घर से निकला ही था कि एक मित्र दिखे अपनी गाड़ी में। मुझे देखकर रुके और पूछा… Read More
प्रणव प्रियदर्शी
बात बड़ी छोटी और सीधी-सादी है। हालांकि सीधी-सादी बातें ही अमल में सबसे मुश्किल साबित होती हैं। बात… Read More
बरसों पहले एंटी-इस्टैब्लिशमेंट कहे जाने वाले एक वरिष्ठ कार्यकर्ता से एक टीवी जर्नलिस्ट को पूछते पाया, ‘इस… Read More
वे करियर के परवान चढ़ने के दिन थे, महत्वाकांक्षाओं को पर लगने के दिन थे। उन दिनों… Read More
रिश्ता या तो प्यार-मोहब्बत और भरोसे पर टिका होता है या फिर डर, आशंका और लालच पर।… Read More
सवाल यह है कि बतौर नागरिक हमें सरकार की सुननी चाहिए या विपक्ष की। किसी भी जिंदा… Read More
हायरार्की और अनुशासन वाले रिश्तों की तो छोड़िए आधुनिक और लोकतांत्रिक समझ पर आधारित रिश्तों में भी… Read More
दुर्योधन ने तब सिर पीट लिया, जब भगवान कृष्ण ने अपने फैसले का आधार इस तथ्य को… Read More
मसला माफी का नहीं, माफी की स्टाइल का है। बात नब्बे के दशक के उत्तरार्ध की है… Read More
“यू कैन ब्रेक आवर बॉडीज, बट नॉट बैडीज।” (जंतर-मंतर पर जेन ज़ी प्रदर्शनों से निकला एक प्रतिनिधि नारा)… Read More