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Categories: बीच बहस

नॉर्थ ईस्ट डायरी: असम में ‘गोवध रोधी विधेयक’ को लेकर चर्चा गरम

असम में एक बार फिर से ‘गोवध रोधी विधेयक’ को लेकर चर्चा गरम है। राज्यपाल जगदीश मुखी ने 22 मई को बड़ी जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार अगले विधानसभा सत्र में ‘गो संरक्षण विधेयक’ पेश कर सकती है। वहीं सूत्रों के अनुसार इसे लेकर सदन में भारी हंगामा होने के आसार भी हैं।

प्रदेश के राज्यपाल जगदीश मुखी ने कहा कि गाय का परिवहन राज्य के बाहर किए जाने पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार की अगले विधानसभा सत्र में गौ संरक्षण विधेयक पेश करने की योजना है। मुखी ने 15वीं असम विधानसभा के पहले सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि लोग गाय को पवित्र मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि मेरी सरकार अगले विधानसभा सत्र में गो संरक्षण विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। प्रस्तावित विधेयक में मवेशी के राज्य के बाहर परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की परिकल्पना की गई है।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार मवेशी की सुरक्षा को लेकर उनके प्रति हिंसात्मक कृत्य को लेकर कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाएगी और असम के बाहर परिवहन करते पाए जाने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करेगी। उन्होंने कहा कि एक बार (विधेयक) पारित होने के बाद, असम उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने इस तरह के विधेयक पारित किए हैं। मुखी ने यह भी कहा कि गाय लोगों का पोषण करती है क्योंकि यह उन्हें ‘जीवनदायी दूध’ देती है।

दूसरे भाजपा शासित राज्य पहले ही इस तरह  के कानून ला चुके हैं। जून 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार ने गायों की रक्षा के लिए एक अध्यादेश पारित किया – गोहत्या रोकथाम (संशोधन) अध्यादेश, 2020। अध्यादेश के अनुसार गोजातीय पशुओं के अवैध परिवहन और गोहत्या पर 10 साल तक की कैद और 5 लाख जुर्माने की सजा हो सकती है। भाजपा शासित कर्नाटक और मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही गौ संरक्षण कानून पारित किया गया है।

कर्नाटक में कानून मवेशियों के वध, बिक्री या खरीद के लिए मवेशियों के निपटान पर प्रतिबंध लगाता है। केवल वास्तविक कृषि या पशुपालन उद्देश्यों के लिए परिवहन की अनुमति दी गई है। किसी भी उल्लंघन पर तीन-सात साल की कैद और 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बार-बार अपराध करने पर 1 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसी तरह का गौ संरक्षण कानून पारित करने के अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने एक ‘गाय कैबिनेट’ का भी गठन किया है।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह अपने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम को संशोधित करे – विशेष रूप से वे नियम जो अधिकारियों को पशु परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को जब्त करने और जानवरों को गौशाला में भेजने की अनुमति देते हैं, या उन पर रोक लगाने की अनुमति देते हैं।

असम के मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले विधानसभा सत्र के अंतिम दिन 24 मई को हेमंत विश्व शर्मा ने कहा कि सरकार राज्य में गायों की रक्षा के लिए संविधान के दायरे में रहकर हर संभव कदम उठाएगी। राज्यपाल जगदीश मुखी ने पिछले शुक्रवार को विधानसभा के पहले दिन अपने स्वागत भाषण के दौरान कहा था कि असम सरकार की योजना विधानसभा के अगले सत्र में गौ संरक्षण विधेयक पेश करने की है।

असम के नए मुख्यमंत्री ने कहा- “गाय हमारी माता है। हम पश्चिम बंगाल से गायों की तस्करी नहीं होने देंगे। जिन स्थानों पर गायों की पूजा की जाती है, गोमांस का सेवन नहीं होना चाहिए।” उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब ये कतई नहीं है कि सबको अपनी आदतें तुरंत बदलनी होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि फैंसी बाजार, शांतिपुर या गांधीबस्ती (सभी गुवाहाटी में) जैसे इलाकों में मदीना होटल (जहां बीफ मिलता है) की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां के लोग इसे लेकर संवेदनशील है। जिन इलाकों में इस तरह की संवेदनशीलता नहीं है वहां बदलाव की जरुरत नहीं है। हेमंत विश्व शर्मा ने कहा कि हमारा संविधान भी गोहत्या के खिलाफ है। संविधान के तहत बनाए गए राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के मुताबिक गोहत्या को रोका जाना चाहिए। राज्य में गायों के अवैध व्यापार को भी रोका जाएगा।

राज्य में असम मवेशी संरक्षण अधिनियम 1950 से लागू है। इसी एक्ट की धारा 5 के तहत उन्हीं जानवरों को मारा जा सकता है जिसके लिए सभी मानदंडों पर सही उतरने के बाद पशु चिकित्सकों द्वारा वध के लिए उपयुक्त का सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। मुख्यमंत्री को इस मामले में बीजेपी के विधायकों का खासा समर्थन मिला है। हालांकि एआईयूडीएफ पार्टी के विधायक अमीनुल इस्लाम ने इस संबंध में पेश किए जाने वाले विधेयक पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बीजेपी ऐसे विधेयक गोवा, मिजोरम या मेघालय जैसे राज्यों में क्यों नहीं लाती जहां उनकी या उनके सहयोगियों की सरकार है।

हाल ही में केंद्र ने 25 फरवरी, 2021 को एक राष्ट्रीय ‘गाय पदोन्नति’ परीक्षा की घोषणा की। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभभाई कथिरिया ने घोषणा की कि स्वैच्छिक परीक्षा ‘कामधेनु गौ विज्ञान प्रचार प्रसार परीक्षा’ शीर्षक से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। दूध देना बंद कर देने के बाद भी, गाय द्वारा पेश की जा सकने वाली बेरोज़गार संभावनाओं और व्यावसायिक अवसरों को खोजने में मदद मिलेगी। हालांकि, केरल शास्त्र साहित्य परिषद द्वारा परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर हंगामे के बाद गाय परीक्षा स्थगित कर दी गई थी, यह कहते हुए कि यह अंधविश्वास फैलाने और देश में शिक्षा क्षेत्र का भगवाकरण करने का एक प्रयास था।

(दिनकर कुमार दि सेंटिनेल के पूर्व संपादक हैं। आप आजकल गुवाहाटी में रहते हैं।)

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This post was last modified on May 31, 2021 11:48 am

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