Monday, April 15, 2024

मुकेश कुमार सिंह

कॉरपोरेट की रीढ़ तोड़े बग़ैर किसान नहीं हो पाएंगे कामयाब

किसान आन्दोलन ने 100 दिन पूरा करके दुनिया में चले सबसे लम्बे प्रदर्शन का रिकॉर्ड बना लिया है। शायद, ये मानव इतिहास का ऐसा सबसे बड़ा शान्तिपूर्ण विरोध बन चुका है, जिसमें हरेक उम्र, लिंग, जाति और धर्म के...

बिहार चुनाव के बीच मोदी सरकार को चुनाव आचार संहिता से छूट क्यों मिली?

चुनाव आयोग, क्या सरकारी कर्मचारियों को मतदाता नहीं मानता? क्योंकि यदि सरकारी कर्मचारी भी मतदाता हैं तो चुनाव की घोषणा होने या आदर्श चुनाव संहिता के लागू होने के बाद इन्हें रिझाने या बहलाने के लिए किसी रियायत या...

पाटलिपुत्र की जंगः बिहार में सबसे दिलचस्प बना ‘गच्चेबाज़’ बनाम ‘सौदागर’ का खेल

बिहार की सियासी बिसात पर वैसे तो सभी ख़ेमों में भितरघाती चालों की सरगर्मियां हैं, लेकिन इसने घाट-घाट का पानी पीये नीतीश कुमार को सबसे ज़्यादा बेबस बना दिया है। बीजेपी ने उनकी दशा ‘पानी में मीन प्यासी’ वाली...

राजनीति को अपराधियों से बचाये बग़ैर नहीं बचेंगी बेटियां

हाथरस वाले निर्भया कांड ने एक बार फिर देश के सामने महिलाओं के प्रति होने वाला अपराध सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। अतीत में भी अनेक बार ऐसा हो चुका है और भविष्य में तब तक होता रहेगा...

हाथरस के निर्भया कांड को बाबरी मस्जिद के चश्मे से भी देखिए

एक मशहूर ग़ज़ल का मतला है कि ‘बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी, लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे...’। बेशक़, यहाँ बातें तो दूर तलक जाने वाली ही हैं, अलबत्ता उदासियाँ बेवजह नहीं हैं, क्योंकि आज मुफ़ीद वक़्त...

‘बिहार चुनाव’ के लिए की गयी ‘मोदी को किसानों का भगवान’ बनाने की ब्रॉन्डिंग

जो कोरोना से नहीं घबराये, प्रवासी मज़दूरों की दुर्दशा से बेचैन नहीं हुए, बेरोज़गारी और नौकरियाँ ख़त्म करने वाली महामारी से परेशान नहीं हुए, औंधे मुँह गिरी अर्थव्यवस्था से विचलित नहीं हुए, उस परम प्रतापी सत्ता को अचानक ऐसा...

यक़ीनन, अबकी बार बिहार पर है संविधान बचाने का दारोमदार

संघियों का एक ही एजेंडा है कि सांसद और विधानसभाओं को ख़रीदकर या सैद्धान्तिक रूप से ध्वस्त करके भारतीय लोकतंत्र और संविधान को पूरी तरह से संघ का ग़ुलाम बनाना! यही हिन्दू-राष्ट्र की वो परिकल्पना है जिसका ख़्वाब सावरकर...

अद्भुत है ‘टाइम’ में जीते-जी मनमाफ़िक छवि का सृजन!

भगवा कुलभूषण अब बहुत ख़ुश हैं, पुलकित हैं, आह्लादित हैं, भाव-विभोर हैं क्योंकि टाइम मैगज़ीन ने चौथी बार उन्हें विश्व के सौ प्रभावशाली लोगों में शामिल किया है। उनके लिए इससे भी ज़्यादा सन्तोष की बात तो ये है...

कांग्रेस की बीमारियां उन्हें क्यों सता रहीं जिन्होंने इसे वोट दिया ही नहीं?

मध्यम वर्गीय, शिक्षित, खाते-पीते लोगों और ख़ासकर सवर्णों के बीच कांग्रेस की चिर परिचित बीमारियां अरसे से आपसी चर्चा का मुद्दा बनती रही हैं। लेकिन मज़े की बात तो ये है कि ऐसा अनायास नहीं है। बल्कि बाक़ायदा, सुविचारित...

‘ग़रीब-कल्याण-रोज़गार’ के नाम पर अभी तो सरकार ने सिर्फ़ मुनादी ही करवाई है

कृपया मेरी इस वेदना पर यक़ीन करें कि 30 साल के अपने पत्रकारीय जीवन में मैंने कभी किसी एक ख़बर का ब्यौरा जानने के लिए इतनी मगज़मारी या इतनी मेहनत नहीं की, जितना बीते चार दिनों में ‘ग़रीब कल्याण...

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तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद जनविवेक से स्थिति में बदलाव होगा

भारत में लोकतंत्र के भविष्य को लेकर कुछ गहरी आशंकाएं उभर रही हैं। इतिहास की गहरी घाटियों से कुछ...