Monday, October 18, 2021

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सीपी-कमेंट्री: मोदी जी की अमेरिका यात्रा के खुले-अनखुले मायने

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इंडिया दैट इज भारत के प्रधानमंत्री पद पर 26 मई 2014 से लगातार काबिज नरेंद्र मोदी को विदेश की सैर करने का अलहदा लुफ्त दुनिया के कई हुक्मरान से ज्यादा पिछले सात बरस में मिल चुका है। लेकिन मोदी जी पिछले बरस कोरोना कोविड महामारी के वैश्विक उत्पात शुरू होने के बाद से सिर्फ एक बार , वो भी कुछ घंटे के लिए ही विदेश जा सके। तब वह बांग्लादेश के एक सैन्य तख्ता पलट में मारे गए राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान ( 17 मार्च 1920 :15 अगस्त 1975 ) की जन्म-शताब्दि के सिलसिले में एक कार्यक्रम में भाग लेने के वास्ते उनकी बेटी और वहाँ की तीसरी बार प्रधानमंत्री बनी और शेख मुजीब द्वारा ही स्थापित बांग्लादेश अवामी लीग की नेता शेख हसीना वाजेद के राजकीय आमंत्रण पर 17 मार्च 2021 कोलकाता से ढाका गए थे।

इस बीच, भारत को छोड़ सभी पांच बड़े देशों: अमेरिका , रूस , चीन , फ्रांस और ब्रिटेन के हुक्मरान नई सहस्त्राब्दि की नई महामारी के बावजूद कई बार विदेश यात्रा कर चुके हैं।पिछले बरस ही अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मोदी जी के आमंत्रण पर भारी लाव लश्कर लेकर भारत यात्रा पर आए थे।उन्होंने मोदी जी की व्यक्तिगत चाहत की पूर्ति के लिए गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के एक स्टेडियम में ‘नमस्ते ट्रंप ‘ नामक रैली को संबोधित किया था।

ट्रम्प जी को रैली के दौरान अहमदाबाद के निर्धन बाशिंदों की मलिन बस्तियां नहीं दिखे इसके लिए मोदी जी के चाटुकार अफसरों ने भारी खर्च से रातों-रात दीवार खड़ी कर उन बस्तियों को ‘ नजरबंद ‘कर दिया था। आरोप है कि गरीब लोगों को हजार–हजार रुपये देकर इस रैली में भीड़ जुटाई गई। आरोप यह भी है रैली में बड़ी संख्या में पहुंचे विदेशी मेहमानों का हवाई अड्डा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ ) और खुद भारत सरकार के के गाईडलाइन को धता बता कर एहतियातन बाध्यकारी कोई कोरोना टेस्ट नहीं किया गया। इसके परिणामस्वरूप अहमदाबाद में और वहाँ से हमारे पूरे देश में ये महामारी पसरी। अहमदाबाद में महामारी से संक्रमित सैंकड़ों लोग मरे जिनकी संख्या आदि के बारे में सरकार ने कोई ब्योरा नहीं दिया। उसके मंत्री से लेकर संतरी तक झूठा दावा करते रहे कि भारत में इस महामारी के लक्षण नहीं है और अगर कुछ है भी तो उस पर काबू पा लिया गया है।

ऐसा बिल्कुल नहीं कि मोदी जी को विदेश जाने का अब मन ही नहीं करता है। उनका उन देशों की सैर करने की गिनती की सेंचुरी लगाने का मन बहुत करता है।इसके लिये उनकी विदेश यात्रा के कुछ कार्यक्रम अमेरिका यात्रा से बने भी पर उनको मन मसोस कर अंतिम घड़ी में ये विदेश यात्राएं रद्द करनी पड़ गईं।

बोईंग बी 777

मोदी सरकार ने भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्राओ के लिये हाल में एयर इंडिया वन बेड़ा के लिये 8458 करोड़ रुपये के खर्च से जो दो विशेष बोईंग बी 777 जेट विमान खरीदे हैं वे बुधवार से पहले अमेरिका नहीं उड़ सके थे। इन विमान में मिसाइल डिफेंस सिस्टम- लार्ज एयरक्राफ्ट इन्फ्रारेड काउंटर मेजर और सेल्फ प्रोटेक्शन सूट्स की अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली भी लगी है। ( देखे फोटो )

