Saturday, December 4, 2021

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कांग्रेस का कोरोना पर श्वेत पत्र! राहुल ने कहा-अंगुली उठाने नहीं, दुरुस्त करने के लिए ह्वाइट पेपर

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नई दिल्ली। कोविड की संभावित तीसरी लहर में नीडलेस मौतों को रोकने के लिये अभी से ज़रूरी संसाधन जुटाये जायें, जिन लोगों के परिवारों में रोटी कमाने वालों की मौत हुयी है उन्हें मुआवज़ा दिया जाये और गरीब ज़रूरतमंद लोगों को केंद्र सरकार सीधे आर्थिक मदद पहुंचाये। उपरोक्त बातें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोविड पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी करते हुये एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा है।  

सरकार पर उंगली उठाने के लिये नहीं

इसके बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुये कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि कोविड की समस्या आप सब जानते हैं। देश को जो दर्द पहुंचा लाखों लोगों की मृत्यु हुयी। कोरोना ने क्या किया पूरा देश जानता है। हमने इस पर एक श्वेत पत्र थोड़ा विस्तार में तैयार किया है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के इस व्हाइट पेपर के 2-3 लक्ष्य हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उँगली उठाना नहीं है। इसका लक्ष्य ये नहीं है कि सरकार ने ये… ये…..ये….गलत किया। हम गलती को इसलिये प्वाइंट आउट कर रहे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि आने वाले समय में इन गलतियों को दुरुस्त करना होगा। ठीक करना होगा। पूरा देश जानता है। दूसरी लहर से पहले हमारे वैज्ञानिकों ने, डॉक्टरों ने दूसरी लहर की बात की थी। उस समय जो कदम सरकार को उठाने थे, जो व्यवहार उनका होना चाहिये था वो नहीं रहा।    

राहुल गांधी ने कहा कि आपको व पूरे देश को कोरोना की दूसरी लहर के असर को सहना पड़ा। आज हम फिर से वहीं खड़े हैं। पूरा देश जानता है कि तीसरी लहर आने जा रही है। वायरस म्यूटेट कर रहा है और तीसरी लहर आयेगी। और इसलिये हम एक बार फिर कह रहे हैं कि सरकार को तीसरी लहर के लिये पूरी तैयारी करनी चाहिये।

जो ज़रूरतें हैं अस्पताल की बेड की इन्फ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत है, ऑक्सीजन की ज़रूररत है, दवाइयों की ज़रूरत है। जो दूसरे लहर में नहीं की गयी उनको तीसरे लहर के लिये बिल्कुल करना चाहिये ये हमारा लक्ष्य है।

श्वेत पत्र का लक्ष्य केंद्र सरकार को रास्ता दिखाना है

कांग्रेस नेता ने कहा कि सारा देश जानता है कि कोविड-19 की तीसरी लहर आने वाली है, हम सरकार से इसके लिए तैयारी करने का अनुरोध करते हैं। इस रिपोर्ट का मकसद उंगली उठाना नहीं है। हम गलतियों को इसलिए उभार रहे हैं, ताकि समय रहते उसे ठीक किया जा सके। हमने ये श्वेत पत्र सरकार को रास्ता दिखाने के लिये बनाया है। इसमें हमने चार मुख्य बिंदु निकाले हैं। 

1- जो गलत हुआ उसे समझकर और कमियों को देखते हुये एक आयोग का गठन करना ताकि उन्हें ठीक किया जा सके। 

2-  कोविड की तीसरी वेब जो आने वाली है उसकी तैयारी। ऑक्सीजन, अस्पताल, क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्क्चर, दवाईयां आदि इन चीजों की आज की तैयारी। ताकि जब कोरोना की तीसरी लहर आये तो हिंदुस्तान के शहर हो या गांव हर जगह अस्पताल खड़े होने चाहिये। जिन्हें जहाँ ऑक्सीजन चाहिये उन्हें आसानी से ऑक्सीजन मिल जाये। और बिना कारण मौतें न हों। नीडलेस मौतें रोकी जायें। लाखों लोग नीडलेस ही मरे हैं दूसरे लहर में वो फिर से न मरें। 

