Subscribe for notification
Categories: बीच बहस

गोगोई जी! संविधान और कानून के शासन की अनदेखी से है न्यायिक स्वतंत्रता को खतरा

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने सच ही कहा है कि न्यायिक स्वतंत्रता खतरे में है लेकिन उसके लिए ज़िम्मेदार कारकों का गलत निरूपण किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गये साक्षात्कार में राज्य सभा सदस्य के तौर पर मनोनयन को स्वीकार करने के बाद से आलोचनाओं का सामना कर रहे पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने खुद पर लगे आरोपों को एक लॉबी द्वारा बदनाम करने की कोशिश करार देते हुए उन्होंने कहा कि आज न्यायपालिका की  आजादी खतरे में है। गोगोई ने कहा कि 5-6 लोगों की एक लॉबी की न्यायपालिका पर दमघोंटू जकड़ से न्यायिक स्वतंत्रता खतरे में है।

अगर किसी जज ने इस लॉबी की इच्छा के मुताबिक फैसला नहीं दिया तो, ये उसे बदनाम और कलंकित करते हैं। गोगोई जी न्यायपालिका की स्वतंत्रता को आपने और आपके पूर्ववर्तियों, जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने भ्रष्ट आचरण से खतरे में डाल दिया है। लगातार वैचारिक विशेष के लोगों को कॉलेजियम और सरकार की मिलीभगत से न्याय पालिका में भरकर न्यायिक स्वतंत्रता को गिरवी रख दिया है। सरकार की मनमानी, अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ आज न्यायालय विशेष रूप से उच्चतम न्यायालय से राहत मिलने की उम्मीद खत्म होती जा रही है।

तत्कालीन चीफ जस्टिस खेहर पर कालिखोपुल की चिठ्ठी से जो भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे उसका हश्र क्या हुआ? क्या उसका संज्ञान लिया गया? कालिखो पुल की पहली पत्नी दंग विम्साई पुल ने उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस को 2 पन्नों की चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी में मांग की गई थी कि आरोपों की जांच सीबीआई से करवाई जाए।चिट्ठी में दंगविम्साई ने लिखा था कि ‘मेरे पति की डायरी/सुसाइड नोट में राज्य की सियासत के अलावा न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के दायरे में उच्चतम न्यायालय  के दो सीनियर जज भी शामिल हैं जो अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन को खत्म करने से जुड़े फैसले में शामिल थे। इसलिए ये जरूरी है कि इन दावों की बिना पर एफआईआर दर्ज की जाए और सीबीआई को जांच सौंपी जाए।लेकिन उन्हें अपनी चिट्ठी वापस लेनी पड़ी। इसमें जस्टिस खेहर के लडके का भी नाम आया था।

जस्टिस दीपक मिश्रा को देश का मुख्य न्यायाधीश बनाये जाने पर पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या जिस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हों, उसे देश का मुख्य न्यायाधीश बनाया जाना चाहिए। बाद में मेडिकल एडमिशन घोटाले में जजों को रिश्वत देने के एक मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर और तीन नामी-गिरामी वकीलों प्रशांत भूषण, दुष्यंत दवे और कामिनी जायसवाल के बीच उच्चतम न्यायालय में किस कदर तीखी नोक-झोंक हुई, पूरे देश ने देखा था।

कोर्ट रूम से ही लोगों ने ट्वीट किए, प्रशांत भूषण साफ तौर पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कोर्ट रूम छोड़कर चले गए और चीफ जस्टिस मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने जस्टिस चेलमेश्वर द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस होने के नाते किस मामले की सुनवाई किस पीठ को दी जाए, इसका अंतिम फैसला करने का अधिकार दीपक मिश्रा के पास ही था और किसी मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ गठित करने की जरूरत है या नहीं, इसका भी फैसला करने का अधिकार उन्हीं के पास था। इसी अधिकार का उपयोग करते हुए चीफ जस्टिस मिश्रा ने जजों द्वारा रिश्वत लेने के मामले की सुनवाई के लिए 5 जजों की संविधान पीठ गठित करने के जस्टिस चेलमेश्वर के आदेश को रद्द कर दिया। उनके इसी आदेश को लेकर यह सारा ड्रामा खड़ा हुआ।