अमेरिकी के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रम्प को परास्त करने वाले डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बायडन की इस पद पर आसीन होने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा में जून 2021 में यूरोप जाने के बारे में जनचौक के इसी स्तम्भ सीपी-कमेंट्री में हम जिक्र कर चुके हैं। अमेरिका से पहले मोदी जी की पिछली विदेश यात्रा 13 से 15 नवम्बर 2020 को हुई थी। वह ब्राजील में ‘ ब्रिक्स ‘ समूह देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने गये थे। ब्रिक्स उभरती राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के समूह के पांच सदस्य देशों : ब्राज़ील, रूस , भारत , चीन और दक्षिण अफ्रीका के अंग्रेज़ी नाम के प्रथमाक्षरों को मिलाकर गढा शब्द है जिसकी स्थापना 2009 में हुई थी।

कितना विदेश सैर ?


मोदी जी की विदेश यात्रा के बारे में सरकारी तौर पर जानकारी पिछली बार दिसम्बर 2018 में भारतीय संसद के निम्न सदन, लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई थी। उस आधिकारिक जानकारी के अनुसार वह बतौर प्रधानमंत्री तब तक 69 देश की यात्रा पर कुल 59 बार के विदेश चक्कर में 69 देशो की यात्रा कर चुके थे। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1929 में स्थापित राष्ट्र संघ के अभी कुल 193 सदस्य देश हैं। मोदी जी की इन विदेश यात्राओं पर 2156 करोड़ रुपये का खर्च आया था। उसके बाद उनकी विदेश यात्राओं पर सरकारी खजाना से जो खर्च हुए उसकी आधिकारिक जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं है। मोदी जी प्रधानमंत्री बन जाने के बाद हर बरस औसतन 10 बार विदेश जाते रहे हैं। उनकी विदेश यत्राओ पर औसत खर्च का हिसाब हर बरस चार अरब रुपये से कुछ ज्यादा है।

मनमोहन सिह की विदेश यात्रायें


मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के पहले केंद्रीय सत्ता में 2004 से 2014 तक कांग्रेस की अगुवाई में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ( यूपीए ) की सरकार के दौरान के भी अधिकृत आंकड़े उपलब्ध हैं। दस बरस प्रधानमंत्री रहे डाक्टर मनमोहन सिह 73 बार विदेश गये थे। वे 35 बार अपने शासन के पूर्वार्ध मे और 38 बार उत्तरार्ध में विदेश यात्रा पर गये थे। उन्होंने अपनी विदेश यात्राओं पर यूपीए सरकार के पहले 5 बरस में 1346 करोड़ रुपये और अंतिम 5 बरस में उससे कुछ कम खर्च किये थे। इनमें करीब तीन-तीन सौ करोड़ रुपये का विमान परिचालन खर्च भी शामिल है।

मोदी जी की ताजा अमेरिका यात्रा


तत्काल यह स्पष्ट नहीं है कि मोदी जी की इस ताजा अमेरिका यात्रा के खर्च का भारत के सरकारी खजाना को कितना भार सहन करना पड़ा। मोदी जी ने 3 दिन की इस यात्रा में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के पीएम योशीहिदे सुगा से भी आमने–सामने वार्ता की। उन्होंने 23 सितंबर को अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से भी बातचीत की, जो बिना लाग लपेट अपनी बातें कहने वाली भारतीय मूल की विवाहित महिला हैं।

इन सबके बाद ही ऊपर उल्लेखित वैश्विक सियासी महारथियों के साथ उनकी सामूहिक ‘ क्वाड लीडर्स ‘ शिखर बैठक हुई ।

इससे पहले बुधवार को मोदी जी ने कोरोना कोविड-19 महामारी से अर्थव्यवस्था पर पड़े बुरे असर की समस्या का समाधान निकालने की जरूरत व्यक्त कर वैश्विक समुदाय से टीकों के प्रमाणपत्र को पारस्परिक मान्यता देकर अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाने की अपील की। उन्होंने इस वैश्विक सम्मेलन को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर फरमाया कि भारत टीकों के उत्पादन की वर्तमान क्षमता को बढ़ा रहा है और इसके बाद वह अन्य देशों को टीकों की आपूर्ति बहाल करेगा।

