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झारखंड के मजदूरों को अंडमान निकोबार में बनाया बंधक

रांची। झारखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों रांची, गुमला, खूंटी, सरायकेला आदि जिलों के लगभग 150 मजदूर अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के पोर्टब्लेयर में एक बिल्डर मेसर्स-सुरेंद्र इंफ्रा. प्रा.लि. कंपनी के यहां काम कर रहे थे। लॉकडाउन के बाद काम बंद हो गया और मजदूरों के खाने के लाले पड़ने लगे। एक तो कोरोना के संक्रमण का खौफ, ऊपर से कंपनी द्वारा पैसा नहीं दिए जाने के कारण मजदूरों को भूखों रहने की स्थिति बनती चली गई। यह समस्या अकेले अंडमान की नहीं रही, बल्कि पूरे देश के मजदूरों ने इस दंश को झेला। पूरा देश देखा कि किस तरह देश के मजदूरों में अफरा-तफरी का माहौल बना और कइयों की इसमें मौत हो गयी।

कोई सैकड़ों किमी पैदल चलते हुए भूखे-प्यासे मरा, तो कोई सैकड़ों किमी साइकिल से अपनों से मिलने की ललक के साथ चल तो पड़ा, मगर रास्ते में ही दम तोड़ दिया, कई लोग थके हारे रेल की पटरी को ही बिछावन समझ कर सो गये और मौत का निवाला बन गए। बावजूद इसके जो लोग धैर्य के साथ जहां थे वहीं बने रहे, उन्हें अब कंपनी के मालिकों का कोप भाजन बनना पड़ रहा है। कंपनी के मालिकान ने उन्हें खाने व रहने की व्यवस्था तक नहीं की। ऊपर से जब ये प्रवासी मजदूर अपने घर वालों, रिश्तेदारों, दोस्तों से पैसा मंगवाकर घर लौटने की कोशिश करने लगे तो उन्होंने उन्हें रोक दिया। एक तरह से उन्हें बंधक बना लिया गया। अंडमान निकोबार द्वीपसमूह का मामला कुछ इसी तरह का है।

पोर्टब्लेयर के मेसर्स-सुरेंद्र इंफ्रा. प्रा.लि. कंपनी के बिल्डर सुभाष सुरेन्द्र ने झारखंड के दर्जनों मजदूरों को बंधक बनाकर रखा है। मजदूरों को झारखंड आने नहीं दिया जा रहा है। हालांकि मजदूरों के पास खाने व झारखंड आने के लिए एक भी पैसा नहीं है। उन लोगों ने किसी तरह अपने घर वालों, रिश्तेदारों, दोस्तों से पैसे की व्यवस्था की और जब 30 मई 2020 को चलने को थे तभी बिल्डर की मिलीभगत से वहां की पुलिस ने उन्हें रोक दिया। जबकि मजदूरों ने वहां के डीएम कार्यालय में पंजीयन कराने का आवेदन भी जमा कर रखा था।

इन मजदूरों में रांची से माात्र 25 किमी दूर लापुंग प्रखंड के 12 प्रवासी मजदूर थे, इनके परिजनों ने इसकी जानकारी लापुंग प्रखंड निवासी झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ओबीसी के प्रदेश महासचिव शंकर कुमार साहू को फोन पर दी। उसके बाद साहू ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और रांची के उपायुक्त से व्हाट्सप संदेश के माध्यम से बंधक बने मजदूरों की मदद करने गुहार लगायी। उन्होंने बंधक बने मजदूरों में 32 लोगों की सूची जारी की।

बता दें कि प्रवासी मजदूरों को बंधक बनाने का यह पहला मामला नहीं है। 10 मई को खबर मिली थी कि झारखंड के ही लातेहार व पलामू जिला के दर्जनों प्रवासी मजदूर तेलंगाना के हैदराबाद स्थित बांस पल्ली में फंसे हुए हैं। वे घर आना चाहते है, परंतु संदीप खलखो नामक उनका ठेकेदार उन्हें आने नहीं दे रहा है। सरकार द्वारा जारी लिंक में रजिस्ट्रेशन भी करने नहीं दिया है। जिसके कारण सारे मजदूर दहशत में हैं।

प्रवासी मजदूरों में अभय मिंज व चंदन बड़ाईक ने फोन पर बताया था कि ”संदीप खलखो जो लातेहार जिले के महुआटांड़ थाना अंतर्गत नावा टोली सरनाडीह का ही रहने वाला है। जब हम मजदूर लोग घर वापस जाना चाहते हैं तो हम लोगों का लेबर सप्लायर संदीप खलखो हमारा सारा सामान रख ले रहा है। सरकार द्वारा जारी रजिस्ट्रेशन लिंक को भी हटा दिया है। वह हमें बंधक बना लिया है और कहता है कि अगर जाना है तो सारा सामान यहीं छोड़ दो। वह हमें पैसा भी नहीं दे रहा है।”

अब जो खबर मिली है उसके अनुसार अभय मिंज, चंदन बड़ाईक के साथ एक अन्य मजदूर भागकर पैदल ही अपने गांव लौट गए हैं।

दूसरी तरफ झारखंड के पलामू जिला के लगभग दो दर्जन मजदूर राजस्थान के अलवर जिला के निमराना में फंसे हुए हैं। ये लोग निमराना स्थित एचएमवी गरिमा कंपनी में काम करते हैं। इन्हें इनके ही क्षेत्र का एक ठेकेदार (लेबर सप्लायर) गुड्डू राम ने कंपनी में काम दिलवाया था।

(रांची से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

This post was last modified on June 2, 2020 7:51 pm

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