Monday, October 25, 2021

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दुर्ग बैठक में फैसला: कश्मीर संबंधी केन्द्र सरकार के फैसले के खिलाफ जन प्रतिरोध अभियान चलाएगा एआईपीएफ

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दुर्ग (छत्तीसगढ़)। ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम यानी एआईपीएफ की राष्ट्रीय परिषद की दुर्ग में हुई दो दिवसीय बैठक में केंद्र सरकार के कश्मीर संबंधी फैसले के खिलाफ देशभर में अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। बैठक में तय हुआ कि यह अभियान अग एक महीने तक सतत रूप से चलेगा। बैठक में इस फैसले को पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक करार दिया गया। इसके अलावा बैठक में 2 अक्टूबर को देश भर में ‘गांधीजी को जानो’ कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। ताकि गांधी जी के राष्ट्रीय एकजुटता, हिन्दू-मुस्लिम एकता, विकास की अवधारणा तथा देश के बंटवारे का विरोध संबंधी विचारों को जन जन तक पहुंचाया जा सके। 

राष्ट्रीय परिषद ने नागरिकता संबंधी जनसंख्या रजिस्टर करने हेतु 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2020 के बीच स्थानीय रजिस्टार के माध्यम से देश भर में घर-घर जाकर गणना करने संबंधी 31 जुलाई को गृह मंत्रालय द्वारा निकाली गई अधिसूचना का विरोध करने का निर्णय लिया है। संगठन का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून के साथ ये प्रक्रिया धर्म के आधार पर नागरिकता की परिभाषा की ओर ले जाता है, जिसका भारत के हर नागरिक को विरोध करना चाहिए। 

बैठक में बोलती हुईं
कविता कृष्णन।

राष्ट्रीय परिषद की बैठक में बस्तर समस्या के हल के लिए तुरंत राजनीतिक संवाद शुरू करने, कश्मीर को जेल में परिवर्तित करने, 370 और 35A हटाने, किसानों की संपूर्ण कर्जा मुक्ति एवं किसानों को लाभकारी मूल्य की गारंटी संबंधी कानूनों को संसद में पारित कराने, आने वाले सभी चुनाव ईवीएम हटाकर मत पत्र से चुनाव कराने, 44 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 कोड पर आधारित श्रमिक-विरोधी कॉर्पोरेट-मुखी कानून बनाने, लगातार धीमी पड़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था और लगातार बढ़ती बेरोजगारी, मद्रास हाई कोर्ट के एक जज द्वारा मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज के एक टीचर पर यौन उत्पीड़न के मामले में किए गए सांप्रदायिक टिप्पणी, वन अधिकार कानून की आड़ में 1 करोड़ आदिवासियों को जंगल से खदेड़ देने, 600 रेल्वे स्टेशनों तथा 5 हवाई अड्डों का निजीकरण करने, बस्तर में सभी निरपराध आदिवासी बंदियों को रिहा करने, काले कानूनों के तहत गिरफ्तार सभी राजनीतिक बंदियों को तत्काल रिहा करने, देश में बाढ़ और सुखाड़ के परिणाम स्वरूप पैदा होने वाले अन्न संकट, मूल्य वृद्धि और काला बाजारी जैसे मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किये गए। 


बैठक में गिरिजा पाठक, मोहम्मद सलीम, प्रेम सिंह गहलावत और कयामुद्दीन अंसारी।

राष्ट्रीय परिषद ने निर्णय लिया कि उक्त मुद्दों पर ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम द्वारा पुस्तिकाएं प्रकाशित की जाएंगी तथा बड़े पैमाने पर पर्चे वितरित किए जाएंगे। यह भी निर्णय लिया गया कि भविष्य में ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम के व्यक्तिगत सदस्य भी बनाए जाएंगे। 

राष्ट्रीय परिषद में प्रमुख तौर पर वरिष्ठ पत्रकार जॉन दयाल, पूर्व विधायक,समाजवादी नेता डॉ. सुनीलम, मानव अधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया, सामाजिक कार्यकर्ता विजय प्रताप, महिला संगठन एपवा की सचिव कविता कृष्णन और राष्ट्रीय अध्यक्ष रति राव, कर्नाटक के दलित और वामपंथी चिंतक डॉ. लक्ष्मीनारायण, बंगलुरू से आईं अधिवक्ता अवनी चोकसी, किसान महासभा के नेता प्रेम सिंह गहलावत, विप्लवी किसान संदेश पत्रिका के सम्पादक पुरुषोत्तम शर्मा, इन्साफ़ मंच के नियाज अहमद, रिहाई मंच के मोहम्मद सलीम, भुवनेश्वर से एआईसीसीटीयू के महेंद्र परीदा, दिल्ली से नदीम, डॉ. शंभू श्रीवास्तव, झारखंड से अनिल अंशुमन, जावेद इस्लाम, देवकीनंदन, छत्तीसगढ़ के अखिलेश एडगर और संघर्ष मोर्चा के ललित सुरजन एवं महेंद्र मिश्रा, बंगाल से अमलान और अबु रिदा, और एआईसीसीटीयू के बृजेंद्र तिवारी प्रमुख शामिल रहे। बैठक के बाद ‘बदलते भारत में संविधान और जन अधिकारों पर हमला – हमारा हस्तक्षेप और विकल्प’ विषय पर आम सभा हुई।

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