इस सम्मेलन में डब्ल्यूएचओ की भारतीय मूल की प्रधान वैज्ञानिक, डाक्टर सौम्या स्वामीनाथन ने कोविड-19 निरोधक टीका उत्पादन और अपने-अपने सरप्लस उत्पादन का अन्य को आपूर्ति करने में सभी देशों से एकजुट होकर काम करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा, “ विभिन्न देशों के अलग –अलग होकर राष्टवादी दृष्टिकोण अपनाने से हम सब इस महामारी के शिकंजे से मुक्त नहीं हो सकेंगे। “

अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन की 24 सितंबर को स्टीफन काउलिनसन और कैटलीन हू की प्रसारित खबर के मुताबिक निर्धन देशों के 10 प्रतिशत से कम और अफ्रीकी देशों के 4 फीसद आबादी को ही अब तक टीके लग सके हैं।

व्हाइट हाउस


मोदी जी ने दो बरस बाद अपनी इस पहली अमेरिका यात्रा में 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ सर्वप्रथम पहली प्रत्यक्ष द्विपक्षीय वार्ता की जिसका पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। लेकिन समझा जाता है कि इसमें अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद वहां कट्टरपंथी तालिबान जमात के सैन्य नियंत्रण से वैश्विक सुरक्षा को उत्पन्न गंभीर स्थिति पर चर्चा हुई।

इस स्तंभकार के आम तौर पर विश्वसनीय राजनयिक सूत्रों के अनुसार जो बाइडेन प्रशासन को आशंका है कि भारत में झारखंड की जादूगोड़ा खदान से निकाली जाने वाली यूरेनियम का हिस्सा तस्करी से कहीं तालीबानियों के हाथ लग गया तो क्या होगा?

कोलकाता पुलिस द्वारा इस तरह की तस्करी में लिप्त कुछ लोगों को पकड़े जाने की खबर हड़बड़ गड़बड़ पालतू मीडिया ने दबा दी है। खुफिया एजेंसियों की अंदरूनी सूचना है हाल में मोदी जी के गृह राज्य गुजरात के कच्छ में उनके करीबी पूंजीपति गौतम अडानी के निजी स्वामित्व के से तीन टन अफगानी अफीम पकड़े जाने की खबर फैलने से पहले वहीं से 25 टन अफगानी अफीम बेरोकटोक गुजरात के विभिन्न जिलों और पड़ोस के पंजाब ही नहीं उत्तर प्रदेश तक पहुँच चुकी है, जहां कुछ माह बाद चुनाव होने हैं।

पूंजीवादी ब्रिटिश हुकूमत द्वारा पिछली सदी में चीन में छेड़े अफीम युद्द का विस्तृत ब्योरा मध्य प्रदेश के किसान नेता और लोकजतन के संपादक बादल सरोज के जनचौक पर हाल में प्रकाशित प्रामाणिक लेख में हैं।

इस स्तंभकार की इसी तरह अंग्रेजी में ‘ ओपियम वार इन न्यू इंडिया ‘ शीर्षक लिखी रिपोर्ट किसी अखबार और न्यूज पोर्टल ने छापने का अब तक साहस नहीं किया है। सवाल है जब तालिबानी सैन्य कब्जे के अफगानिस्तान से टनों-टन अफीम चुनाव में युवा मतदाताओं को प्रभावित करने हिंदुस्तान पहुँच सकता है तो भारत की खान से निकाले यूरेनियम की कोई खेप तस्करी से तालीबानियों तक क्यों नहीं पहुँच सकती है?

