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यूपीः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना नोटिस मनमाने ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शशिकांत गुप्ता और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने पूरे प्रदेश में चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि जो भी ध्वस्तीकरण से प्रभावित लोग हैं, उन्हें कानून के अनुसार नोटिस दिया जाए और उनकी आपत्तियों को सुनकर आदेश पारित किया जाए।

दरअसल पिछले कुंभ के समय रोड चौड़ीकरण का काम प्रयागराज सहित लगभग पूरे प्रदेश में किया गया। भूमिधारी जमीनों पर बने पचास से सौ साल पुराने मकानों को बिना मुआवजा दिए, बिना नोटिस दिए ध्वस्त कर दिया गया। प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में फिर चौड़ीकरण के लिए लाल निशान लगाए गए हैं, लेकिन किसी को न नोटिस दी गई है न चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है। इस बीच माफिया की संपत्ति ध्वस्त करने के नाम पर बड़े पैमाने पर प्रयागराज सहित पूरे प्रदेश में सरकार द्वारा बिना नोटिस दिए, बिना आपत्तियों का निराकरण किए बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण किया जा रहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण मामले में सामान्य आदेश जारी किया है और आदेश का पालन करने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव, सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों, सभी जिलाधिकारियों को आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ 30 दिन में विधिक अपील दाखिल करने और अपील का निस्तारण करने की अवधि तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न की जाए।

यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने अब्बास अंसारी और जमशेद रजा की याचिका पर दिया है। खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा है कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि क़ानून प्रकृति में पूर्व स्वामित्व के लिए आयोजित किए जाते हैं और नागरिकों के मूल्यवान संवैधानिक अधिकारों को छीनने के लिए उन्हें सख्त किया जाना चाहिए। तदनुसार, हम निर्देश देते हैं कि-
1. राज्य अधिकारियों, जहां कभी भी दो अधिनियमों के तहत निजी संपत्तियों पर उठाए गए निर्माणों के संबंध में विध्वंस के आदेश पारित किए जाते हैं, को वास्तविक विध्वंस के लिए किसी भी कार्रवाई करने से इंतजार करना चाहिए जब तक कि अपील की वैधानिक अवधि समाप्त नहीं हो जाती।
2. अपीलीय प्राधिकारी ने दोनों अधिनियमों को सशक्त बनाया, अपील के साथ दायर अंतरिम आवेदनों को तय करने का प्रयास करना चाहिए, यदि कोई हो, तो अंतरिम रूप से आवेदन की तारीख से दो सप्ताह की अवधि के भीतर उसका निस्तारण किया जाना चाहिए।
3. वैधानिक अपील में दायर अंतरिम आवेदन के निपटान तक अधिकारियों को विध्वंस के आदेशों को निष्पादित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।
4. अधिनियमों के तहत पारित विध्वंस आदेशों की प्रतियां, उन व्यक्तियों पर ठीक से तामील की जानी चाहिए, जिनके खिलाफ आदेश पारित किए गए हैं।
5. प्रस्तावित विध्वंस के आदेशों को उन व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देने के बाद पारित किया जाना चाहिए, जिनके खिलाफ आदेश पारित किए जाने का प्रस्ताव है।

याची का कहना है कि उसने 29 सितंबर 2000 को जमीन का बैनामा कराया। 5 दिसंबर को व्यावसायिक निर्माण का नक्शा पास कराने का आवेदन दिया। 31 दिसंबर 2002 को कंपाउंडिंग का अनुमोदन कर दिया गया, किन्तु बिना सुनवाई 15 सितंबर 2020 को अनुमोदन निरस्त कर दिया गया और 16 सितंबर 20 को ध्वस्तीकरण का कारण बताओ नोटिस दिया गया। 8 अक्टूबर को एक हफ्ते में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आदेश जारी किया गया है, जिसे चुनौती दी गई थी।

इस बीच सतीश चंद्र खरे के साथ हाई कोर्ट में वकालत कर चुके राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोगों के चुनचुन कर ताबड़तोड़, मकान ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर विरोध दर्ज करते हुए कहा कि यह किसके आदेश पर कार्रवाई हो रही है, जो बिना नोटिस दिए मकानों को ध्वस्त किया जा रहा है। यह राजनीतिक द्वेषपूर्ण कार्रवाई है। इमरजेंसी में भी ऐसा नहीं होता था जिस तरह की कार्रवाई इस सरकार में हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती हैं पर अधिकारियों को एक पक्षीय न होकर न्यायसंगत कार्य करना चाहिए।

सांसद ने कहा कि मकान गिराने का अधिकार नहीं है, पीडीए वो सील कर जब्त कर सकती है, जब तक न्यायालय से कोई आदेश न पारित हो उस पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो सकती। माना किसी पर गैंगस्टर एक्ट लगा है और आपने उसका मकान ध्वस्त कर दिया। कल को वो न्यायालय से गैंगस्टर एक्ट से बरी हो जाता है तो आप उसका मकान और सम्मान वापस करेंगे?

उन्होंने एतराज दर्ज करते हुए कहा कि  दिलीप मिश्रा का मार्केट यूनाइटेड कॉलेज के सामने है, जिसका निर्माण पीडीए की सीमा में आने से पहले हुआ था तो किस अधिकार से उसे अवैध निर्माण में गिराया गया। इसी प्रकार कितने मुस्लिम समुदाय, पासी और यादव बिरादरी के लोगों पर गैंगस्टर की कार्रवाई के नाम पर मकान ध्वस्तीकरण किया गया। पीडीए खुद न्यायालय बन गया या ऊपर से आदेशानुसार चुनचुन कर कार्रवाई हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पूरी तरह से तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं, जो चुनचुन कर यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण और समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोगों पर कार्रवाई कर रही है। यह सब भाजपा की सोची-समझी राजनीतिक चाल है कि इस तरह समाजवादी विचारधारा को डरा धमका कर दबा दिया जाए, जिससे वो चुनाव तक उबर न पाएं, क्योंकि सरकार हर मोर्चे पर फेल है। इन सब कार्रवाई के बाद भी प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त है। बलात्कार, लूट, हत्या, चोरी, राहजनी, चरम पर है पर राजनीति से जुड़े विरोधियों पर कार्रवाई करके सरकार अपनी विफलता छुपाने की कोशिश कर रही है, जिसे जनता अच्छी तरह से समझ रही है।

सपा प्रदेश प्रवक्ता विनय कुशवाहा ने कहा कि समाजवादी सरकार के समय में न्यायालय के समानांतर सरकार चलती है। हर जनहित, भर्ती के निर्णय पर पीआईएल या स्वतः संज्ञान लिया जा रहा था, पर आज देश बिक रहा है। मजदूर  सड़क पर मर रहे हैं। न्यायालय को दरकिनार कर खुद ही सब निर्णय ले लिए जा रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी छीनी जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। पर सब चुप हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on October 17, 2020 9:36 pm

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