Sunday, October 24, 2021

Add News

मॉब लिंचिंग राज बन गया है मोदी-योगी-शिव ‘राज’

ज़रूर पढ़े

मोदीराज के कथित रामराज में सत्ता प्रायोजित गुंडों द्वारा अल्पसंख्यकों और दलितों की हत्या करने की होड़ लगी हुई है। विभिन्न संस्थाओं द्वारा जुटाए गए कुछ आंकड़ों के अनुसार सन् 2014 से 2018 तक के सिर्फ 5 साल के मोदी राज गोरक्षा और गोमांस रखने के कथित अपराध के मामले में गरीब लोगों, दलितों और मुसलमानों पर संगठित गुंडों द्वारा हमला करके 85 मामले दर्ज हुए, जिनमें 34 लोगों को लोहे के सरियों, लाठी, डंडों और घातक हथियारों से बुरी तरह पीट-पीटकर मार डाला गया और 274 लोगों को इतना मारा गया कि वे लोग अधमरे होकर आजीवन विकलांग हो गए। दुःखद रूप से उक्त वर्णित मरे और घायल लोगों में 50 प्रतिशत गरीब मुसलमान हैं।

इस प्रकार प्रायोजित तरीके से संगठित गुंडों के गिरोहों द्वारा सत्ता के वर्तमान दौर के कर्णधारों के गुप्त इशारों पर मारे गए कुकर्म को अंग्रेजी में मॉब लिंचिग कहते हैं। इसी प्रकार पिछले दस सालों में बलात्कार के मामले में 44 प्रतिशत की अप्रत्याशित और हतप्रभ करने वाली वृद्धि हुई है, उदाहरणार्थ सन् 2019 में केवल एक साल में 32033 बलात्कार मतलब 88 बलात्कार प्रतिदिन या हर दो मिनट में 7 बलात्कार के केस दर्ज हुए। इसमें दलित लड़कियों या महिलाओं की 11 प्रतिशत संख्या थी, एक साल में उत्तर प्रदेश में 3065 और राजस्थान में लगभग 6000 बलात्कार के मामले दर्ज किए गये। जबकि इन मामलों में 2 प्रतिशत बलात्कारियों व हत्यारों को सजा नहीं दी गई।  कितना दुःख और अफसोस है कि इतनी निर्मम हत्याओं पर एक शब्द अफसोस के या दुःख के न बोलकर तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मुद्दे को नजरंदाज करते हुए यह बेशर्म बयान दे दिया कि ‘सबसे बड़ी मॉब लिंचिग 1984 में हुई थी ‘

मोदीजी और उनके सबसे प्रिय और सबसे प्रमुख सिपहसालार उत्तर प्रदेश के एक मंदिर के पुजारी से मुख्यमंत्री बने कथित योगी आदित्यनाथ दोनों ये कहते नहीं थकते कि ‘पूरे देश में हम राम राज्य ला देंगे, विकास ला देंगे! ‘विकास तो देश की जनता अपनी आँखों से नित्य-प्रतिदिन देख ही रही है, ये अलग बात है कि विकास दूर-दूर तक कहीं दिखाई ही नहीं दे रहा है,हाँ विकास के नाम पर इस देश में सर्वत्र बेरोजगारी, भुखमरी,कुपोषण,आत्महत्या,  अशिक्षा, दरिद्रता आदि का बढ़ता साम्राज्य जरूर दिखाई दे रहा है। जहाँ तक रामराज्य लाने की बात है,पौराणिक पुस्तकों और कथाओं के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के समय के शासन व्यवस्था के बारे में कहा जाता है कि उनके राज्य में ‘बाघ और बकरी दोनों एक घाट पर पानी पीते थे। ‘इसका आशय यह है कि राम का राज्य हर तरह से समदर्शी और न्यायप्रिय था,आमतौर पर प्रजा का जीवन खुशहाल था,वहाँ के हर नर-नारी, किसान,मजदूर,आमजन आदि सभी लोग सुखी और संतुष्ट थे। सुखद आश्चर्य और विस्मय की बात यह है कि श्रीराम के दुश्मन राज्य लंका में भी औरतें कितनी सुरक्षित थीं, इसका उदाहरण रामायण में ही वर्णित है कि लंकापति रावण भी जगदजननी माता सीता को अपनी बहन के अपमान करने के प्रतिशोधस्वरूप अपहरण करके जरूर ले गया था, लेकिन जगदजननी माता सीता को अपने महल से दूर अशोक वाटिका में ससम्मान स्त्री पहरेदारों की सुरक्षा में बिल्कुल सुरक्षित और सम्मान से रखा था।

