दिल तो बच्चा है जी…। कहने का मतलब यह कि इसे बचपना करने की पूरी छूट है।… Read More
प्रणव प्रियदर्शी
डूबते को तिनके का सहारा… तिनका भला क्या सहारा दे सकता है… लेकिन जो उम्मीद छिपी होती है… Read More
प्रधानमंत्री अगर आंदोलनों के नाम से चिढ़ते हैं, आंदोलनजीवी जैसा शब्द गढ़ते हैं, तो इसमें कोई आश्चर्य… Read More
मन रोज हजार बातें सुनता है। सैकड़ों नहीं तो दर्जनों बातें तो ऐसी जरूर होती हैं उनमें,… Read More
‘देखो, जिंदगी में जैसे कठिन दौर का आना तय है, वैसे ही उसका जाना भी निश्चित है।… Read More
मकसद ढांढस देना, हिम्मत बंधाना या प्रेरित करना नहीं था। वह तो खुद अपनी दुविधा को एक्सप्लेन… Read More
हानि-लाभ, जीवन-मरन, जस-अपजस बिधि हाथ। पंक्तियां तुलसीदास जी की हैं। दुनिया को देखने का तुलसीदास का नजरिया… Read More
प्रमु मूरत तो फिर भी ऐसी चीज है, जिसके बारे में हमें प्रत्यक्ष तौर पर नहीं पता।… Read More
हमारे स्कूल-कॉलेज के दिनों में पटना का माहौल कुछ ऐसा था कि हम सामान्य घरों के ‘अच्छे’… Read More
हम दिन-रात अपने जैसे दूसरे मनुष्यों और तमाम जीव-जंतुओं को मृत्यु के मुख में जाते देखते हैं,… Read More