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Categories: बीच बहस

कारोबार के मामले में कॉरपोरेट को भी मात देते दिख रहे हैं भारत के कई बाबा

हमारे देश का इतिहास रहा है कि समाज में फैली गंदगी को दूर करने तथा भटके लोगों को सही रास्ता दिखाने के लिए जुनूनी लोग समाजसुधारक, सन्यासी, बाबा और आध्यात्मिक गुरु बने। चाहे महर्षि दयानंद हों, ज्योतिबा फुले हों, महावीर स्वामी हों, महात्मा बुद्ध हों, राजा राम मोहन राय हों सभी ने समाज में फैली गंदगी को दूर करने का प्रयास किया। आज के दौर में मामला बिल्कुल उल्टा हो गया है। धर्म और समाजसेवा की आड़ में कारोबारी बाबा देश के समाज सुधारक बने घूम रहे हैं।

इन बाबाओं ने अपने कारोबार के दम पर बड़े स्तर पर अपने समर्थक भी बना रखे हैं। इनके वैतनिक शिष्य समाजसेवा की आड़ में इनके कारोबार को बढ़ाने में लगे हैं। मोह-माया से दूर रहने का दावा करने वाले इन बाबाओं को दुनिया का हर एशोआराम चाहिए। रुतबा ऐसा कि एक श्री से काम नहीं चलता। इन्हीं बाबाओं में से एक हैं आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर। शिक्षा के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति पाले बैठे ये बाबा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नक्सली बता रहे हैं। इनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को नक्सली बनाया जाता है। ये महाशय प्राइवेट स्कूलों को सरकारी स्कूलों से बढ़िया बताकर बच्चों का भविष्य निजी स्कूलों में सुरक्षित बता रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों को बंद कर देने की सलाह दे रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि उन्होंने यह बयान किसी राजनैतिक मंच से दिया हो। उनके ये मधुर वचन जयपुर में एक स्कूली कार्यक्रम के दौरान सुनने को मिले।


दरअसल ये बाबा अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी तंत्र को फेल करने में लगे हैं। ये लोग एक तरह से देश में समांतर सरकार चला रहे हैं। देश के इन हाई प्रोफाइल बाबाओं ने ब्रांडिंग के बल पर बड़ा बिजनेस खड़ा कर लिया है। आज के इन गुरुओं का कारोबार विदेश तक फैला है। स्थिति यह है कि इनका टर्नओवर मल्टीनेशनल कंपनियों को भी मात देता दिख रहा है। दरअसल आध्यात्मिकता की आड़ में श्रीश्री रविशंकर अपना कारोबार आगे बढ़ाने में लगे हैं। श्री श्री रविशंकर की आय का मुख्य जरिया ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन है। इसके अलावा श्री श्री के पास विद्या मंदिर ट्रस्ट, पीयू कॉलेज बेंगलुरु, श्रीश्री मीडिया सेंटर बेंगलुरु, श्री श्री यूनिवर्सिटी भी है, जहां से इनका पूरा कारोबार चलता है। साथ ही रविशंकर का अमेरिका में भी एक ऑर्ट ऑफ लिविंग हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट है। ओशो न्यूज की ऑनलाइन मैगजीन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन, फॉर्मेसी और हेल्थ सेंटर की संपत्ति मिलाकर करीब 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की एसेट है।


ऐसा नहीं है कि इस जमात में रवि शंकर अकेले हैं। इनके अलावा बाबा रामदेव, राम रहीम, माता अमृतानंदमयी जैसे कई आध्यात्मिक गुरु हैं, जिन्होंने बाबा, बिजनेस और ब्रांड की हिट जुगलबंदी से करोड़ों का कारोबार खड़ा कर लिया है।
बाबा रामदेव: बाबा रामदेव की कमाई का मुख्य जरिया पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, पतंजलि योगपीठ, दिव्य योगी मंदिर ट्रस्ट और उनकी दूसरी शाखाएं हैं, जहां पतंजलि के प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं और पूरे देश-विदेश में उनका ड्रिस्ट्रीब्यूशन किया जाता है। इसके अलावा बाबा रामदेव की कमाई में पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज, पतंजलि चिकित्सालय, योग ग्राम, पतंजलि फूड और हर्बल पार्क का मुख्य योगदान है। बाबा रामदेव की कंपनी ने हाल में टीवी पर विज्ञापन देने के मामले में कई एमएनसी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।


बाबा राम रहीम : भले ही बाबा राम रहीम जेल में हो पर उसका कारोबार आज भी चल रहा है। बाबा राम रहीम का एमएसजी प्रोडक्ट्स बाजार में है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में बड़े स्तर पर उसके स्टोर खुले हैं। कंपनी के प्रोडक्ट में दाल और अनाज की 41 वेराइटी, चाय की 4 वेराइटी, चावल, खिचड़ी, 5 वेराइटी की चीनी, 3 तरह का नमक, आटा, देसी घी, मसाले, अचार, जेम, शहद, मिनरल वाटर और नूडल्स शामिल होने की बातें सामने आती रहती हैं। बाबा राम रहीम खुद इस कंपनी और प्रोडक्ट के ब्रांड एम्बेस्डर हैं। डेरा समर्थक भी इन प्रोडक्ट्स का जोर-शोर से प्रचार करते रहे हैं। राम-रहीम की कमाई के अन्य स्रोत हरियाणा के सिरसा में करीब 700 एकड़ का एग्रीकल्चर लैंड, राजस्थान के गंगानगर में 175 बेड का हॉस्पिटल, गैस स्टेशन और एक मार्केट कॉम्प्लेक्स दुनिया भर में करीब 250 आश्रम हैं। बाबा राम रहीम की 2 फिल्में भी रिलीज हो चुकी हैं।


माता अमृतानंदमयी : सुधामणि इदमन्नेल को दुनिया माता अमृतानंदमयी देवी के नाम से जानती है। इनकी आय के मुख्य स्रोतों में अमृता विश्व विद्यापीठम कॉलेज और अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस हैं। ये दोनों कोच्चि में स्थित हैं। इसके अलावा उनका एक स्कूल केरल में भी है। इस स्कूल का नाम अमृता स्कूल है। माता अमृतानंदमयी का एक टीवी चैनल भी है। कोवलम के पास एक आइसलैंड में माता का पांच मंजिलों का एक आश्रम भी है। दो साल पहले ओशो न्यूज की ऑनलाइन मैगजीन ने अमृतानंदमयी ट्रस्ट के पास 1,500 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति का ब्यौरा दिया था।

सदगुरु जग्गी वासुदेव : आध्यात्मिक सदगुरु के रूप में मशहूर ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्गी वासुदेव, ईशा बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड नाम की संस्था चलाते हैं। साल 2008 में बनी यह कंपनी देश-विदेश में बेक्ड कुकीज, भारतीय अचार, डोसा मिक्सड पाउडर समेत कई चीजों का प्रोडक्शन और सप्लाई करती है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक कंपनी रियल एस्टेट, इंटीयर डिजाइन और क्लॉथिंग बिजनेस में भी शामिल है। वेबसाइट के मुताबिक कंपनी अपनी आय को गांव के गरीब बच्चों और महिलाओं की भलाई में लगाती है। ईशा बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड रियल एस्टेट से कमाई करती है।

(चरण सिंह पत्रकार हैं और आजकल नोएडा से निकलने वाले एक दैनिक अखबार में कार्यरत हैं।)

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