किसान आंदोलन पर गोदी मीडिया की गलत रिपोर्टिंग का एडिटर्स गिल्ड ने लिया संज्ञान, जारी की एडवाइजरी

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मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ देश भर के किसानों ने जो आन्दोलन शुरू किया है उसे बदनाम करने की तमाम कोशिशों को पीछे धकेलते हुए इसने न केवल सरकार को वार्ता की मेज पर आने के लिए मजबूर कर दिया बल्कि अपनी धमक को सात समुंदर पार भी पहुंचाने में यह सफल रहा। बावजूद इसके गोदी मीडिया अब भी आन्दोलन के बारे में तमाम अफवाहें, भ्रामक और गलत सूचनाएं लगातार फैलाने में व्यस्त है। इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखते हुए एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने एक जरूरी कदम उठाते हुए किसान आन्दोलन से जुड़ी रिपोर्टिंग पर एक  एडवाइजरी जारी की है।

गिल्ड द्वारा जारी इस एडवाइजरी में कहा गया है कि, एडिटर्स गिल्ड किसान आन्दोलन से जुड़ी रिपोर्टिंग के तरीकों को लेकर चिंतित है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किसानों के आन्दोलन के बारे में मीडिया का एक हिस्सा इसे कभी ‘खालिस्तान’ और ‘देशद्रोह’ जैसे शब्दों के साथ जोड़कर बिना किसी सबूत या साक्ष्य के भ्रम फैलाकर इसे बदनाम करने की कोशिश में लगा है। इस तरह की हरकत मीडिया के उसूलों और एथिक्स के खिलाफ है। यह पत्रकारिता की नैतिकता को चोट पहुंचाता है। ऐसी हरकतें मीडिया की विश्वसनीयता के साथ धोखा हैं।

एडिटर्स गिल्ड ने एडवाइजरी में कहा है कि मीडिया संस्थानों को किसानों के विरोध करने के संवैधानिक अधिकार का हनन किये बिना निष्पक्ष, सही, तथ्यात्मक और संतुलित रिपोर्टिंग करनी चाहिए। किसी की वेशभूषा और उसका खान-पान और चेहरा देख कर मीडिया को अपनी ओर से किसी भी तरह की कहानी गढ़ने से बचना चाहिए।

गौरतलब है कि किसानों के प्रदर्शन को लेकर मोदी कैबिनेट में मंत्री और पूर्व सेना अधिकारी जनरल वीके सिंह ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि, जिनको कोई मतलब नहीं है, बहुत से लोग जब मैं फोटो देखता हूं तो उनमें किसान दिखाई नहीं देते हैं। बहुत कम किसान दिखाई देते हैं।

बता दें कि किसानों के प्रदर्शन के बारे में गलत रिपोर्टिंग और उन्हें बदनाम करने के कोशिशों के बाद सिंघू बॉर्डर पर किसानों ने जी न्यूज़, रिपब्लिक टीवी और आजतक के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनका बॉयकट किया है।

इन चैनलों के प्रति किसान इतना गुस्सा और आहत हैं कि प्रदर्शन स्थल पर इन मीडिया चैनलों का प्ले कार्ड बना कर सभी किसानों को इन्हें कोई इन्टरव्यू या बाइट न देने की अपील की गयी और अंजना ओम कश्यप, अर्णब गोस्वामी का नाम लेकर लानत भेजी गई। किसानों ने कहा कि इन्हें शर्म नहीं आती ये हमारी माताओं के बारे में गलत बातें फैला रहे हैं। ये लोग कह रहे हैं कि किसान उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इन लोगों को शर्म आनी चाहिए ये लोग झूठ फैलाते हैं।

गौरतलब है कि जब पंजाब के किसान 25 तारीख को दिल्ली मार्च करते हुए हरियाणा पहुंचे थे तो उनके मार्च को रोकने के लिए खट्टर सरकार ने राज्य की पूरी पुलिस और केन्द्रीय पुलिस बलों के जवानों के जरिये जगह-जगह बाधाएं खड़ी कर दी थीं। इसके तहत सड़क पर बैरिकेड्स लगाने, गड्ढे खोदने, कंटीले तार की बाड़ लगाने, ट्रक और अन्य गाड़ियों से सड़कों को ब्लॉक करने के जरिये जगह-जगह रुकावट डालने की कोशिश की गयी। यहां तक कि किसानों पर वाटर कैनन से पानी का बौछार किया गया। फिर आंसू गैस गोले फेंके गए। सड़कों को इस तरह से घेरा गया था कि एम्बुलेंस के लिए भी रास्ता नहीं था, जब किसान एक एम्बुलेंस को रास्ता देने के लिए रास्ते से बैरिकेड्स हटा रहे थे तो उस दृश्य को गोदी मीडिया ने एक तरफा क्लिप चला कर उसे किसानों की हिंसा और तोड़फोड़ के रूप में दिखाया था।

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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