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Categories: बीच बहस

नाकामियों पर शर्मिंदा होने के बजाए बिगड़ गए ‘सरकार बहादुर’ के बोल

भारत में कोरोना महामारी विकराल रूप धर चुकी है। पिछले एक सप्ताह से एक दिन में नये संक्रमतों की संख्या दो लाख के आंकड़ों के पार जा रही है। देश में अब तक दो लाख से ज़्यादा लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। केवल पिछले 24 घंटे में 3.80 लाख नए मरीज मिले हैं, जबकि 3646 की मौत हो गई है। 5 अप्रैल को देश में 24 घंटे कोरोना संक्रमण के 1,03,558 मामले दर्ज किए गए थे। महज 25 दिन में ये दर चार गुना बढ़ गई है। 22 अप्रैल से लगातार एक दिन में कोरोना संक्रमितों की संख्या तीन लाख के पार जा रही है।

अस्पतालों में बेड नहीं हैं। देश के हर कोने में ऑक्सीजन की कमी से हाहाकार मचा हुआ है। बाज़ार से रेमेडिसविर जैसी जीवन रक्षक एंटीवॉयरल की कमी के चलते ब्लैक में 18 हजार से 90 हजार रुपये में बिक रहा है। ऐसे में अपनी नाकामी स्वीकार करके जनता से माफ़ी मांगने के बजाय सत्ताधारी लोग ऊलजलूल बयानबादी कर रहे हैं और ऑक्सीजन और रेमेडिसविर जैसी चीजें मांगने वालों को आपराधिक दर्जा देकर उनके ही खिलाफ़ कार्रवाईयां कर रहे हैं।

कुछ बेतुके बयानों पर एक नज़र

बेहतर होगा मर जाएं
कर्नाटक के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री उमेश कट्टी से एक किसान ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए चावल की आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया। इस पर उन्होंने किसान से मर जाने को कहा था। पत्रकारों के पूछने पर उन्होंने कहा कि उनका दिल बहुत छोटा है।उत्तरी कर्नाटक के गडग के किसान कार्यकर्ता ईश्वर ने बुधवार को कट्टी को फोन किया था और उनसे पूछा कि एक महीने में दो किलो चावल के सहारे कोई कैसे जीवित रह सकता है, जब लॉकडाउन के कारण हजारों लोग बेरोज़गार हो गए हैं।

ईश्वर के सवाल पर मंत्री ने जवाब दिया कि लॉकडाउन के मद्देनजर मई और जून में केंद्र पांच किलो अनाज देगा। इस पर किसान ने कहा कि क्या लोगों को तब तक उपवास करना चाहिए या मर जाएं। कट्टी ने कहा, “बेहतर होगा मर जाएं। बेहतर होगा कि आप चावल का व्यापार करना बंद कर दें। मुझे दोबारा फोन मत करना।”

जो मर गया है वो शोर मचाने से जिंदा नहीं होगा
वहीं एक और भाजपा शासित राज्य हरियाणा में कोरोना संक्रमण से हो रही मौत के आंकड़ों को छुपाने को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से 27 अप्रैल मंगलवार को पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, हमारे शोर मचाने से मरे हुए लोग वापस नहीं आएंगे।

मुख्यमंत्री खट्टर ने जवाब में कहा, “कोविड-19 के इस संकट में हमको डेटा के साथ नहीं खेलना है। हमें यह देखने पर ध्यान देना चाहिए कि लोग कैसे ठीक हो सकते हैं। जो मर गया है वो हमारे शोर मचाने से जिंदा नहीं होगा। हम हर संभव प्रयत्न करेंगे कि लोगों को बचाया जाए। मौत कम हैं या ज्यादा हैं, इस विवाद में पड़ने का कोई अर्थ नहीं है। देखना यह है कि क्या हमारी व्यवस्था हम ठीक कर पा रहे हैं या नहीं। हम अपनी तरफ से व्यवस्थाएं ठीक कर रहे हैं। यह महामारी है इसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं था, न आपको पता था और न हमें पता था। इससे बचने में हमें सभी का सहयोग चाहिए। आपका भी सहयोग चाहिए, हमारा सहयोग भी चाहिए और मरीजों का भी सहयोग चाहिए। इसलिए इन विषयों को विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।”