यही नहीं बिना याचिका के एक अन्य मामले में जस्टिस मिश्रा ने मुस्लिमों के तीन तलाक का मुद्दा बनवा कर याचिका योजित करा दी थी जो भाजपा के एजेंडे को सूट करती थी।सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाए जाने के जस्टिस दीपक मिश्रा के आदेश ने पूरे देश में राष्ट्रवाद की बहस को बेहद तीखा कर दिया था।

जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद जस्टिस  रंजन गोगोई चीफ जस्टिस बने और अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न से अपने को कैसे मुक्ति दिलाई यह भी पुरे देश ने देखा। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, रंजन गोगोई द्वारा अयोध्या मामला सुनने के लिए 5 जजों की बेंच गठित करना भी हैरानी भरा फैसला था जबकि मूल रूप से इस मामले को 3 जजों की बेंच को भेजा गया था। इस सम्बंध में उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के नियमों का हवाला अवश्य दिया गया लेकिन तमाम लोगों को यह तर्क पचा नहीं। यही नहीं बाबरी विध्वंस पर कलम तोड़ दलीलें देने के बाद जिस तरह मन्दिर बनाने के लिए विवादित जमीन हिन्दू पक्ष को सौंपी गयी उसकी आज तक आलोचना हो रही है।

इसी तरह अभिजीत अय्यर-मित्रा मामला अक्टूबर 2018 में एक टिप्पणीकार, अभिजीत अय्यर-मित्रा, जो कोणार्क सूर्य मंदिर वास्तुकला और उड़ीसा संस्कृति पर कथित अपमान जनक टिप्पणी के आरोपों का सामना कर रहे थे उन्होंने शीर्ष अदालत में अपनी हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की जब वो जेल में थे। राहत देने से मना करते हुए तत्कालीन चीफ जस्टिस  रंजन गोगोई की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह रिकॉर्ड पर टिप्पणी की थी कि यदि आप कहते हैं कि आपको खतरों का सामना करना पड़ता है, तो आपके लिए सबसे सुरक्षित स्थान जेल में होगा। आपका जीवन सुरक्षित हो जाएगा। आपने धार्मिक भावनाओं को भड़काया है। उच्चतम न्यायालय द्वारा हैबियस कॉर्पस याचिका में एक बंदी को यह कहा जाना कि वह जेल में ही सुरक्षित है, जबकि वह बंदी, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर रहा है, पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी थी साथ ही उतनी ही स्तरहीन थी।

इसी तरह महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती का मामला जब एक याचिकाकर्ता, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर में अबाध संचरण के अधिकार का दावा किया तो उनसे तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने यह मौखिक टिप्पणी की थी कि वह श्रीनगर में अबाध संचरण की स्वतंत्रता क्यों चाहती हैं। तुम क्यों घूमना चाहती हो? श्रीनगर में बहुत ठंड है।

जस्टिस गोगोई ने कहा है कि ‘ज्यूडिशियरी की आजादी का मतलब इस पर 5-6 लोगों की जकड़ को तोड़ना है। जब तक यह दम घोंटने वाली जकड़ नहीं तोड़ी जाएगी, न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं हो सकती। उन्होंने जजों को एक तरह से बंधक बना लिया है। अगर किसी केस में उनके मनमाफिक फैसला नहीं हुआ तो वे जजों को हर मुमकिन तरीके से बदनाम करते हैं। मैं उन जजों को लेकर चिंतित हूं जो यथास्थितिवादी हैं, जो इस लॉबी से पंगा नहीं लेना चाहते और शांति से रिटायर होना चाहते हैं। अब गोगोई भी जानते हैं कि जो वकील मेरिट पर बहस करता है, जजों की चमचा गिरी नहीं करता वह सही फैसले को सही और गलत फैसले को गलत कहेगा ही। फिर न्यायपालिका के पास अवमानना का ब्रह्मास्त्र है। यदि 5-6 लोगों ने न्यायपालिका को जकड़ रखा है तो अवमानना में उन्हें सबक क्यों नहीं सिखाते?

