Thursday, December 9, 2021

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मुकेश कुमार सिंह

नया कृषि क़ानून लागू होता तो सरकार अभी दालों पर स्टॉक की सीमा नहीं लगा पाती

महँगाई से जनता हाहाकार कर रही है। पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस, सरसों का तेल, दालें और सब्ज़ियों के दाम में लगी आग कहाँ जाकर और कब थमेगी, इसके बारे में शायद प्रधानमंत्री के सिवाय, कोई भी कुछ नहीं जानता।...

भगवा ख़ानदान के लिए संघ ही आत्मा, वही परमात्मा

‘छल-प्रपंच’ हमेशा से राजनीति का अभिन्न अंग रहा है। ‘साम-दाम-भेद-दंड’ इसी के औज़ार हैं। दुनिया के किसी भी दौर की और किसी भी समाज की राजनीति कभी इससे अछूती नहीं रही। ‘छल-प्रपंच’ की ‘इंटेंसिटी’ यानी तीव्रता में ज़रूर फ़र्क़...

मी लॉर्ड! चींटी मारने के लिए तोप चलाना कैसे सही हो सकता है?

दिल्ली हाईकोर्ट को लगा कि ‘राष्ट्रीय महत्व’ वाले ‘सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ को रोकना सही नहीं है और इसे अदालती दख़लन्दाज़ी के ज़रिये रोकने की माँग न सिर्फ़ अनुचित है, बल्कि ‘जनहित की दुहाई’ देने वाली धारणा का भी ‘बेज़ा...

हिन्दू नववर्ष पर विशेष (अन्तिम भाग):संविधान में भारतीय तिथि क्यों नहीं लिखी गयी?

जैसे पृथ्वी की श्वेत-श्याम कला को दिन और रात का नाम मिला, वैसे ही चन्द्रमा के इसी स्वरूप को शुक्ल और कृष्ण पक्ष कहा गया। शक सम्वत की तरह भारत में बेहद प्रचलित विक्रम सम्वत में भी महीने तो...

चैत्र को आखिर क्यों माना जाता है सम्वत का पहला महीना?

क्या देश की एकता और समरसता से कैलेंडर या पंचांग का कोई नाता हो सकता है? आज़ादी के बाद, 1952 में जवाहर लाल नेहरू ने पाया कि काल-गणना के लिए भारत में कम से कम 30 पंचांग प्रचलित हैं,...

असमिया लोगों को बीजेपी ग़रीब और पिछड़ों से भी ज्यादा निपट मूर्ख मानती है!

‘गुजरात मॉडल’ का नगाड़ा बजाने के बाद संघ-बीजेपी को ‘डबल इंजन’ का झुनझुना बजाने की जैसी लत लग गयी। इसका ताज़ा और शानदार संस्करण इस बार असम और बंगाल के चुनावों में पेश-ए-नज़र है। वैसे अब देश के ज़्यादातर...

क्या बाड़ ही खाने लगा है बीजेपी का खेत? विशेष संदर्भ उत्तराखंड

कुर्सी पर रहते हुए अपनी आभा गँवाने वाले भगवा नेताओं की सूची में त्रिवेन्द्र सिंह रावत सबसे नया नाम है। संघ-बीजेपी भी उनके चार साल के कार्यकाल से बेहद नाख़ुश थे। उनकी नज़र में भी इनका रिपोर्ट कार्ड फिसड्डी...

कॉरपोरेट की रीढ़ तोड़े बग़ैर किसान नहीं हो पाएंगे कामयाब

किसान आन्दोलन ने 100 दिन पूरा करके दुनिया में चले सबसे लम्बे प्रदर्शन का रिकॉर्ड बना लिया है। शायद, ये मानव इतिहास का ऐसा सबसे बड़ा शान्तिपूर्ण विरोध बन चुका है, जिसमें हरेक उम्र, लिंग, जाति और धर्म के...

बिहार चुनाव के बीच मोदी सरकार को चुनाव आचार संहिता से छूट क्यों मिली?

चुनाव आयोग, क्या सरकारी कर्मचारियों को मतदाता नहीं मानता? क्योंकि यदि सरकारी कर्मचारी भी मतदाता हैं तो चुनाव की घोषणा होने या आदर्श चुनाव संहिता के लागू होने के बाद इन्हें रिझाने या बहलाने के लिए किसी रियायत या...

पाटलिपुत्र की जंगः बिहार में सबसे दिलचस्प बना ‘गच्चेबाज़’ बनाम ‘सौदागर’ का खेल

बिहार की सियासी बिसात पर वैसे तो सभी ख़ेमों में भितरघाती चालों की सरगर्मियां हैं, लेकिन इसने घाट-घाट का पानी पीये नीतीश कुमार को सबसे ज़्यादा बेबस बना दिया है। बीजेपी ने उनकी दशा ‘पानी में मीन प्यासी’ वाली...

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राजधानी के प्रदूषण को कम करने में दो बच्चों ने निभायी अहम भूमिका

दिल्ली के दो किशोर भाइयों के प्रयास से देश की राजधानी में प्रदूषण का मुद्दा गरमा गया है। सरकार...