Monday, August 8, 2022

क्या टूट गया ‘केदारनाथ समझौता?

ज़रूर पढ़े

नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस की प्रधानगी से दिया अपना इस्तीफा तो वापस ले लिया लेकिन साथ ही अपनी ही पार्टी की सरकार को चुनौती देते तथा ललकारते हुए कोप भवन में भी चले गए। पिछले दिनों वह मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ केदारनाथ धाम की यात्रा पर गए थे। तब कहा गया था कि दोनों के बीच ‘समझौता’ हो गया है। जिसके तहत, अगर आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत में आती है तो ढाई साल के बाद सिद्धू को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी। चन्नी-सिद्धू मिलकर चलेंगे और एकजुट होकर चुनाव प्रचार करेंगे।

लेकिन हफ्ता भी नहीं बीता कि आलम बदल गया। इस्तीफा वापस लेते हुए उन्होंने अपनी पुरानी जिद दोहरा दी कि वह डीजीपी और एडवोकेट जनरल को बदलने के बाद ही कांग्रेस भवन जाएंगे। (यानी फिर से पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे)। केदारनाथ यात्रा के दौरान, पूर्व प्रदेश प्रभारी हरीश रावत तथा मौजूदा प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की उपस्थिति में फैसला हुआ था कि सिद्धू इस जिद को छोड़ देंगे तथा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को स्वतंत्र तौर पर सरकार चलाने देंगे।

इस बार नवजोत सिंह सिद्धू ने चन्नी सरकार के खिलाफ पहले से कहीं ज्यादा तल्ख तेवर दिखाए। शुक्रवार को चंडीगढ़ में प्रेस-वार्ता के दौरान यहां तक कहा कि अगर नशे के सौदागरों पर कार्रवाई करने से पंजाब सरकार के पांव कांपते हैं तो यह काम उन्हें सौंप दिया जाए। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा घोषित कल्याणकारी योजनाओं पर भी सवाल उठाए और फिर कहा कि सरकार लोगों को महज लॉलीपॉप दे रही है। सिद्धू के ये तेवर सरकार और पार्टी को हतप्रभ कर रहे हैं। आवाज उठ रही है कि जो काम राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ इतनी शिद्दत के साथ विपक्ष नहीं कर रहा, उसे खुद कांग्रेसाध्यक्ष अंजाम दे रहे हैं।

नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा चरणजीत सिंह चन्नी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने पर लुधियाना के कांग्रेसी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने ट्विटर पर तंज कसते हुए दो टूक कहा कि, ‘केदारनाथ समझौता टूट गया!’ दूसरी तरफ शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सांसद सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि कांग्रेस मजाक बनकर रह गई है। ऐसे प्रधान के चलते वह कैसे चुनाव में उतरेगी? चन्नी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री कहते हैं कि चुनाव से ऐन पहले सिद्धू की ऐसी बयानबाजी पार्टी के लिए घातक है। उन्हें अपनी जुबान पर लगाम देनी चाहिए। पंजाबी के वरिष्ठ पत्रकार जतिंदर पन्नू के मुताबिक, “नवजोत सिंह सिद्धू से यह कहा जाए कि 10 मिनट चुप रहिए तो वह आठवें मिनट में ही पूछ लेंगे कि क्या 10 मिनट हो गए! अधीरता उनकी पहचान बन गई है।”।

दरअसल, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब में एक से एक कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं। हाल ही में बिजली सस्ती की गई। दिवाली के दिन गरीब लोगों के लिए बसेरा योजना अमल में आ गई और अब किसान पेंशन योजना लागू करने की तैयारी है। बसेरा योजना के तहत वंचित वर्ग को घरों की सरकारी सनद दी गईं। प्रस्तावित किसान पेंशन योजना में 60 वर्ष की उम्र से ऊपर के किसानों को सरकार 2000 रुपए की पेंशन देगी। विपक्षी भी दबी जुबान में मानते हैं कि इस सबसे चन्नी की लोकप्रियता में कहीं न कहीं इजाफा हो रहा है। इधर, बेबाक बयानबाजी करके नवजोत सिंह सिद्धू मुख्यमंत्री की राह में कांटे बिछा रहे हैं।

पंजाब के राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि चरणजीत सिंह चन्नी की बढ़ती लोकप्रियता नवजोत सिंह सिद्धू को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए खतरा दिखाई दे रही है। इसमें कोई शक नहीं कि चन्नी थोड़े वक्त में ही बहुत ज्यादा काम कर रहे हैं। वह प्रतिदिन दर्जन भर से ज्यादा मैदानी दौरे करते हैं। और सिद्धू? हकीकत यह है कि उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस की राज्य इकाई बेतहाशा चरमराई हुई है। सदस्यता अभियान एकदम ठप है। कांग्रेस के चंडीगढ़ स्थित राज्य मुख्यालय तक में सन्नाटा छाया हुआ है। जिलों और ब्लॉक स्तर के कार्यालयों का भी यही हाल है। सभी जगह ‘प्रधानजी’ का इंतजार है लेकिन वह नदारद हैं। लगता है कि ‘कोप भवन’ के कंबल उन्हें कुछ ज्यादा ही रास आ रहे हैं!

सूबे में पार्टी का एक बड़ा तबका मानता है कि कांग्रेस आलाकमान ने नवजोत सिंह सिद्धू को कमान देकर बहुत बड़ी गलती की है। पहले वह मुख्यमंत्री बनना चाहते थे और नाकाम रहने पर अब खुद के लिए ‘सुपर मुख्यमंत्री’ की भूमिका चाहते हैं। हालांकि उनके साथ एक-दो को छोड़कर कोई मंत्री और विधायक नहीं है। कांग्रेस के जमीनी स्तर के नेता और कार्यकर्ता आज भी उन्हें ‘बाहरी’ मानते हैं। ये नेता और कार्यकर्ता अलग पार्टी बना चुके पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ भी नहीं जाना चाहते और नवजोत सिंह सिद्धू को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे।
राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जा रहा है कि मौसम की तरह बदलते नवजोत सिंह सिद्धू जो कुछ कर रहे हैं, उसे राजनीति शास्त्र में ‘पॉलिटिकल ब्लैकमेलिंग’ कहा जाता है। बेशक सिद्धू कहते हैं कि उनकी मुख्यमंत्री के साथ कोई अदावत नहीं। तो फिर उनकी बयानबाजी बुनियादी तौर पर किसको घेरती है? जाहिरन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को!

(पंजाब से वरिष्ठ पत्रकार अमरीक सिंह की रिपोर्ट।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

हर घर तिरंगा: कहीं राष्ट्रध्वज के भगवाकरण का अभियान तो नहीं?

आजादी के आन्दोलन में स्वशासन, भारतीयता और भारतवासियों की एकजुटता का प्रतीक रहा तिरंगा आजादी के बाद भारत की...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This