Monday, January 24, 2022

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कोविड संक्रमण: संयुक्त राष्ट्र ने चेताया पिछले जैसे हालात के लिए तैयार रहे भारत

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“भारत में पिछले साल अप्रैल-जून में 2,40,000 लोगों की मौत कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की वजह से हुई थी। इस वैरिएंट ने आर्थिक हालातों को भी प्रभावित किया था। दोबारा से ठीक वैसे ही हालात भारत में बन रहे हैं। ऐसे में भ्रम में रहने की ज़रूरत नहीं है।”

उपरोक्त बातें नरेंद्र दामोदर दास मोदी के नेतृत्व वाले भारत को चेताते हुये संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है।

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन के बढ़ते संक्रमण के बीच भारत एक बार फिर उसी ख़तरे की तरफ बढ़ रहा है, जिसका मंजर पिछले साल देखा गया था। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र ने भारत के लिए चेतावनी जारी की है। वैश्विक आर्थिक हालात एवं संभावनाएं'(डब्ल्यूईएसपी) फ्लैगशिप रिपोर्ट में कहा गया गया है कि कोरोना के बेहद संक्रामक ओमिक्रोन स्वरूप के कारण संक्रमण की नई लहर चल पड़ी है। इसलिए यह महामारी एक बार फिर से आर्थिक हालातों और इंसानों को प्रभावित कर सकती है।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में ओमिक्रोन वैरिएंट विकराल रूप धारण कर चुका है। हालात ये हो गए हैं कि कई राज्यों में मेडिकल ढांचा पूरी तरह से चरमरा गया है और व्हाइट हाउस को कई प्रांतों में सेना को उतारना पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका में गुरुवार को अस्पतालों में पिछले 24 घंटे अंदर 1,42,388 मरीज भर्ती किए गए। हालात बेकाबू होते देखकर राष्ट्रपति जो बाइडन ने मिशिगन, न्यूजर्सी, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओहायो और रॉड आईलैंड के अस्पतालों में मदद के लिए सैनिक रवाना किए हैं।

2.64 लाख नये मामले पिछले 24 घंटे में आये

देश में कोरोना के मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते 24 घंटे में देश में 2.64 लाख से ज्यादा (2,64,202) मामले सामने आए। यह संख्या गुरुवार के मुकाबले 6.7 प्रतिशत ज्यादा है। गुरुवार को 2.47 लाख(2,47,417) मामले सामने आए थे। देश में अब संक्रमण दर बढ़कर 14.78% पहुंच चुकी है।

देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमितों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को कोरोना के नए वैरिएंट से संक्रमित होने वालों की संख्या बढ़कर 5753 पहुंच गई।

ताजा जानकारी के अनुसार, बीते 24 घंटे में कोरोना से 315 लोगों की मौत हो गई। इससे कुल मौतें बढ़कर 4,85,350 पहुंच गईं।

जबकि राजधानी दिल्ली में आज कोरोना के 28,867 मरीज सामने आए हैं।

दिल्ली में कोरोना से मरने वाले 75% लोगों को नहीं लगा था वैक्सीन

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया है कि हाल ही में कोरोना से हुई मौतो में 75 प्रतिशत ने कोरोना का टीका नहीं लगवाया था।

9 जनवरी से 12 जनवरी के बीच दिल्ली में कोविड-19 के चलते जिन 97 लोगों की मौत हुई, उनमें केवल 8 लोगों ने वैक्सीन की पूरी खुराक लगवाई थी। बाकी 89 लोगों ने या तो वैक्सीन की एक खुराक लगवाई थी या टीका लगवाया ही नहीं था। मृतकों में से 19 लोगों ने कोरोना वैक्सीन की एक खुराक ली थी जबकि 70 लोग पूरी तरह से वैक्सीनेटेड नहीं थे।

यह रिपोर्ट 97 कोविड-19 पॉजिटिव मृतकों में से 37 के बारे में डिटेल जानकारी देती है जिन्होंने 9 से 12 जनवरी के बीच सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान दम तोड़ा। इसमें यह भी पता चलता है कि टीका लगवाए या न लगवाने वाले मृतकों में पहले से गंभीर बीमारियां थीं। इसमें क्रोनिक किडनी रोग, हार्ट और लिवर से जुड़ी बीमारियां शामिल हैं। कुछ लोगों को मेडिकल इमरजेंसी के लिए भर्ती किया गया था और रूटीन टेस्ट के दौरान वे कोविड पॉजिटिव मिले और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

