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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव: निर्णायक बढ़त के बाद भी बिडेन की जीत पर तमाम किंतु-परंतु

हर बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले दोनों प्रत्याशियों के बीच सार्वजनिक मंच पर बहसें कराई जाती हैं। महामारी के बीच इस बार का चुनाव बहुत दिलचस्प मोड़ पर है। परिस्थितिजन्य बाध्यता के चलते इस बार प्रस्तावित तीन बहसों में से केवल दो ही हो सकीं, लेकिन उनकी प्रकृति व्यापक होने के बजाय व्यक्तिगत ज्यादा रहीं। फिर भी चूंकि ये चुनाव हमेशा ही विश्व की महत्वपूर्ण परिघटना माने जाते हैं, इसलिए इन बहसों के दौरान क्या कुछ घटा और कौन से मुद्दे छाए रहे, उन्हें जानना-समझना जरूरी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान दोनों प्रत्याशियों के बीच 29 सितंबर को हुई पहली चुनावी बहस (प्रेसिडेंशियल डिबेट) वास्तव में बहस कम झड़प ज्यादा थी। 90 मिनट की यह बहस काफी गरमागरम थी और इसमें श्रोताओं और दर्शकों को भी झुंझला देने की हद तक टोकाटाकी और तीखी जुबानी जंग हुई। इस बहस में दोनों प्रत्याशियों के बीच मुख्य रूप से कोरोना महामारी, वैक्सीन, सुप्रीम कोर्ट में जज की नियुक्ति और टैक्स विवाद जैसे मुद्दे बहस के केंद्र में रहे, लेकिन इस बहस में दोनों के बीच काफी तू-तू-मैं-मैं हुई और एक दूसरे पर छींटाकशी की गई।

पहली बहस के दौरान जो बिडेन की बॉडी लैंग्वेज अपने को मजबूत और शांत साबित करने की कोशिश थी, ताकि दर्शकों को उन पर बढ़ती उम्र का असर न महसूस हो और उन्हें फैसले लेने में सक्षम व्यक्ति समझें। बिडेन अपने इस प्रयास में सफल रहे। अपनी बात रखने के दौरान ट्रंप द्वारा लगभग 73 बार टोके जाने और तीखी नोंकझोंक के बावजूद बिडेन ने अपना धैर्य बनाए रखा और और कई बार तो उनके हमलों के जवाब में महज मुस्करा दिए। हलांकि ट्रंप ने बिडेन की बुद्धिमत्ता को प्रश्नांकित किया और बिडेन ने भी ट्रंप को जोकर कहा और बोले, “क्या आप चुप रहेंगे?” ट्रंप के लिए सबसे कठिन सवाल कोरोना महामारी से हुई दो लाख से ज्यादा अमरीकियों की मौतों और इस महामारी से निपटने के लिए उठाए गए सरकारी कदमों का था। ट्रंप की सफाई के जवाब में बिडेन ने उपस्थित दर्शकों और कैमरे की तरफ देखते हुए पूछा, “क्या आप ट्रंप की इस बात का विश्वास करेंगे?”

अमेरिका में नस्लवाद के मुद्दे पर बात करने से ट्रंप कतराते दिखे। जॉर्ज फ्लॉएड की हत्या के बाद पूरे देश में नस्लवाद विरोधी प्रदर्शनों की बाढ़ आ गई थी, जो अभूतपूर्व था। बिडेन ने ट्रंप पर नस्ल विरोधी विभाजन बढ़ाने का आरोप लगाया, लेकिन ट्रंप ने इस विषय को अगंभीरता से किनारे कर दिया। अपने ज्यादा काम करने की दलील देते हुए ट्रंप ने बिडेन को कहा कि मैंने 47 महीने में जितना काम किया है, उतना आपने 47 सालों में भी नहीं किया होगा। इस पर बिडेन ने कहा कि आपके काम से अमेरिका पहले से ज्यादा कमजोर, बीमार और गरीब हुआ है और पहले से ज्यादा विभाजित और हिंसक भी हुआ है।

इस बहस में जो बिडेन न्यूयार्क टाइम्स की उस खबर के मुद्दे को मजबूती से नहीं उठा पाए जिसके अनुसार ट्रंप ने 2016 और 2017 में मात्र 750 डॉलर टैक्स अदा किया था। यह टैक्स चोरी का मामला था, किंतु बिडेन की कमजोर दलील और ट्रंप की इस सफाई से यह बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया कि ट्रंप ने टैक्स कानूनों के बेहतर इस्तेमाल से यह टैक्स बचाया है। फिर भी पहली बहस के बाद के सर्वेक्षणों में 50 प्रतिशत लोगों ने इसे जो बिडेन के पक्ष में झुका हुआ बताया तो 34 प्रतिशत लोगों ने डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में, जबकि 16 प्रतिशत लोगों ने अपनी राय नहीं दी।

दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच दूसरी चुनावी बहस 15 अक्तूबर को होने वाली थी, किंतु ट्रंप के कोविड से संक्रमित हो जाने के कारण यह बहस रद्द कर देनी पड़ी थी। उस दौरान ट्रंप को क्वारंटीन रहने की हिदायत थी। इस बीच 7 अक्तूबर 2020 को उपराष्ट्रपति पद की प्रत्याशियों, रिपब्लिकन पार्टी की माइक पेंस और डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस की चुनावी बहस जरूर हुई, लेकिन राष्ट्रपति पद के दोनों प्रत्याशियों के बीच प्रस्तावित तीसरी बहस ही दूसरी बहस बन गई।

यह दूसरी, और इस कड़ी की अंतिम चुनावी बहस 22 अक्तूबर 2020 को हुई। इस बहस पर पहले ही, पहली बहस की कड़वाहट का साया मंडरा रहा था। पहली बहस के निम्न स्तर के कारण काफी श्रोताओं और दर्शकों का मन खट्टा हो गया था, क्योंकि उस बहस में उसके संचालक, यानि मॉडरेटर का हस्तक्षेप भी बेअसर साबित हुआ था। इसलिए अंतिम बहस में मॉडरेटर को म्यूट बटन उपलब्ध कराया गया था, ताकि दूसरे की बात के बीच में बोलने वाले प्रत्याशी की आवाज को म्यूट किया जा सके।

तमाम आलोचनाओं और म्यूट बटन की उपलब्धता के कारण इस अंतिम बहस में दोनों ही प्रत्याशियों ने काफी संयम बरता। दोनों ने एक-दूसरे को बोलने दिया, आक्रामकता में भी शालीनता का परिचय दिया और असम्मानजनक व्यवहार नहीं किया। ट्रंप को भी पिछली बहस के नतीजे अच्छे नहीं मिले थे, इसलिए इस बार वे अलग तरीक़े से पेश आए और इस वजह से प्रभावशाली भी दिखे। इस चुनावी बहस का शायद ही अमेरिकी चुनाव के नतीजों पर कोई बड़ा प्रभाव पड़े, क्योंकि एक तो अब तक ज्यादातर मतदाता अपना पक्ष तय कर चुके हैं, दूसरे अब तक पांच करोड़ बीस लाख से भी ज्यादा मतदाता अग्रिम मतदान विकल्प का इस्तेमाल करते हुए मतदान भी कर चुके हैं।

फिर भी 22 अक्तूबर की चुनावी बहस में प्रत्याशियों के बीच व्यक्तिगत आरोपों-प्रत्यारोपों का काफी तीखा दौर चला। ट्रंप ने तो अपने प्रतिद्वंद्वी और उसके परिवार पर भ्रष्टाचार के इतने अपुष्ट और झूठे आरोप लगाए कि फैक्ट चेक करने वाले लगातार व्यस्त रहे। हमारे देशवासियों को भी यह बात पता चल गई कि धाराप्रवाह ‘झूट पर झूट, झूट पर झूट’ बोलने वाली मशीन अमेरिका में भी है। बहस के मुख्य विषय अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, नस्लीय भेदभाव, प्रवासियों के मुद्दे और स्वास्थ्य ढांचा इत्यादि थे, लेकिन पूरे चुनाव अभियान के दौरान प्रमुख बना रहा कोरोना महामारी का मुद्दा इस बहस में भी सभी मुद्दों पर छाया रहा। इस बीमारी से अमेरिका में अब तक दो लाख 30 हजार से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं।

ट्रंप शुरू से ही कोरोना का माखौल उड़ाते और उसे नाचीज बताते रहे हैं। उनके इस रवैये ने अमेरिका में कोविड के खिलाफ अभियानों को काफी कमजोर किया है। ट्रंप ने बहस में दावा किया कि महामारी पर काबू पाया जा चुका है, जबकि अमेरिका में कोरोना संक्रमण की ताजा लहर में 80 हजार से ज्यादा मामले प्रतिदिन आने लगे हैं। जो बिडेन ने कहा, “इतनी सारी मौतों के जिम्मेदार इंसान को राष्ट्रपति बनाए रखना ठीक नहीं है।” ट्रंप ने बताया कि हमने अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होने दिया, हम इसके साथ जीना सीख रहे हैं। इस पर बिडेन ने कहा कि छोड़िए जनाब, हम इसके साथ जी नहीं रहे, मर रहे हैं।

