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Monday, September 20, 2021

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कोरोनिल का सच क्या है?

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सवाल : भारत सरकार ने कोरोनिल को कोरोना की दवा के रूप में मंजूरी क्यों नहीं दी?
जवाब : क्योंकि खुद रामदेव ने कोरोना को ‘इम्युनिटी बूस्टर’ बताकर आवेदन किया था।

सवाल : मोदी सरकार ने कोरोनिल की बिक्री पर रोक क्यों लगा दी थी?
जवाब : क्योंकि रामदेव ने इम्युनिटी बूस्टर के नाम पर मंजूरी लेने के बाद इसे कोरोना की दवा कहकर बेचने का फर्जीवाड़ा किया।

सवाल : रामदेव ने कोरोना की दवा के रूप में ही इसकी मंजूरी के लिए आवेदन क्यों नहीं किया?
जवाब : क्योंकि कोरोना की दवा के तौर पर मंजूरी के लिए वैज्ञानिक ढंग से क्लीनिकल ट्रायल करना पड़ता। एक निश्चित संख्या में कोरोना संक्रमित मरीजों को कोरोनिल खिलाकर यह देखना पड़ता कि वे लोग कोरोना निगेटिव हुए, या नहीं?

सवाल: तो क्या कोरोनिल का क्लीनिकल ट्रायल किया ही नहीं गया?
जवाब : रामदेव ने पहले दावा किया था कि राजस्थान की NIMS यूनिवर्सिटी में कोरोनिल का क्लीनिकल ट्रायल किया गया है। लेकिन उस यूनिवर्सिटी ने इससे साफ इंकार कर दिया।

सवाल : इस पर सरकार ने क्या किया?
जवाब : क्लीनिकल ट्रायल के फर्जी दस्तावेज जमा करने का ऐसा फर्जीवाड़ा किसी अन्य ने किया होता, तो जेल में होता।

सवाल : क्या कोरोनिल को WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन से मान्यता मिली है?
जवाब : इस पर भी रामदेव ने भ्रम फैलाने का प्रयास किया है। कहा जा रहा है कि यह WHO के स्टैण्डर्ड को ध्यान में रखकर बनाई गई है। लेकिन यह तो खुद ही खुद को दिया गया सर्टिफिकेट है। इसे WHO ने प्रमाणित नहीं किया है।

सवाल : अब कोरोनिल की बिक्री कैसे हो रही है?
जवाब : कानूनी तौर पर इसे इम्युनिटी बूस्टर के नाम पर बेचा जा रहा है। लेकिन यह भ्रम फैलाया गया है कि यह कोरोना की कारगर दवा है।

सवाल : ऐसे मरीजों पर क्या असर होता है?
जवाब : जब यह कोरोना की दवा ही नहीं है, तो असर क्या होना है? कोरोना के सामान्य मरीज यूं ही ठीक हो जाते हैं। जिनकी तबियत ज्यादा खराब हो जाए, वे अस्पताल भागते हैं। ज्यादातर लोग डॉक्टर को यह भी नहीं बताते कि उन्होंने कोरोनिल या ऐसी कोई अन्य दवा ली है।

सवाल : रामदेव अब तक एक करोड़ कोरोना मरीजों को ठीक करने का दावा कर रहे हैं। वो क्या है?
जवाब : जब कोई मरीज सिर्फ कोरोनिल के भरोसे नहीं है, बल्कि अन्य दवा भी ले रहा है, और जब यह कोरोना की दवा है ही नहीं, तो इसकी ऑडिटिंग कैसे होगी? किसी अस्पताल में भर्ती हर मरीज को मिली दवा का रिकॉर्ड होता है। उससे दवा के प्रभाव का पता चलता है। रामदेव को इतना भरोसा है, तो 100 कोरोना मरीजों को सिर्फ कोरोनिल के भरोसे ठीक करने का क्लीनिकल ट्रायल क्यों नहीं कर लेते? ऐसा करने से उनकी कोरोनिल को कोरोना की दवा के तौर पर मंजूरी भी मिल सकती है।

सवाल : तो क्या आयुर्वेद उपयोगी नहीं?
जवाब : आयुर्वेद, योग, प्राणायाम, व्यायाम इत्यादि हर चीज हमारी अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। लेकिन इसे धंधा बनाकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ न हो। जब लाखों लोगों की जिंदगी कोरोना संक्रमण के कारण दांव पर लगी हो, तब दुनिया भर में मान्यता प्राप्त इलाज पर ही भरोसा कर सकते हैं। अगर भारत सरकार कोरोनिल को कोरोना की दवा के तौर पर मंजूरी देती है, तब किसी को ऐतराज नहीं होगा।

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