सोचिए, परमाणु हथियार बनाने में प्रयुक्त ये रेडियोधर्मी तत्व अगर किसी सिरफिरे तालीबानी वैज्ञानिक के हाथ लग गया तो क्या होगा ? मोदी जी के लिए ये सब नहीं सोचना शायद आरामदेह है पर लगभग एक ध्रुवीय सामरिक वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका, चीन समेत सभी परमाणु हथियार सम्पन्न महाशक्तियां और विश्व युद्ध में परमाणू बम के अमेरिकी हमले का निशाना बने जापान को भी ये सब सोचना ही होगा।

क्वाड


क्वाड , अमेरिकी अगुवाई में बने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन ( नाटो ) की तरह का कोई औपचारिक सैन्य संगठन नहीं है। लेकिन क्वाड देशों के संयुक्त रूप से सैन्य अभियान चलाने की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता हैं। इसकी कोई ठोस रणनीति सामने नहीं आई है।लेकिन स्पष्ट संकेत हैं कि अमेरिका इसका इस्तेमाल चीन की बढ़ती वैश्विक आर्थिक ताकत और अफगानिस्तान में उसके और रूस की संभावित जुगलबंदी के विरुद्ध करने के विकल्प को आजमाना चाहता हैं।
एक अपुष्ट प्रस्ताव ये भी है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा अध्यक्ष भारत के नेतृत्व में शांति सुरक्षा बल अफगानिस्तान में तैनात की जाए। भारत ने 1900 के दशक में कांग्रेस के दिवंगत राजीव गांधी सरकार और श्रीलंका में जयवर्धने के शासन काल में हुए समझौता के तहत उस देश में आतंकी लिबेरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम ( लिट्टे ) ही नहीं बल्कि अन्य वामपंथी विद्रोहियों और आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना की टुकड़ियों से बनाया इंडियन पीस कीपिंग फोर्स ( आईपीकेफ ) भेजा था। बाद में राजीव गांधी और जयवर्धने की भी आतंकयों ने हत्या कर दी।
राजनयिक हल्कों में माना जाता है राजीव गांधी और जयवर्धने ने श्रीलंका में आईपीकेफ भेजने के लिए जिस समझौता पर दस्तखत किये थे उसका मसौदा अमेरिका ने ही तैयार किया था। आईपीकेफ अभियान की खबरें देने के लिए इस स्तंभकार को भारतीय सेना से मध्य प्रदेश में इंदौर के पास मऊ में‘ वार करोसपोनडेंट कोर्स ‘ का मिले प्रशिक्षण के बारे में तत्काल खुलासा करना इस लेख में संभव नहीं है। पर उसे जनचौक न्यूज पोर्टल पर अनियतकालीन सीपी संस्मरण स्तम्भ में लिखने की कोशिश करेंगे।

मोदी जी ने अमेरिका की इस यात्रा का मिले अवसर का फायदा उठा कर गुरुवार को पांच बड़ी कंपनियों- क्वालकॉम , एडोब , फर्स्ट सोलर, जनरल एटॉमिक्स और ब्लैकस्टोन के आला अफसरों यानि सीईओ से मुलाकात की। वह उसी दिन भारतीय समय के अनुसार पूर्वाह्न करीब 11 बजे विलार्ड होटल में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से मिलने के बाद करीब 12:30 बजे अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मिलने आइजनहावर एक्जक्यूटिव ऑफिस गए।

शनिवार को मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76 वें सत्र को संबोधित किया ।

स्वागत

मोदी जी की प्रशस्ति में भारत की ‘ हड़बड़ गड़बड़ मीडिया ‘ ने खबर प्रचारित कर दी कि उनके बुधवार को भारतीय समयानुसार तड़के करीब 3.30 बजे वाशिंगटन पहुंचने पर वहां के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में उपस्थित भारतीयों ने किया स्वागत किया। मोदी जब इस रिपोर्ट मे पहले वर्णित नए विमान से एयरपोर्ट पर उतरे तो वहां मौजूद भारतीयों ने तिरंगा लहराकर जोरदार स्वागत किया। लोग मोदी-मोदी चिल्ला रहे थे। एयरबेस से मोदी जी का लस्कर पेन्सिलवेनिया एवेन्यू स्थित होटल विलार्ड गया।
खुद मोदी जी ने अपने ट्वीट में शेखी बघार लिखा : गर्मजोशी से स्वागत के लिए मैं भारतीय समुदाय का आभारी हूं। हमारे प्रवासी हमारी ताकत है। यह प्रशंसनीय है कि कैसे भारतीय लोगों ने दुनिया भर में खुद को प्रतिष्ठित किया है। अमेरिका पहुंचने से पहले मोदी जी ने अपने भक्त और अन्य को रिझाने इस नए विमान के भीतर की साज सज्जा की क्लिक सार्वजनिक की। इसे देख लोगों को लग सकता है वह फाइलों के अंबार का गहन अवलोकन कर रहे हैं। मोदी जी ने फ़ोटो दिखा ट्वीट में लिखा, ‘ लंबी उड़ान का मतलब पेपर्स और कुछ फाइल वर्क देखने–करने का अवसर।’