3- कोविड बायोलॉजीकल बीमारी नहीं है। कोविड आर्थिक समाजिक बीमारी है। और इसलिये हमने  एक न्याय का कांसेप्ट दिया है। अगर उसका नाम न अच्छा लगे तो प्रधानमंत्री उसका नाम बदल दें। बेसिक कांसेप्ट ये है कि गरीबों के घर में सीधे पैसा पहुँचायें। सरकार को सबसे गरीब लोगों को छोटी मध्यम उद्यमों को आर्थिक सहायता देने की ज़रूरत है।

4-  चौथा एक कोविड कंपेनसेसन फंड होना चाहिये। जिन परिवारों को घर में जो रोटी कमाने वाले हैं उनकी मौतें हुयी हैं। उनको सीधे कोविड फंड से कंपेनसेसन दिया जाये।    

कोरोना महामारी को जीवन मौत के संदर्भ में देखे केंद्र, भाजपा-कांग्रेस राज्य में बांटकर नहीं

एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कांगेस नेता ने कहा कि कोरोना से लड़ाई किसी एक राज्य की नहीं बल्कि, पूरे देश की है। इसलिए केन्द्र सरकार किसी भी राज्य से भेदभाव न करे, और सभी राज्यों से समान व्यवहार करे। सभी राज्यों को समान तरीके से टीका उपलब्ध करवाया जाए। सरकार को कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ संघर्ष को जीवन और मौत के संदर्भ में देखना चाहिये न कि भाजपा राज्य बनाम कांग्रेंस या अन्य शासित राज्य के तौर पर देखना चाहिये।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र द्वारा हर राज्य के साथ समान व्यवहार होना चाहिये। हर राज्य को ज़रूरत की चीजें समान मात्रा में मुहैया करवायी जानी चाहिये। वैक्सीन समान मात्रा में मुहैया करवाया जाना चाहिये। वायरस म्यूटेट होगा और स्वरूप बदलकर ख़तरनाक होकर हमला करेगा। हमें बहुत तेजी से हर व्यक्ति का वैक्सीनेशन करना होगा। ऐसा नहीं हो सकता कि आप भाजपा शासित राज्यों में ज़्यादा वैक्सीन भेजें और गैर- भाजपा शासित राज्यों में। और फिर पोस्टर लगाकर कहें कि देखो भाजपा शासित राज्यों में ज़्यादा वैक्सीनेशन हुआ है क्योंकि वहां सरकार ज़्यादा एक्टिव है।

कोरोना के खिलाफ़ डायनामिक और यूनाइटेड रणनीति होनी चाहिये

राहुल गांधी ने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि हमने पहले ही कहा था कि कोरोना से लड़ना है तो विकेंद्रीकृत तरीके से लड़ना होगा। प्रधानमंत्री की जगह है, मुख्यमंत्री की जगह है, डीएम की जगह है, नागरिक की जगह है। सबको एक साथ मिलकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी पड़ेगी। तब कोविड से हम लड़ पायेंगे। हमारे श्वेत पत्र का लक्ष्य जो पिछले साल में हुआ है जो गल्तियां हुयी हैं उनको सामने रखने का है। अब वो सरकार के लिये इनपुट है। केंद्र सरकार व्हाइट पेपर को पढ़ेगी और इनपुट को लेगी तो सरकार को फायदा होगा। मेरा मेन प्वाइंट ये है कि कांग्रेस के पास, अन्य विपक्षी दलों के पास, देश के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और डॉक्टरों के पास सूचना है, समझ है। उसका प्रयोग कीजिये।            

उन्होंने पत्रकार के सवाल के जवाब में आगे कहा कि सरकार लोगों की बात सुनिये। मनमोहन सिंह जी ने आपको वैक्सीनेशन पर सुझाव दिया था आपने उनका मजाक उड़ाया। आपने अपने मंत्री से उन पर अटैक करवाया। और फिर जो उन्होंने कहा था आपको वहीं दो महीने बाद करना पड़ा।

राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि सेंट्रलाइज (केंद्रीकृत) तरीके से आप नहीं कर सकते हो आपने मजाक उड़ाया फिर आप ने उस बात को स्वीकार किया। तो उदार सोच के साथ काम करना है। संकीर्ण दिमाग के तौर पर काम नहीं करना है। और जो गलतियां हुयी हैं उन्हें स्वीकार करना होगा। क्योंकि गलतियों को स्वीकर करने के बाद ही सही रास्ते पर चले पड़ेंगे।

