Saturday, March 2, 2024

दमन और क्रूरता के खिलाफ ‘फिलिस्तीन की पिकासो’ का मोर्चा 

फ़िलिस्तीन के कवि-लेखक और चित्रकार अपने मुल्क के साथ हो रहे अन्याय का अपने तरीक़े से विरोध करते रहे हैं। पिछले कुछ समय से इज़रायल द्वारा चलाए जा रहे नरसंहार ने भी उनके हौसले को पस्त नहीं किया। वे लगातार अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। इनमें से एक हैं युवा चित्रकार मलक मट्टर।

दिसंबर 1999 में जन्मी मलक ने अधिग्रहण और युद्ध की क्रूरता के बावजूद सपने देखना बंद नहीं किया। जब इज़रायल ने गाज़ा में फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ ऑपरेशन प्रोटेक्टिव एज (2014) चलाया था, तब मलक सिर्फ चौदह साल की थीं। लगभग तभी से मलक बच्चों और सफ़ेद कबूतरों के साथ युवा लड़कियों और महिलाओं के चित्र बना रही हैं।

उनके चित्रों में महिलाओं के सिर एक तरफ़ झुके होते हैं। इस पर मलक कहती हैं कि, ‘यदि आप सीधे खड़े होते हैं, तो यह आपकी स्थिरता को दर्शाता है। लेकिन एक तरफ़ झुका हुआ सिर आपके टूट जाने, या आपकी कमजोरी का परिणाम हो सकता है। हम इंसान हैं, युद्धों के बीच जी रहे हैं, क्रूर दमन सह रहे हैं.. कभी-कभी हिम्मत जवाब दे देती है’।

मौजूदा हिंसा के दौरान मलक ने पांच मीटर के कैनवास पर एक भित्ति चित्र बनाया है, जिसका शीर्षक है- गाज़ा। यह चित्र पिकासो के प्रसिद्ध ग्वेर्निका (1937) जैसा है, जिसे पिकासो ने बास्क क्षेत्र के एक शहर में फासीवादी स्पेन द्वारा किए गए नरसंहार की याद में बनाया था।

मलक की पेंटिंग फ़िलिस्तीनी लोगों के दुख और दृढ़ता को दर्शाती है। यदि आप इसे क़रीब से देखेंगे, तो आपको बमबारी के पीड़ित दिखेंगे– घायल चिकित्साकर्मी, पत्रकार, कवि, टूटी मस्जिदें और चर्च, दबे हुए शव, नंगे कैदी, और छोटे बच्चों की लाशें, बमों से ध्वस्त कारें और पैदल चलते शरणार्थी। आसमान में एक पतंग है, जिसके ज़रिए मलक ने इज़रायल के हमलों में 6 दिसंबर को मारे गए फ़िलिस्तीनी कवि रेफ़ात अलारीर को श्रद्धांजलि दी है।

2022 में, यूएनआरडब्ल्यूए द्वारा प्रकाशित एक लेख में मलक को ‘फ़िलिस्तीन की पिकासो’ कहा गया था, और इस पर मलक ने कहा था कि, ‘मैं पिकासो से इतना प्रभावित थी कि अपनी कला यात्रा की शुरुआत में मैंने उनकी तरह पेंटिंग करने की कोशिश की’।

मलक का यह चित्र ‘ट्राईकॉन्टिनेंटल: सामाजिक शोध संस्थान’ ने अपने न्यूज़लेटर ‘फ़िलिस्तीनी लोगों से नहीं छीना जा सकता सपने देखने का अधिकार’ में लॉन्च किया है। यह संस्थान हमारे समय की अहम घटनाओं, भुला दिए गए इतिहास, मुख्यधारा मीडिया से गायब जनता के आंदोलनों, क्रांतिकारी कला, और नव-साम्राज्यवाद के विभिन्न रूपों पर साप्ताहिक न्यूज़लेटर, मासिक डोसियर और विशेष अध्ययन प्रकाशित करता है।

मलक मट्टर संयुक्त राष्ट्र महासभा संकल्प 302 द्वारा ‘फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए प्रत्यक्ष राहत और रोज़गार कार्यक्रम चलाने’ के लिए 1949 में स्थापित यूएनआरडबल्यूए के एक स्कूल में पढ़ी थीं। इन स्कूलों में हर साल लगभग पांच लाख फ़िलिस्तीनी बच्चे पढ़ते हैं। इसके अलावा यह एजेन्सी फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों और गाज़ा के 18 लाख विस्थापित लोगों को महत्त्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करती है। इज़रायल गाज़ा में प्रत्यक्ष हिंसा के साथ यूएनआरडबल्यूए की फ़ंडिंग रोकने का अभियान चला रहा है।

पर इज़रायल के ख़िलाफ़ लोग दुनिया भर में सड़कों पर उतर रहे हैं, और अब इंडोनेशिया से लेकर दक्षिण अफ़्रीका और चिली तक दक्षिणी गोलार्ध के कई देश इज़रायल पर नरसंहार के ज़ुर्म में अदालती कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसमें कोई दो मत नहीं कि विरोध की इन आवाज़ों को मलक मट्टर की यह पेंटिंग थोड़ी और मज़बूती दे रही है।  

(हरलीन कौर का लेख।)

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