यूपी में पीड़ितों के मददगारों के ख़िलाफ़ एनएसए और गैंगस्टर्स एक्ट
“कोरोना की दूसरी वेव इस बार तीस गुना ज्यादा तेजी से संक्रमण फैल रहा है। उस पर से सोशल मीडिया पर श्मशान और चिताओं वाली नकारात्मक रिपोर्टिंग ने कोढ़ में खाज वाली स्थिति पैदा कर दी। राज्य में न तो बेड कम थे, न ऑक्सिजन और न ही दवाएं-इंजेक्शन। फिर भी ऐसी दहशत फैलाई गई कि जिन्हें ज़रूरत भी नहीं थी, उन्होंने इन चीजों को घर में जमा करना शुरू कर दिया। नतीजतन कुछ दिनों तक लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा।”- ये बातें 25 अप्रैल को लखनऊ के अख़बारों के संपादकों से बातचीत करके हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है।”

‘धीरज, धर्म मित्र अरु नारी आपद काल परिखि अहिं चारी’ जैसी चौपाई से बातचीत की शुरुआत करते हुए योगी ने कहा, “ऐसा पाया गया है कि कई जगहों पर ऑक्सीजन का इस्तेमाल ही दोषपूर्ण है, जिससे अक्सर बरबादी होती है। अब इसे रोका जाएगा। पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन के इस्तेमाल के तौर-तरीकों को ऑडिट होगा। इसके लिए आईआईएम लखनऊ, आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई है।

इतना ही नहीं ऑक्सीजन संकट का सामना कर रहे अस्पतालों और मरीजों की खबरों के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और ‘अफवाहें’ फैलाने वाले व ‘माहौल खराब’ करने वाले लोगों की संपत्ति को जब्त करने और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक में, दवा की ‘ब्लैकमार्केटिंग’ में शामिल ‘असामाजिक तत्वों’, अफवाहें फैलाने और माहौल को खराब करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ एनएसए और गैंगस्टर्स एक्ट के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

मां गंगा का आशीर्वाद लेकर जाएंगे तो नहीं फैलेगा कोरोना
वहीं 13 अप्रैल को हरिद्वार कुम्भ में कई अखाड़े के कई साधुओं के कोरोना संक्रमित पाये जाने के बावजूद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा था कि मां गंगा के आशीर्वाद से यहां कोरोना नहीं फैलेगा। तीर्थ सिंह रावत इतने पर ही नहीं रुके, आगे कहा कि  कि कुंभ की तुलना मरकज ने नहीं की जा सकती। मरकज़ से जो कोरोना फैला वो इसलिए कि वो बंद कमरे में थे। कुंभ खुले में हैं, इसलिये कोरोना नहीं फैलेगा। उन्होंने कहा कि माँ गंगा की अविरल धारा है, माँ गंगा का आशीर्वाद लेकर जाएंगे तो कोरोना नहीं फैलेगा।

कोविड के दौरान सीएए प्रोटेस्ट हो सकता है तो चुनावी रैली क्यों नहीं
वहीं 18 अप्रैल को गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी राज्‍यों में राजनीतिक रैलियों का बचाव करके हुए तर्क दिया कि जिन राज्‍यों में चुनाव नहीं हैं, उधर केसेज ज्‍़यादा बढ़े हैं। शाह ने अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्‍सप्रेस को दिए इंटरव्‍यू में कहा,  “महाराष्‍ट्र में चुनाव है क्‍या? उधर 60,000 केसेज हैं,  इधर (पश्चिम बंगाल में) 4,000 हैं।”

शाह ने कहा,  “महाराष्‍ट्र के लिए भी मुझे अनुकंपा है और इसके लिए भी अनुकंपा है। इसको चुनाव के साथ जोड़ना ठीक नहीं है। किन-किन राज्‍यों में चुनाव हुआ? जहां चुनाव नहीं हुआ है, उधर ज्‍यादा बढ़े। अब आप क्‍या कहेंगे?”  गृह मंत्री ने पूछा कि क्‍या कोविड के दौरान नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के ख़िलाफ़ प्रदर्शन होने चाहिए?

