Friday, July 1, 2022

अरुण कुमार त्रिपाठी

जयंती पर विशेष: जेपी का इस्तेमाल छोड़ें, उन्हें समझने की कोशिश करें

आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती है और जाहिर है उन्हें पूरे देश में अलग-अलग तरीके से याद किया जा रहा है। जेपी से जुड़े वे लोग तो बचे नहीं हैं जो उनके साथ स्वाधीनता संग्राम में शामिल हुए...

विन्सेंट शीनः जिसने कहा था कि गांधी कभी भी मारे जा सकते हैं

विन्सेंट शीन ऐसे अमेरिकी पत्रकार थे जिन्होंने बहुत साफ शब्दों में कह दिया था कि महात्मा गांधी की कभी भी हत्या हो सकती है। यह बात उन्होंने प्रसिद्ध अमेरिकी पत्रकार और लेखक विलियम एल. शरर से कही और उसके...

शिक्षक के कंधे पर नैतिकता का बोझ

मेरे एक विद्यार्थी ने पिछले शिक्षक दिवस पर मुझे रामचंद्र गुहा की पुस्तक `गांधीः ईयर्स दैट चेंज्ड द वर्ल्ड 1914-1948’ भेंट करते हुए लिखा `प्रिय अरुण सर को जिन्होंने नैतिक होना सिखाया’ उस विद्यार्थी का यह वाक्य मेरे कंधे...

भारत छोड़ो आंदोलन की जयंती: बयालीस के गांधी में भगत सिंह का तेवर

भारत छोड़ो आंदोलन की जयंती पर महात्मा गांधी (और उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी) के उस तेवर को याद करने की जरूरत है जो उन्हें भगत सिंह जैसे युवा क्रांतिकारी के करीब लाकर खड़ा कर देता है। इस मोर्चे...

महाश्वेता का महासमर

कलकत्ते के दो रहस्य कभी नहीं सुलझेंगे। एक बोटेनिकल गार्डेन का वट वृक्ष और दूसरा महाश्वेता देवी। वट वृक्ष का हर एक तना अपने को मूल होने का अहसास देता है। लेकिन कहा जाता है कि मूल तो बहुत...

जीत की जिद में हारता लोकतंत्र

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2016 की तरह एक बार फिर संकेत दिया है कि इस बात की गारंटी नहीं है कि वे नवंबर के चुनाव परिणामों को स्वीकार कर लेंगे। उन्होंने संदेहास्पद अंदाज में कहा है कि `मैं...

कांग्रेस मरेगी तो लोकतंत्र जीएगा ?

यह बड़ा विचित्र संयोग है कि जब दुनिया मानव सभ्यता की सबसे खतरनाक महामारी के आतंक से जूझ रही है तब देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।...

प्रतिक्रांति से परास्त लालू प्रसाद

(नब्बे के दशक में एक शोध पुस्तक की श्रृंखला प्रकाशित हुई थी। जिसमें लालू यादव पर अंबरीश कुमार ने लिखा था। तब लालू की धमक भी थी। उस पुस्तक का तब वीपी सिंह को विमोचन करना था पर अचानक...

बरनवालः गांधीवादी चिंतक की गुमनाम विदाई

वीरेंद्र कुमार बरनवाल के निधन की सूचना वरिष्ठ पत्रकार और बड़े भाई जयशंकर गुप्त जी की पोस्ट से मिली। अचानक मुलाकात की बारह साल पुरानी स्नेहिल स्मृतियां कौंध गईं। 10 नवंबर 1945 को आजमगढ़ में जन्मे बरनवाल जी हीरक...

पार्टी और आंदोलन के बीच संपूर्ण क्रांति

संपूर्ण क्रांति का काम पार्टियां करेंगी या उसके लिए समर्पित युवाओं के संगठन और उनके कंधों पर खड़ा एक व्यापक आंदोलन? यह प्रश्न 5 जून 1974 को उस समय भी था जब जयप्रकाश नारायण ने बिहार के राज्यपाल को...

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बर्बरता की गला काट होड़

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