जब मौत का डेटा ही सही नहीं तो कंपेनसेशन कैसे  

एक अन्य पत्रकार के सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि सरकार मौत के आंकड़ों को छुपा रही है। कम करके बता रही है। इस बात में तो कोई संदेह ही नहीं है। मेरा आकलन है सरकार के डेटा से 5-6 गुना ज़्यादा मौतें हुयी हैं। लेकिन ये हमारे लिये प्रोडक्टिव नहीं है। हम निश्चित तौर पर सरकार पर हमला करेंगे कि आप मौत के आंकड़ों को छुपा रहे हैं। लेकिन अभी दूसरी कमजोर हुयी है और तीसरी लहर आने वाली है अभी उसकी तैयारी पर फोकस करना ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

90 प्रतिशत नीडलेस मौते हुयी, इन्हें ऑक्सीजन मिल जाता तो ये नहीं मरते

आक्सीजन को लेकर अपनी पीठ थपथापने वाले पीएम मोदी के बयान के मामले में एक पत्रकार के सवाल पर कांग्रेस नेता ने कहा कि – दो तरीके की कोविड मौत होती है। एक होती है नीडलेस डेथ जो नहीं होनी चाहिये थी। क्योंकि उस व्यक्ति को आसानी से बचाया जा सकता था। मगर उसे नहीं बचाया गया। और दूसरी मौत होती है जिस व्यक्ति की हालत बहुत क्रिटिकल होती जो बुजुर्ग होते हैं जिन्हें बचाना मुश्किल होता है। लेकिन हिंदुस्तान में कोरोना की सेंकड वेव में 90 प्रतिशत लोग नीडलेस मरे हैं। और मैंने बहुत से डॉक्टरों से बात की और सबका एक ही कहना है नीडलेस डेथ को देखें। 90 प्रतिशत लोगों को मरना नहीं चाहिये था। इनको सपोर्ट मिल जाता तो नहीं मरते। जिसका सबसे बड़ा कारण ऑक्सीजन की लिमिटेशन। हम उनको सही समय पर ऑक्सीजन नहीं दे सके वो इसलिये मरे।

मोदी के आंसू नहीं, ऑक्सीजन से जान बचेगी

गांधी ने आगे कहा कि – मैं ऐसे बहुत से परिवार को जानता हूं जिन्होंने अपने माता पिता, भाई बहन, पति, पत्नी, बेटे बेटियों को खोया है। कारण सिर्फ एक- ऑक्सीजन नहीं दे पाये। इस देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। जितनी ऑक्सीजन की ज़रूरत हो ये देश उत्पादन करके दे सकता है। जो नीडलेस मौतें हुयी है प्रधानमंत्री के आंसू उन परिवारों के आंसू नहीं मिटा पाये। वो सब परिवार जानते हैं। कि जो मेरे परिवार के व्यक्ति मरे वहां प्रधानमंत्री नहीं थे। प्रधानमंत्री के आंसू ने उन्हें नहीं बचाया। मगर ऑक्सीजन ज़रूर बचा सकता था। प्रधानमंत्री ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। वो बंगाल में चुनाव लड़ रहे थे। और उनका फोकस दूसरी ओर था ये पूरा देश जानता है।     

राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री के आंसुओं ने किसी की जान बचायी क्या? जान तो ऑक्सीजन ने बचाया। ऑक्सीजन की कमी से जान गयी। पूरा देश जानता है सब।

प्रधानमंत्री को समझना है कि ये राजनीतिक लड़ाई नहीं है।

न्यूज नेशन के पत्रकार मोहित दूबे ने कहा कि केंद्र सराकर स्कूलों की दीवारों में वैक्सीनेशन पर अपने फोटो, पोस्टर, बैनर लगवा रही है। वैक्सीनेशन कम विज्ञापन ज़्यादा हो रहा है इस पर आपकी प्रतिक्रिया।

