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Categories: बीच बहस

मराठा रण में रणचंडी बनी हिमाचल की कंगना बिहार में खड़ी कर सकती हैं नीतीश के लिए परेशानी

फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत मुंबई में महाराष्ट्र सरकार के एक्शन से बिफर पड़ी हैं। बीएमसी ने कंगना के दफ्तर में तोड़फोड़ की है। हाई कोर्ट ने तत्काल बीएमसी की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दे दिया। तब तक बीएमसी अपनी कार्रवाई पूरी कर चुकी थी। कंगना अब उद्धव ठाकरे पर हमलावर हैं। अब वह सरकारी सुरक्षा के घेरे में हैं। उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली है, लेकिन एक बात तय है कि मुंबई में अब कंगना का फ़िल्मी काम लगभग ठप हो सकता है। तत्काल फ़िल्मी दुनिया उन्हें काम देने से परहेज करेगी। कंगना अब अपनी फिल्में बनाएंगी।

राजनीतिक चेहरा बन गईं हैं कंगना
हिमाचल की यह क्षत्रिय बाला अब अचानक राजनीतिक रडार पर आ गई है। चाहे-अनचाहे उसे अब राजनीतिक गिरोह में शामिल होना है। बीजेपी ने उसे अपने जाल में फंसा लिया है। कंगना के साथ बीजेपी खड़ी है। बीजेपी ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई है। इस सुरक्षा की कीमत अब उन्हें चुकानी होगी। न चाहकर भी उन्हें बीजेपी की राजनीति को सपोर्ट करना होगा। बीजेपी की चाहत भी यही है।

मुंबई में बीजेपी ने कंगना को सेव किया तो अब कंगना को बिहार में बीजेपी के पक्ष में प्रचार करना होगा। खबर है कि कंगना ने इस पर हामी भी भर दी है। खबर ये भी है कि कंगना आगे की राजनीति भी करेंगी। संभवतः हिमाचल की राजनीति वह करें। वह बीजेपी से चुनाव भी लड़ सकती हैं। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी हिमाचल से ही हैं और उनके इशारे पर ही कंगना के साथ बीजेपी सपोर्टिव एक्शन में है।

बिहार चुनाव में उतर सकती हैं कंगना
लगभग साफ़ हो गया है कि बिहार चुनाव में बीजेपी के प्रचार अभियान को कंगना गति प्रदान करेंगी। कंगना का बिहार पहुंचना पार्टी के लिए लाभदायक साबित होगा। जदयू-बीजेपी के बीच आतंरिक खींचतान में कंगना का साथ बीजेपी को लाभ पहुंचाने के लिए काफी है। बिहार के युवाओं में कंगना का काफी क्रेज है। उनकी हिंदूवादी सोच और इस्लाम विरोधी समझ से बीजेपी को लाभ मिल सकता है।

बीजेपी कंगना के लिए बिहार में ख़ास प्रचार तंत्र विकसित करेगी। युवाओं की भारी टोली कंगना के साथ होगी और जहां-जहां बीजेपी को परेशानी दिख रही है, वहां कंगना को उतारकर युवा मतदाताओं में देश, राष्ट्र, हिंदू और राम के नाम पर लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करेंगी। बीजेपी को लग रहा है कि अचानक उसे एक नया अस्त्र मिल गया है जो बिहार की जनता में लहर ला सकती है।

नीतीश की पेशानी पर बल
कंगना रनौत के अचानक बीजेपी के जाल में चले जाने से जदयू प्रमुख और सूबे के सीएम चिंतित हैं। उन्हें लग रहा है कि बीजेपी को अचानक कंगना का साथ मिलना, जदयू के लिए घाटे का सौदा है। जिस सुशांत सिंह राजपूत के मामले को आगे बढ़ाने में जदयू ने सब कुछ किया। सीबीआई से जांच कराने की पहल की और जांच आगे बढ़ती गई, उसका लाभ अचानक बीजेपी को कैसे मिल गया। बिहार चुनाव में सुशांत सिंह राजपूत के मामले पर जदयू को आशा थी कि बिहारी समाज इस मसले पर जदयू को वोट करेगा, लेकिन अब गेंद बीजेपी के पास चली गई है। कंगना को लेकर बीजेपी ने बाजी पलट दी है। बिहार के डीजीपी पांडेय की तमाम कोशिशें बेकार चली गईं। बदले हालात से नीतीश फिक्रमंद हैं।

राजनीति के घाघ नीतीश कुमार अब क्या खेल करेंगे इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। जदयू कभी नहीं चाहेगी कि बीजेपी को बिहार में जदयू से बढ़त मिले। ऐसा हुआ तो नीतीश कहीं के नहीं रहेंगे। उनकी राजनीति कमजोर होगी और वे फिर बीजेपी के खिलौना हो जाएंगे।

जेपी नड्डा का पटना आगमन
इसी सप्ताह सीट शेयरिंग के मसले पर चर्चा के लिए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा पटना जा रहे हैं। एनडीए के बीच सीट शेयरिंग पर वे चर्चा करेंगे। संभावना है कि जदयू के लोग कंगना पर भी बात करें। बात यह भी होगी कि कैसे बीजेपी ने सुशांत सिंह राजपूत के मसले को अपने हाथ में ले लिया। जदयू ने सारी कोशिशें कीं, विपक्ष ने आवाज उठाई और पूरा मामला बीजेपी के पक्ष में चला गया। बता दें कि सभी राजनीतिक दलों को लग रहा था कि सुशांत सिंह के साथ धोखा हुआ है और अगर इसकी सही जांच होगी तो चुनाव में इसका लाभ मिल सकता है। माना जा रहा है कि इस मसले पर जदयू नड्डा से बात करेगी और कंगना के बिहार दौरे को लेकर विरोध दर्ज करा सकती है। बीजेपी उनकी बात मानेगी, संभव नहीं लगता। कंगना अब राजनीतिक चेहरा बन चुकी हैं भला उन्हें कौन रोकेगा!

(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

This post was last modified on September 10, 2020 7:59 pm

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