मुकेश कुमार सिंह

नया कृषि क़ानून लागू होता तो सरकार अभी दालों पर स्टॉक की सीमा नहीं लगा पाती

महँगाई से जनता हाहाकार कर रही है। पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस, सरसों का तेल, दालें और सब्ज़ियों के दाम में…

4 weeks ago

भगवा ख़ानदान के लिए संघ ही आत्मा, वही परमात्मा

‘छल-प्रपंच’ हमेशा से राजनीति का अभिन्न अंग रहा है। ‘साम-दाम-भेद-दंड’ इसी के औज़ार हैं। दुनिया के किसी भी दौर की…

2 months ago

मी लॉर्ड! चींटी मारने के लिए तोप चलाना कैसे सही हो सकता है?

दिल्ली हाईकोर्ट को लगा कि ‘राष्ट्रीय महत्व’ वाले ‘सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ को रोकना सही नहीं है और इसे अदालती दख़लन्दाज़ी…

2 months ago

हिन्दू नववर्ष पर विशेष (अन्तिम भाग):संविधान में भारतीय तिथि क्यों नहीं लिखी गयी?

जैसे पृथ्वी की श्वेत-श्याम कला को दिन और रात का नाम मिला, वैसे ही चन्द्रमा के इसी स्वरूप को शुक्ल…

4 months ago

चैत्र को आखिर क्यों माना जाता है सम्वत का पहला महीना?

क्या देश की एकता और समरसता से कैलेंडर या पंचांग का कोई नाता हो सकता है? आज़ादी के बाद, 1952…

4 months ago

असमिया लोगों को बीजेपी ग़रीब और पिछड़ों से भी ज्यादा निपट मूर्ख मानती है!

‘गुजरात मॉडल’ का नगाड़ा बजाने के बाद संघ-बीजेपी को ‘डबल इंजन’ का झुनझुना बजाने की जैसी लत लग गयी। इसका…

4 months ago

क्या बाड़ ही खाने लगा है बीजेपी का खेत? विशेष संदर्भ उत्तराखंड

कुर्सी पर रहते हुए अपनी आभा गँवाने वाले भगवा नेताओं की सूची में त्रिवेन्द्र सिंह रावत सबसे नया नाम है।…

5 months ago

कॉरपोरेट की रीढ़ तोड़े बग़ैर किसान नहीं हो पाएंगे कामयाब

किसान आन्दोलन ने 100 दिन पूरा करके दुनिया में चले सबसे लम्बे प्रदर्शन का रिकॉर्ड बना लिया है। शायद, ये…

5 months ago

बिहार चुनाव के बीच मोदी सरकार को चुनाव आचार संहिता से छूट क्यों मिली?

चुनाव आयोग, क्या सरकारी कर्मचारियों को मतदाता नहीं मानता? क्योंकि यदि सरकारी कर्मचारी भी मतदाता हैं तो चुनाव की घोषणा…

10 months ago

पाटलिपुत्र की जंगः बिहार में सबसे दिलचस्प बना ‘गच्चेबाज़’ बनाम ‘सौदागर’ का खेल

बिहार की सियासी बिसात पर वैसे तो सभी ख़ेमों में भितरघाती चालों की सरगर्मियां हैं, लेकिन इसने घाट-घाट का पानी…

10 months ago
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