिविस्ट ओस्मान कवाला पिछले चार साल से ज़्यादा समय से जेल में क़ैद हैं। उन पर राष्ट्रपति अर्दोआन की तख़्तापलट की कोशिश करने और विरोध-प्रदर्शन के समर्थन का आरोप लगाकर जेल में डाला गया है, ये दीगर बात कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोषी साबित नहीं किया जा सका है।

ओस्मान कवाला को अभी पिछले साल ही साल 2013 में हुये देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया गया था लेकिन इसके बाद उन्हें तुरंत ही दोबारा गिरफ़्तार कर लिया गया था। तुर्की एक्टिविस्ट ओस्मान कवाला पर साल 2016 में तुर्की में हुई तख़्तापलट की कोशिश और अर्दोआन सरकार को गिराने की कोशिश से जुड़े आरोपों में फिर से गिरफ़्तार कर लिया गया था।

तुर्की के राष्ट्रपति के बयान पर जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सभी 10 देश इस बारे में’ गहन विचार-विमर्श’ कर रहे हैं।

वहीं नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि उसके राजदूत ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे उन्हें देश छोड़ने के लिए कहा जाए।

यूरोपीय संसद के अध्यक्ष डेविड सासोली ने शनिवार को ट्वीट करके कहा है कि – “दस राजदूतों का निष्कासन तुर्की सरकार के सत्तावादी बहाव का संकेत है। हम भयभीत नहीं होंगे। उस्मान कवाला की आज़़ादी के लिए ।


ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसे तुर्की के तत्कालीन 10 राजदूतों को “अस्वीकार्य व्यक्ति” घोषित करने की घोषणा पर “गहरा खेद” है।
शनिवार को एक ट्वीट में, मंत्रालय ने उस्मान कवाला के मामले के “निष्पक्ष और समय पर समाधान” और मानवाधिकारों के निर्णयों पर यूरोपीय सम्मेलन के कार्यान्वयन के लिए अह्वान किया ।

डेनमार्क के विदेश मंत्री जेप्पे कोफोड ने कहा है कि उनके मंत्रालय को कोई आधिकारिक अधिसूचना नहीं मिली है, लेकिन वह अपने दोस्तों और सहयोगियों के संपर्क में हैं। उन्होंने एक बयान में कहा है कि- “हम अपने साझा मूल्यों और सिद्धांतों की रक्षा करना जारी रखेंगे, जैसा कि संयुक्त घोषणा में भी व्यक्त किया गया है।”
न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि वह तब तक कोई टिप्पणी नहीं करेगा जब तक कि वह “आधिकारिक चैनलों के माध्यम से औपचारिक रूप से कुछ भी नहीं सुनता। न्यूजीलैंड तुर्की के साथ अपने संबंधों को महत्व देता है।”

वहीं जर्मन विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि सभी 10 देश एक दूसरे के साथ परामर्श कर रहे हैं। हालांकि इस मामले पर अभी व्हाइट हाउस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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