पांच चुनावी राज्यों में वैक्सीनेशन अधूरा

CoWin पोर्टल के मुताबिक पंजाब, उत्तर प्रदेश और मणिपुर राज्यों में क़रीब 17 करोड़ की वयस्क आबादी होने का अनुमान है। इनमें से मात्र 8.95 करोड़ लोगों ने ही कोविड वैक्‍सीन की दूसरी डोज लगवाई है। कोविड के बढ़ते मामलों के बीच हो रहे चुनावों में इतनी बड़ी आबादी अभी अपना पूरा वैक्सीनेशन नहीं करा पाई है।

अगर इन तीनों राज्यों के वैक्सीनेशन की बात करें तो उत्तर प्रदेश में करीब 53.3 प्रतिशत वयस्कों का ही पूरा वैक्सीनेशन हुआ है। ठीक इसी तरह पंजाब में वैक्सीनेशन की दर वयस्कों में 44 प्रतिशत और मणिपुर में अनुमानित रूप से 42 प्रतिशत तक ही है। जबकि गोवा में वैक्सीनेशन की दर 88 प्रतिशत और उत्तराखंड में 82 प्रतिशत के संतोषजनक मानकों पर है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव 4-6 सप्ताह टालने के लिये कहा

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग को बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते निकाय चुनावों को 4-6 सप्ताह के लिए स्थगित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग 48 घंटे के भीतर अपना रुख स्पष्ट करेगा। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए यूपी चुनाव टालने पर विचार करने को कहा था।

कोरोना काल में इलाहाबा संगम तट पर माघमेला

आज मकरसंक्राति के नहावन के साथ ही इलाहाबाद में माघ मेला की शुरुआत हो गई है। आज मतरसंक्राति के पर्व पर लाखों लोगों के गंगा में डुबकी लगाने के अनुमान हैं। 47 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन के दौरान लाखों की तादाद में श्रद्धालु गंगा में स्नान करेंगे।

लगातार ये अपील हो रही है कि मेला रद्द होना चाहिए, लेकिन प्रयागराज में ये मेला लग रहा है। ऐसे में सवाल ये कि महामारी के दौर में ये मेला क्यों?

आस्था का ये मेला कोरोना का सुपर स्प्रेडर हो सकता है। माघ मेले में 18 और लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। अब तक कुल 70 लोग संक्रमित हो चुके हैं।

यूपी विधानसभा चुनाव में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को कोरोना कर्मी का दर्जा देने की मांग

उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश लखनऊ को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि विधानसभा चुनाव में लगने वाले प्रत्येक कर्मी को कोरोनाकर्मी माना जाए। चाहे वह प्रशिक्षण में शामिल हो या फिर मतदान या अन्य गतिविधि हो। विधानसभा चुनाव 2022 में बड़े पैमाने पर शिक्षकों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इन सभी को कोरोनाकर्मी का दर्जा देने के लिए आवाज उठाई जा रही है। शिक्षक संघों का कहना है कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले प्रदेश भर के 1622 शिक्षकों व कर्मियों की कोरोना संक्रमण के चलते जान गई थी। उन्हें कोरोना कर्मी का दर्जा न मिलने के कारण किसी तरह का लाभ भी नहीं दिया गया। फिर वही हालात पैदा हो रहे हैं।

पत्र में यूपी जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ द्वारा कहा गया है कि स्कूल के शिक्षकों के साथ शिक्षामित्रों की भी ड्यूटी लगाई जा रही है। उनकी सुरक्षा के लिए किसी तरह के ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जिन लोगों की चुनाव में ड्यूटी लग रही है उन्हें 50 लाख का बीमा कवर दिया जाए। जो प्रशिक्षण गतिविधि हो वह आनलाइन कराई जाए। यह भी मांग की गई है कि महिला कर्मियों को ड्यूटी से मुक्त रखा जाए। यदि उनकी ड्यूटी लगाना अनिवार्य हो तो पति पत्नी में से किसी एक की ड्यूटी लगे।

ऐसा इसलिए कि संक्रमण की स्थिति में परिवार की देखभाल करने वाला कोई मौजूद रहे। निर्वाचन ड्यूटी से वापस आने पर प्रत्येक कर्मी को अनिवार्य रूप से सात दिन का अवकाश दिया जाए जिससे वह होमआइसोलेशन में रह सके। ऐसा करने से संक्रमण के विस्तार को रोकने में मदद मिलेगी। प्रत्येक शिक्षक व कर्मी को बूस्टर डोज भी जरूर दिलाई जाए। पूर्व के पंचायत चुनाव से सबक लेते हुए कोरोना से बचाव संबंधी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए। सभी कर्मियों को मास्क, सैनिटाइजर, कोरोना से बचाव संबंधी किट भी दी जाए।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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