अपने बयान में ट्रंप अपने अगले कार्यकाल के लिए कोई एजेंडा नहीं रख पाए, जबकि बिडेन बार-बार उन्हें खींच कर उनके वर्तमान कार्यकाल में वाइरस द्वारा अमेरिकी लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान के मुद्दे पर लाते रहे। ट्रंप ने बिडेन और उनके पुत्र हंटर पर चीन और यूक्रेन में अनैतिक आर्थिक गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप लगाए, लेकिन कोई प्रमाण नहीं दिए, बिडेन ने इन आरोपों को झूठा कह कर नकार दिया।

बिडेन ने कहा कि आपने पिछले 20 साल से लगभग कोई टैक्स नहीं दिया है। आप अपना टैक्स रिटर्न दिखा दीजिए। ट्रंप पहले भी टैक्स रिटर्न दिखाने से बचते रहे हैं। उनहोंने कहा, “एक ऑडिट चल रही है, उसके बाद मैं रिटर्न दिखा दूंगा।” बिडेन ने कहा कि “ट्रंप अब तक के सर्वाधिक नस्लवादी राष्ट्रपतियों में से एक हैं। ये हर नस्लवादी आग को भड़काते रहते हैं।” ट्रंप ने हास्यास्पद दावा किया, “मैंने अश्वेत अमरीकियों के लिए जितना किया है, अब्राहम लिंकन के अलावा शायद ही किसी राष्ट्रपति ने किया हो।”

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बिडेन ने कहा, “पर्यावरण पर मेरी योजना से तेल उद्योग से हट कर ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता में मदद मिलेगी।” इस पर ट्रंप हमलावर होकर चीखने लगे, “ये तेल उद्योग को बर्बाद करने जा रहे हैं।” बाद में बिडेन को संवाददाताओं के सामने सफाई देनी पड़ी, “हम लंबे समय तक जीवाश्म ईंधन से छुटकारा नहीं पा सकेंगे, मैं तेल कंपनियों को मिलने वाली संघीय सब्सिडी को खत्म करने की बात कर रहा था।” बिडेन ने ट्रंप की इस बात के लिए आलोचना की कि ये सुप्रीम कोर्ट को इस बात के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं कि वह मेरे द्वारा उपराष्ट्रपति रहते, 2010 में पारित कराए गए ‘सस्ती चिकित्सा अधिनियम’ को असंवैधानिक घोषित कर दें। यह अधिनियम बीमा कंपनियों को बाध्य करता है कि वे पहले से बीमार चल रहे लोगों का बीमा करने से मना नहीं कर सकतीं, क्योंकि यह लोगों का हक है।”

इन बहसों में निश्चित रूप से निजी हमले ज्यादा हुए, और हम यह भी जानते हैं कि रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी की राजनीति, और खास करके अर्थ नीति में कोई खास फर्क नहीं है। अमेरिका में भी अधिक से अधिक शासक बदलेगा, निजाम बदलने की उम्मीद दूर-दूर तक नहीं है। ये चुनाव दुनिया को नवउदारवादी अर्थतंत्र के मकड़जाल से निजात मिलने की कोई उम्मीद दिखाने वाले नहीं हैं। अधिक से अधिक इतना हो सकता है कि कोरोना महामारी के दौरान अमेरिका की अधिकाधिक निजीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था जिस तरह से चरमरा गई है, उससे कुछ सबक लेते हुए वहां स्वास्थ्य के क्षेत्र में सार्वजनिक व्यय को बढ़ाने का कुछ दबाव बढ़े। अगर जो बिडेन जीतते हैं तो बर्नी सैंडर्स जैसे सोशल डेमोक्रेट का महत्व बढ़ सकता है, क्योंकि उन्होंने जो बिडेन के पक्ष में अपनी राष्ट्रपति पद की दावेदारी वापस ले ली थी। अगर ऐसा हुआ तो निश्चित रूप से कुछ जनपक्षधर योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। शेष किसी बदलाव और ज्यादा बराबरी पर आधारित अमेरिका के लिए किसी क्रांतिकारी बदलाव का इंतजार करना पड़ेगा।

  • शैलश

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। )

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This post was last modified on October 24, 2020 8:36 pm

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