गौरतलब है कि कोरोना काल में पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में चुनाव कराने को लेकर निर्वाचन आयोग सबके निशाने पर था। दो दिन पहले ही मद्रास हाई कोर्ट ने कोरोना विस्फोट के लिए निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज करने का आदेश दिया है, जबकि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में कोरोना पॉजिटिविटी दर देश में सबसे ज़्यादा 53 प्रतिशत है।

गवर्नेंस थक गई है- मोदी
अब बात कोरोना पर मोदी ज्ञान की। 8 अप्रैल 2021 को मोदी ने देश को संबोधित करते हुए अपनी नाकामी पर कहा, “हम समझते हैं कि एक साल तक लगातार काम करते रहने से सिस्टम में थकान आ गई है, लेकिन अगले दो से तीन हफ़्तों तक इसे दुरुस्त रखना होगा।”

इतना ही नहीं श्मशानों में जलती लाशों और और देश में मचे विलाप के बीच नरेंद्र मोदी ने देश वासियों से उत्सव मनाने की अपील करते हुए कहा था, ‘‘ज्योतिबा फुले की जयंती 11 अप्रैल और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल के बीच ‘टीका उत्सव’ मनाया जाए। हमें इस दौरान ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाने की कोशिश करनी चाहिए। मैं युवाओं से आग्रह करूंगा कि वे अपने आसपास के 45 साल से बड़े लोगों को टीका लगवाने में हरसंभव मदद करें।”

वहीं 20 अप्रैल को एक बार फिर देश को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कोरोना से निपटने की जिम्मेदारी बच्चों के सुपुर्द करते हुए कहा, “बाल मित्रों से अपील है कि वे घर में ऐसा माहौल बनाइए कि बिना काम बिना कारण लोग घर से बाहर न निकलें।”

हर्षवर्धन के बोल
वहीं कोरोना प्रबंधन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 18 अप्रैल को खत लिखकर कोविड-19 के कारण उत्पन्न हालात से निपटने के लिए पांच उपाय सुझाये थे, जिसका जवाब देते हुए 19 अप्रैल को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि वैश्विक महामारी की दूसरी लहर के लिए कांग्रेस शासित राज्य जिम्मेदार हैं, जो लोगों के टीकाकरण के बजाय टीकों पर कथित संदेह जताने में व्यस्त थे।

डॉ. हर्षवर्द्धन ने पूर्व प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, आपकी पार्टी द्वारा फैलाई जा रही नकारात्मकता के बावजूद हम सुझाव पर पूरा ध्यान देते हैं और यह मानते हैं कि यह राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए दिया गया होगा। हालांकि जिन लोगों ने आपका पत्र तैयार किया या आपको सलाह दी,  उन लोगों ने आपको गुमराह करके आपकी साख को नुकसान पहुंचाया है।’

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने ऐसी कठिन परिस्थितियों में टीका बनाकर दुनिया को सशक्त बनाने वाले वैज्ञानिकों और विनिर्माताओं के सम्मान में एक भी शब्द नहीं कहा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों का शुक्रिया अदा करने की बात तो छोड़ दें, कई कांग्रेसी नेताओं और राज्य की कांग्रेस सरकारों ने वैक्सीन के प्रभाव को लेकर झूठी बातें फैलाने में बड़ी दिलचस्पी दिखाई। इस तरह से टीका को लेकर लोगों के मत में हिचक पैदा की गई और इससे लोगों की जिंदगियों के साथ खेला जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘‘सकारात्मक सहयोग को लेकर आपके झुकाव को देखते हुए मैं मान लेता हूं कि आपने उन्हें (कांग्रेस नेताओं को) सुझाव दिया होगा, फिर भी स्पष्ट है कि आपका सुझाव व्यर्थ गया है।’’ उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को केवल कुल संख्या को नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी के कनिष्ठ सहयोगियों को भी आपके सुझाव का पालन करना चाहिए।

रामचरित मानस का सस्वर पाठ कोरोना को हराने में मददगार
वहीं 23 अप्रैल को देश के रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने कहा कि कोरोना की लड़ाई में धर्म और आध्यात्म से लोगों का जुड़ाव औषधि के रूप में काम करेगा। संक्रमितों को सही करने में भी सस्वर रामचरित मानस का पाठ वरदान साबित हो सकता है। यह बात उन्होंने डॉ. समीर त्रिपाठी के रामचरित मानस के अर्थ सहित गायन को लांच करते हुए कही। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में वह वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on April 29, 2021 5:12 pm

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