Subscribe for notification

क्या NHAI में देश का सबसे बड़ा घोटाला चल रहा है?

भारत सरकार का एक उपक्रम है भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI , जो मोदीराज में अब बर्बादी की कगार पर पुहंच गया है। निर्माण परियोजनाओं की बढ़ती लागत और कर्ज का बोझ एनएचएआई के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है।

हालात इस कदर काबू के बाहर हो गए हैं कि 17 अगस्त को PMO से नृपेंद्र मिश्रा ने एक पत्र में NHAI को लिखा है, ‘राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़कों के अनियोजित और अत्यधिक विस्तार के कारण पूरी तरह से ठप्प पड़ गया है। NHAI ज़मीन की लागत का कई गुना भुगतान के लिए बाध्य हुआ; इसकी निर्माण लागत काफ़ी बढ़ गई। सड़क का बुनियादी ढाँचा आर्थिक रूप से अलाभकारी हो गया है।’

एनएचएआई पर कर्ज का बोझ खासा बढ़ गया है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक कुल कर्ज बढ़कर 2.5 लाख करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है। NHAI के पूर्व चेयरमैन बृजेश्वर सिंह ने टेलीविजन पर एक साक्षात्कार में कहा कि वास्तविक अनुमानित देनदारी पांच गुना अधिक होकर 3 लाख करोड़ रुपये तक भी हो सकती है।

इस स्थिति से CAG भी चिंतित है सीएजी ने इसके लिए वित्त मंत्रालय को आगाह करते हुए कहा है कि NHAI द्वारा लिया गया ऋण सरकार के लिए भी ऋण है, और उसी के मुताबिक इसका हिसाब होना चाहिए।

PMO अब चाहता है कि हाईवे निर्माण के लिए पुरानी व्यवस्था अपनाई जाए जहां NHAI डेवलपर्स के लिए परियोजनाओं की नीलामी करे और डेवलपर्स सड़कों का निर्माण करें, टोल टैक्स वसूलें और फिर एक तय समय के बाद सड़क को एनएचएआई को वापस सौंप दें।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर NHAI इस स्थिति तक कैसे पुहंच गया। क्या कोई बड़ा घोटाला पूरे देश भर में चल रहे हाईवे निर्माण में चल रहा है। पांच साल पहले तक NHAI हर साल 3-4 हजार करोड़ रुपये जुटाता था और उसी पैसे से रोड बनाई जाती थी लेकिन इन पांच सालों में यह रकम 17-18 गुना तक बढ़ गई। वित्त वर्ष 2014-15 में NHAI ने बाजार से करीब 3,340 करोड़ रुपये ही जुटाए थे। लेकिन 2017-18 में उसने करीब 50 हजार करोड़ रुपये तथा 2018-19 में 62 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बाजार से जुटाए।

दरअसल हाईवे विस्तार में NHAI को भूमि अधिग्रहण करना पड़ता है देश के राजमार्ग खेती कर रहे किसान की जमीन से गुजरते हैं, बताया जा रहा है कि NHAI हाईवे निर्माण के लिए बाजार दर से अधिक भाव में जमीन का अधिग्रहण कर रही है जिससे हाईवे निर्माण की लागत पिछले तीन साल में करीब 4 गुना तक बढ़ गई है। भूमि अधिग्रहण में NHAI आवंटित निधि से ज्यादा खर्च कर रही है।

NHAI ने 2017 के आखिर में लार्सन एंड टूब्रो, एचसीसी और एस्सेल इंफ्रा जैसी बड़ी कंपनियों को अटकी हुई परियोजनाओं के लिए बोली लगाने से प्रतिबंधित कर दिया था। लेकिन इस मंत्रालय के गडकरी जी ने इस काली सूची संबंधी आदेश पर अस्थायी रोक लगाते हुए 2018 की पहली छमाही में बैंकरों, कंपनियों और अन्य पक्षों के साथ मैराथन बैठकें कर इस सूची को लगभग निरस्त करवा दिया और बड़ी सड़क निर्माण परियोजनाओं को पुनः शुरू करवा दिया गया जिसके ठेकों में लाखों करोड़ की रकम इन्वॉल्व थी।

NHAI के पास आय के दो ही स्रोत हैं। पहला रोड सेस से मिलने वाली हिस्सेदारी और दूसरा राजमार्गों पर एकत्र किया जाने वाला टोल टैक्स। हालांकि पिछले पांच वर्षों में दोनों में खासी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन कर्ज में बढ़ोतरी के मुकाबले ये काफी कम है। यह आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाली कहावत पर चलने की बात है।

भूमि अधिग्रहण पर एनएचएआई की लागत हर साल बढ़ती ही जा रही है। यह वित्त वर्ष 2016-17 में 17,824 करोड़ रुपये थी, जो 2017-18 में दोगुनी होकर 32,143 हो गई। माना जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण के लिए NHAI मार्केट से सवा लाख करोड़ रुपए लोन उठा चुकी है, जिसका सालाना ब्याज ही 9 हजार करोड़ रुपए है। ऐसे में NHAI ब्याज के बोझ से दबती जा रही है।

2018 में NHAI ने भारतीय स्टेट बैंक SBI से 25,000 करोड़ रुपए का दीर्घकालीन कर्ज लिया है यह एसबीआई द्वारा किसी भी कंपनी को दिया जाने वाला बिना गारंटी वाला (असुरक्षित) सबसे बड़ा कर्ज है।

लेकिन इस लोन से भी अब NHAI का कामकाज चलने वाला नहीं है। इसलिए अब उसने भविष्य की राजमार्ग परियोजनाओं जैसे भारतमाला परियोजना के लिए जीवन बीमा निगम LIC से 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये की ऋण सुविधा लेने का फैसला किया है। जबकि पहले ही पिछले पांच साल में एनएचएआई पर क़र्ज़ सात गुना बढ़ चुका है।

यानी सब ले देकर LIC पर ही छप्पर धरने की तैयारी कर रहे हैं। अगर यही हालात रहे तो 2024 तक LIC को डूबने से कोई ताकत बचा नहीं पायेगी।

(गिरीश मालवीय स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और आजकल इंदौर में रहते हैं।)

Share

Recent Posts

जन्मदिन पर विशेष: अमीर ख़ान; राह चलता फकीर जिसका जहान संगीत में ही बनता, खुलता और बंद होता था!

अमीर ख़ान का गाना सुनते हुए आप सबसे पहले क्या राय बनाते हैं उनके बारे…

5 mins ago

देश भर में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने ली एकता और संविधान बचाने की शपथ

वाम दलों के संयुक्त आह्वान पर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर संविधान की रक्षा…

19 mins ago

बहुत लंबी है टीवी के पतन की प्रक्रिया

इससे पहले कि टीवी समाचार के आसमान पर छाए बादल फटते मैं निकल आया था।…

58 mins ago

डॉ. कफील पर रासुका के तहत तीन महीने के लिए डिटेंशन बढ़ाया गया

एक ओर उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से 15 दिनों के भीतर डॉ. कफील खान…

4 hours ago

लाल किले से फिर हुईं बड़ी-बड़ी घोषणाएं, लेकिन नदारद रहा रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए,…

5 hours ago

लाल किले से: सपनों के सबसे शातिर सौदागर हैं पीएम मोदी

इस सच इंकार से करना तथ्यों से मुंह मोड़ना होगा कि नरेंद्र मोदी हमारे समय…

5 hours ago

This website uses cookies.