गौरतलब है आज तक न्यूज चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप के एक शो में मोदी जी की अमेरिका यात्रा के दौरान प्रकाशित वहाँ के जो अखबार प्रदर्शित किये गए उनमें खुद उन्हें मोदी जी का जिक्र ढूँढे नहीं मिल पाया। इस वाकये का वीडियो किसी आम हिन्दुस्तानी ने यूट्यूब पर अपलोड कर दिया है। बिहार के 2016 के चुनाव में इन एंकरानी जी ने मोदी जी भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) के प्रतिकूल खबर मिलने के दौरान अपना नाम खुद , गलती से ही सही ‘ अंजना मोदी कश्यप ‘ कह डाला था। ये गलती उनकी मोदी भक्ति का अकाट्य प्रमाण है, जिसके वीडियो लिंक यूट्यूब पर है।

नई दिल्ली से 22 सितंबर पूर्वाह्न 11 बजे अमेरिका रवाना होने से पहले मोदी जी ने 22 से 25 सितंबर की इस यात्रा के इरादे जगजाहिर कर अपने ट्वीट में लिखा ‘ राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करूंगा और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करूंगा। वह भारतीय समय के अनुसार अगले दिन पूर्वाह्न तीन बजकर 30 मिनट पर अमेरिका पहुंचे। मोदी ने अपनी अमेरिकी यात्रा की और जानकारी देने के लिए ट्वीट में ये भी लिखा कि वह राष्ट्रपति बाइडेन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा से मिलने के अलावा क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे जों हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के तटवर्ती क्षेत्र के लिए साझा दृष्टिकोण के आधार पर भविष्य की प्राथमिकताओं की पहचान करने का अवसर प्रदान करेगा । ‘

एक हिन्दी दैनिक , नवभारत टाइम्स ने मोदी जी को मस्का लगाने पूरा लेख ही लिख दिया कि वह लंबी दूरी की फ्लाइट में क्या क्या करते हैं। इस अखबार की ‘ खबर ‘ है : स्वयं मोदी ने लिखा है कि फ्लाइट लंबी दूरी की हो तो वह उस समय का इस्तेमाल अपने कागजी काम पूरा करने के लिए करते हैं।

पर्सनल और डिप्लोमेटिक वीसा का चक्कर

गुजरात में मोदी जी के मुख्यमंत्री काल में फरवरी 2002 के गोधरा साम्प्रदायिक दंगों में बड़े पैमाने पर हुए नरसंहार के प्रति अमेरिकी सांसदों के प्रतिरोध के मद्देनजर उन्हे अमेरिकी घुसने के लिए ‘ पर्सनल वीसा‘ जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। तब जो बाइडेन , अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के उपराष्ट्रपति थे।

लेकिन मोदी जी को 2014 में भारत का प्रधानमंत्री बन जाने के बाद अमेरिकी ‘ डिप्लोमेटिक वीसा ‘ की सुविधा प्रदान कर दी गई है। बाइडेन प्रशासन ने स्पष्ट नहीं किया है कि मोदी जी को ‘ पर्सनल वीसा ‘ जारी करने पर लगी रोक बरकरार रहेगी या फिर वह बंदिश हटा ली जायेगी।

इस स्तम्भकार के वाशिंटन डीसी के जानकार एक राजनयिक सूत्र के मुताबिक जो बाइडेन भूले नहीं हैं कि मोदी जी ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रम्प के लिये खुद प्रचार करने अमेरिका जाकर ‘ अबकी बार ट्रम्प सरकार ‘ का नारा भी लगाया था। ‘ डिप्लोमेटिक वीसा ‘ धारी व्यक्ति के अमेरिका की सियासत में खुली दखलअंदाजी का ये गम्भीर मामला मोदी जी के लिये अमेरिकी अदालतों में मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

(सीपी झा वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

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