एक पत्रकार के वैक्सीनेशन पर पीएम के फोटो लगने के सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया का इकलौता देश है भारत, जहां निजी अस्पतालों में पेमेंट देकर वैक्सीनेशन हो रहा। बाकी देशों में सब जगह मुप्त वैक्सीनेशन हो रहा है। प्रधानमंत्री पहले भी मार्केटिंग में घुस गये थे। थाली बजाओ, ताली बजाओ, मोबाइल की टार्च जलाओ, कोविड को हमने हरा दिया। बाकी दुनिया में वैक्सीन बेच दी। तो ये पहले भी मार्केटिंग में घुसे थे और उसका नतीजा देश ने भुगता है। लाखों लोगों ने उसका नतीजा भोगा है।

राहुल गांधी आगे ने कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना के खात्मे से पहले ही मार्केटिंग शुरू कर दी। एक दो साल बाद जब देश कोरोना को हरा दे, तब जीत का एलान कीजिएगा। मैंने पहली और दूसरी लहर में बोला था, अब तीसरी लहर से पहले बोल रहा हूं, तैयारी शुरू कर दीजिए। ये मेरी बात नहीं है। ये वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों की राय है। जो मैंने उनकी आवाज़ को उठाया। प्रधानमंत्री ने उन्हें नहीं सुना। तो प्रधानमंत्री को ये समझना है कि ये राजनीतिक लड़ाई नहीं है। इस लड़ाई में पूरा हिंदुस्तान उनके साथ खड़ा है। ये वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई है प्रधानमंत्री को देश के सारी जनता की ताक़त को साथ लेना चाहिये इस लड़ाई में।

उन्होंने आगे कहा कि वैक्सीनेशन की प्रक्रिया एक गंभीर मसला है इसे गंभीरता से चालाया जाना चाहिये। ये इस लड़ाई में मुख्य रणनीति है। दुनिया में वो हर वैक्सीन जो उपलब्ध है सबको डायनेमिकली चेक करो। और उपलब्ध कराओ। वैक्सीन को लेकर डायनामिक स्ट्रेटजी होनी चाहिये।

देश में फंड की कोई कमी नहीं है

एक और पत्रकार के सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने एक साल में चार लाख करोड़ रूपये डीजल और पेट्रोल पर टैक्स से वसूला है। ये पैसा लोगों की जेबों से लिया गया है। तो मेरे समझ में नहीं आ रहा कि सरकार उन जेबों को उनके पैसे वापस क्यों नहीं दे सकती। ये कोई ऐसा सवाल नहीं है कि सरकार मुफ्त में कोई उपहार दे रही है। ये प्राथमिक ज़रूरत है। भारत चाहता है कि ये पीड़ित परिवार मुआवजा पायें। जिनके घरों ने रोटी कमाने वाले को खोया है। सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है।

गौरतलब है कि देश की केंद्रीय सत्ता में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। लेकिन देश में फैली कोविड-19 महामारी पर समुचित चिंतन और ठोस योजनाओं पर कांग्रेस काम कर रही है। वहीं सत्ताधारी पार्टी के शूरमा भोपाली यानि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का पूरा जोर इस कोविड काल में भी विधानसभा चुनावों के मैनेजमेंट और किसी भी क़ीमत पर जीत हासिल करने की रणनीति को अंजाम देने पर रही है। कोविड-19 की पहली लहर में जब देश लॉकडाउन की मार झेल रहा था, सैनिक एलएसी पर चीनी सैनिकों के हाथों मारे जा रहे थे मोदी-शाह बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों और प्रचार प्रसार में मगन थी।

इसी तरह इस साल जब कोविड-19 की दूसरी लहर प्रतिदनि का आंकड़ा पहले लाख, फिर 2 लाख के पार जा रही थी, लोग बाग जीवनरक्षक दवाइयों, ऑक्सीजन और अस्पतालों में बेड वेंटिलेटर की कमी से मर रहे थे मोदी शाह बंगाल में चुनावी रैलियों और रोड शो में उमड़ी भीड़ को देखकर लहालोट हो रहे थे। अब जबकि अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं केद्र की भाजपा सरकार चुनावी मैनेजमेंट में जुटी है और सत्ता से दूर कांग्रेस पार्टी कोविड-19 महामारी पर व्हाइट पेपर लेकर आयी है। देखना ये है केंद्र में काबिज अपनी सनक और हनक में सलाह देने वाले विपक्षी दल के अनुभवी नेताओं को बारिश में भीगते बंदर से झपट पड़ने वाली सरकार कांग्रेस के इस श्वेत पत्र का क्या जवाब देती है। 

  

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