गोगोई ने उन आलोचनाओं को सिरे से खारिज किया कि राज्य सभा में उनका मनोनयन अयोध्या और राफेल फैसले का ‘ईनाम’ है। उन्होंने कहा कि उन्हें महज इसलिए बदनाम किया जा रहा है क्योंकि वह ‘लॉबी’ के सामने नहीं झुके। गोगोई ने कहा कि अगर कोई जज अपनी अंतरात्मा के हिसाब से केस का फैसला नहीं लेता है तो वह अपने शपथ को लेकर ईमानदार नहीं है। मेरी अंतरात्मा ने जिस चीज को सही कहा उसी के हिसाब ने मैंने फैसले सुनाए। अगर ऐसा नहीं करता तो एक जज के तौर पर ईमानदार नहीं रह पाता। गोगोई जी फैसला अंतरात्मा की आवाज पर नहीं संविधान और कानून के अनुरूप लिया जाता है। जब आपने राफेल पर फैसले में लिखा की अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय इस पर फैसला नहीं कर सकता तो इसकी मेरिट पर क्यों अपने विचार फैसले में व्यक्त किये?

तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के दौर में मामलों को अलग-अलग बेंचों में आवंटित किए जाने के तरीके के खिलाफ 4 जजों की ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की तरफ इशारा करते हुए गोगोई ने कहा कि जब जनवरी 2018 में मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में गया तब इस लॉबी का दुलारा था। लेकिन चीफ जस्टिस बनने के बाद आपने उन्हीं जज को सरकार से सम्बन्धित महत्वपूर्ण मामले आवंटित करने जारी रखे जिनके खिलाफ आप प्रेस कॉन्फ्रेंस में गरजे थे। यही नहीं इन्हीं जज साहब को आपने अपने विरुद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की सुनवाई का दायित्व भी सौंपा था।

जस्टिस गोगोई भले ही उन आरोपों को खारिज करें कि राज्य सभा में उनका मनोनयन सरकार को सूट करने वाले उनके फैसलों का ‘ईनाम’ है, लेकिन पूरे देश की जनता में यह संदेश गया है कि यह वफादारी का ईनाम है। जस्टिस गोगोई ने यह नहीं बताया कि जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस मदन बी लोकूर ने राज्य सभा में उनके मनोनयन की तीखी आलोचना क्यों की है? जस्टिस मार्कन्डे काटजू ने मनोनयन पर कहा है कि मैं 20 साल से वकील हूं और 20 साल तक जज रहा। मैं कई अच्छे जजों और कई बुरे जजों को जानता हूं। लेकिन मैंने कभी भी भारतीय न्यायपालिका में किसी भी न्यायाधीश को इस यौन विकृत रंजन गोगोई के रूप में बेशर्म और अपमानजनक नहीं बताया। शायद ही कोई दुर्गुण हो जो इस आदमी में न हो ।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ ही क़ानूनी मामलों के जानकार हैं।)

This post was last modified on March 20, 2020 6:05 pm

Leave a Comment
Disqus Comments Loading...
Share

Recent Posts

झारखंडः प्राकृतिक संपदा की अवैध लूट के खिलाफ गांव वालों ने किया जनता कफ्यू का एलान

झारखंड में पूर्वी सिंहभूमि जिला के आदिवासी बहुल गांव नाचोसाई के लोगों ने जनता कर्फ्यू…

11 mins ago

झारखंडः पिछली भाजपा सरकार की ‘नियोजन नीति’ हाई कोर्ट से अवैध घोषित, साढ़े तीन हजार शिक्षकों की नौकरियों पर संकट

झारखंड के हाईस्कूलों में नियुक्त 13 अनुसूचित जिलों के 3684 शिक्षकों का भविष्य झारखंड हाई…

58 mins ago

भारत में बेरोजगारी के दैत्य का आकार

1990 के दशक की शुरुआत से लेकर 2012 तक भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में…

2 hours ago

अद्भुत है ‘टाइम’ में जीते-जी मनमाफ़िक छवि का सृजन!

भगवा कुलभूषण अब बहुत ख़ुश हैं, पुलकित हैं, आह्लादित हैं, भाव-विभोर हैं क्योंकि टाइम मैगज़ीन…

2 hours ago

सीएफएसएल को नहीं मिला सुशांत राजपूत की हत्या होने का कोई सुराग

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत की गुत्थी अब सुलझती नजर आ रही है। सुशांत…

2 hours ago

फिर सामने आया राफेल का जिन्न, सीएजी ने कहा- कंपनी ने नहीं पूरी की तकनीकी संबंधी शर्तें

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट से राफेल सौदे विवाद का जिन्न एक बार…

3 hours ago