Monday, October 25, 2021

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कोई धर्म जब देने लगे हत्या और अपराध को संरक्षण!

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प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के एक आरोपी शरद कलस्कर का इकबालिया बयान सामनें आ चुका है। यह बयान केवल जुर्म का इकबालिया कबूलनामा या एक मर्डर मिस्ट्री के वीभत्स चेहरे का दर्शन मात्र नहीं है। ये बयान सामाजिक धार्मिक पतन का कबूलनामा है। ये बयान देश की धर्मनिरपेक्षता के भष्मीभूत होने का प्रमाण है। आरोपी शरद कलस्कर के सम्पूर्ण बयान का सूक्ष्म अवलोकन करने पर देश मे धर्मांधों की जाहिलियत, उसके अंदर की घृणा का बखूबी पता चलता है। महत्वपूर्ण बात ये है कि घृणा के इस ज़हर के सियासी व्यापारी ऐसे ही धर्मांधों के जरिये अपनी सियासत को साधते हैं।

विदित हो कि शरद कलस्कर डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या करने वाले 2 शूटरों में से एक है। शरद को सीबीआई ने दूसरे शूटर सचिन अंदुरे के साथ डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। शरद ने 12/10/18 को शिमोंग जिले के पुलिस अधीक्षक अभिनव खरे के सामने इकबालिया बयान दिया था।

आरोपी शरद कलस्कर के अनुसार उसने दाभोलकर को दो गोलियां मारी थीं। पहली गोली दाभोलकर के सिर में और जब दाभोलकर जमीन पर गिर पड़े तो दूसरी गोली उनकी आंख में मारी। आरोपी ने कबूल किया है कि उससे कुछ दक्षिणपंथी ग्रुप के सदस्यों ने संपर्क किया और हिंदू धर्म पर प्रवचन देने, गौहत्या, मुस्लिम कट्टरता और लव जिहाद पर वीडियो दिखाए गए। इसके अलावा उसे बंदूक चलाने और बम बनाने की ट्रेनिंग दी गई, साथ ही उसे बताया गया था कि उसे मर्डर करना होगा। उससे कहा गया था, ‘जो लोग धर्म के विरुद्ध रहते हैं, उनको स्वयं भगवान खत्म करेंगे, हमें कुछ दुष्ट लोगों का विनाश भगवान के लिए करना जरूरी है। उसने बताया उससे यह बात वीरेंद्र तावड़े ने कही थी, जो कि मुख्य साजिशकर्ता है।

दाभोलकर की हत्या के बाद शरद कलस्कर को बम बनाने की ट्रेनिंग कर्नाटक के बेलगाम में दी गई। अगस्त 2016 में बेलगाम में मीटिंग हुई थी, उसमें सबसे हिन्दू-विरोधी काम करने वालों के नाम मांगे गए थे, बैठक में पत्रकार गौरी लंकेश का नाम भी चर्चा में आया और फिर सबसे पहले गौरी लंकेश की हत्या करने का फैसला लिया गया। इसके बाद अगस्त 2017 में एक और बैठक बुलाई गई, बैठक के पहले दिन गौरी लंकेश की हत्या के लिए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई। और फिर बेहतरीन लेखिका गौरी लंकेश को एक पाखंडी हिंदूवादी उग्रवादी ने मार दिया।

ऐसे धर्मांधों को यह बताना चाहिए कि क्या वाकई हिन्दू धर्म इतना खोखला है? क्या हिंदू धर्म की रक्षा का भार आसाराम, अड्डा प्रमुख राम रहीम, रेपिस्ट शम्भू रैगर जैसे धर्मावलम्बियों पर टिका है? या फिर अमेरिकी संस्था सीआईए द्वारा घोषित धार्मिक उग्रवादी संगठन विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, श्रीराम सेना और इनके अलगाववादी संगठनों की मातृ संस्था के भरोसे है? क्या इन संगठनों के निर्माण से पहले हिन्दू या सनातन धर्म का अस्तित्व नहीं था? 

याद कीजिये गौरी लंकेश की हत्या के बाद एक ऐसे आतंकी ट्विटरबाज का ट्वीट आता है जिसे देश के प्रधानसेवक फॉलो करते हैं और ट्वीट में “गौरी लंकेश को कुतिया कहा जाता है।” हालांकि इस मुद्दे पर प्रधानसेवक की कड़ी आलोचना हुई थी और पहली बार किसी देश के प्रधानमंत्री को ट्विटर पर ब्लॉक करने की मुहिम चलानी पड़ी जो खबर कई दिनों तक ट्विटर पर टॉप ट्रेड करती रही। विवाद बढ़ते देख इस मुद्दे पर सीधे पीएमओ को सफाई देनी पड़ी थी। कुछ दिनों के बाद गौरी लंकेश की हत्या के आरोप में बाघमारे नामक धार्मिक आतंकवादी को गिरप्तार किया गया है जिसके तार देश के एक ऐसे धार्मिक संगठन श्रीराम सेना से जुड़ रहे हैं जो अपने आप को हिंदुत्व का ठेकेदार समझता है। 

देश को तालिबान बनाने पर आमादा धार्मिक संगठन श्रीराम सेना प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने बाघमारे के कबूलनामे के बाद फिर से उसी तरह के बयान को दोहराते हुये गौरी लंकेश को कुतिया की संज्ञा दी थी। इतना ही नही, गौरी लंकेश की हत्या में शामिल इन जाहिल धार्मिक आतंकियों को बचाने के लिये श्रीराम सेना ने चंदा जुटाने की मुहिम भी चलाया क्योंकि श्रीराम सेना के अनुसार मुजरिम ने धर्म की रक्षा हेतु ऐसा किया है। कुछ दिन पहले ऐसी ही विचारधारा के समर्थकों ने रेपिस्ट शंभूलाल रैगर को बचाने के लिये चंदा जुटाने का काम किया था। क्योंकि इन धर्मावलम्बियों के अनुसार शंभूलाल रैगर इनके आधुनिक भगत सिंह और हिंदुत्व के रक्षार्थ अवतरित ईश्वरीय दूत है। 

देश मे रेपिस्टों को बचाने के लिये हिंदुत्व की झांकी निकालने और चंदा जुटाने वाले धार्मिक अलगाववादी देश को तालिबान बना कर ही दम लेंगे। यही हकीकत और दुर्भाग्य बनता जा रहा है देश का। देश का सोशलिज्म और सेक्युलरिज्म ही जब समाप्त हो जायेगा तो संविधान की प्रस्तावना में बचेगा क्या ? सत्ता के सिंहासन पर विराजमान शूरमाओं को बताना चाहिए- क्या आने वाली पीढ़ी को इसी तरह का “न्यू इंडिया” सौंपने का वायदा है? “अल्लाह ईश्वर तेरो नाम” के गीत गुंजायमान होने वाले इस देश को धार्मिक आतंकवादियों की प्रयोगशाला बनने से बचाइए।

(दयानंद स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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