रामायण के अनुसार लंका प्रवास के दौरान बंदी अवस्था में रहते हुए लंकापति रावण जगदजननी माता सीता का स्पर्श मात्र तक भी नहीं किया था ! त्रेतायुग में कथित राक्षसों के राज्य में इतनी पवित्रता !,इतनी शीलता !,इतनी नैतिकता ! जरा सोचिए वर्तमान समय के भारतीय समाज में जिस राज्य लंका की अक्सर जबरदस्त आलोचना की जाती रही है, परन्तु उस आलोच्य राज्य की गरिमा और मर्यादा की प्रशंसा तो करनी ही पड़ेगी, क्योंकि उसका अधिपति रावण अपने दुश्मन की पत्नी तक को भी पूरी इज्जत और मर्यादा से रखा। इससे कल्पना की जा सकती है कि उस दौर में मर्यादापुरुषोत्तम राम के शासन व्यवस्था की नजीर देने वाले राज्य में नैतिकता के मापदंड की सीमा क्या रही होगी। कहने का तात्पर्य यह है कि रामराज्य में बेटियों की आबरू और इज्जत भी पूर्णतः सुरक्षित रही होगी, क्योंकि रामायण में इस प्रकार का कोई उदाहरण या प्रसंग नहीं है, जिससे यह पता चलता हो कि रामराज्य में मर्यादापुरुषोत्तम राम का कोई मंत्री,अधिकारी या सामंत किसी महिला स्त्री पर बुरी दृष्टि डाली हो,उनसे कभी कदाचार किया हो,जिससे क्रुद्ध होकर अयोध्या के प्रजावत्सल श्रीराम उसे सजा के तौर पर कठोरतम् दंड दिए हों।

अब रामराज्य के हसीन सपने दिखाकर सत्ता में आने वाले मोदी सरकार की शासन व्यवस्था की उक्तवर्णित श्रीराम के शासनव्यवस्था से तुलना करते हैं। आज मोदी शासन में देश की समूची आवाम मोदी सरकार की जनविरोधी व गलत नीतियों से पूरी तरह त्रस्त और परेशान है,किसान अपनी फसलों की जायज कीमत न मिलने से हर साल कर्ज में डूबा जा रहा है,जिससे वह खुदकुशी तक करने को बाध्य है, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार पिछले 20 सालों से अब तक लगभग 4 लाख से भी अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं,राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्तमान समय में किसानों की आत्महत्या की दर पिछले कांग्रेसी शासन से डेढ़ गुनी गति से और अधिक बढ़ गई है। इसी प्रकार लगभग इसी गति और दर से बेरोजगारी से त्रस्त युवा और विद्यार्थी आत्महत्या कर रहे हैं, बेरोजगारी का आलम यह है कि पिछले 44 सालों में बेरोजगारी की दर अपने सर्वोच्च स्थान पर है। दवा के अभाव में यहाँ हर साल हजारों नवजात शिशुओं की दुःखद मौत हो जा रही है, यहाँ पेट्रोल, डीजल की कीमतें पड़ोसी, गरीब और छोटे देशों से भी सबसे ज्यादा है, इसलिए महंगाई अपने चरम पर है, दक्षिण एशियाई देशों में रसोई गैस की कीमत भी भारत में सबसे ज्यादा है।

यहां गरीबी और भुखमरी की हालत यह है कि सरकारी आँकड़ों के अनुसार 19 करोड़ 20 लाख लोग भूखे पेट रात को सो जाने को अभिशापित हैं,पूरा देश उक्तवर्णित समस्याओं से ग्रस्त होकर त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा है। पिछले 9 महीनों से यहाँ के अन्नदाता अपने न्यायोचित मांग के लिए दिल्ली आने से उसकी चारों सीमाओं पर ही बैरिकेडिंग करके, कंटीले तार लगाकर, सड़कों पर खाईं खोदकर, कील ठोककर रोक दिए गए हैं, जिससे अब तक 500 से ज्यादा किसानों की दुःखद मौत हो चुकी है। सबसे दुःख, हतप्रभ और विस्मय की बात यह है कि इतने किसानों की मौत होने के बाद भी उनकी सहानुभूति में भारत के वर्तमान शासक के मुँह से अभी तक एक शब्द तक नहीं निकला है। क्रूरता की हद ये भी कि सम्पूर्ण देश में इतनी भयावह व दारूण स्थिति के बावजूद यहाँ का शासक अपने लिए सभी ऐशोआराम से सज्जित 84 अरब रूपयों के विमान को अभी हाल ही में खरीदा है। और अपने लिए उच्चस्तरीय, विलासितापूर्ण आवासीय महल बनवा रहा है।

अब वर्तमान समय के मोदी के कथित रामराज्य में महिलाओं, स्त्रियों और बेटियों की दारूण हालत पर थोड़ा सा दृष्टिपात कर लें। यहां महिलाओं, दलित स्त्रियों और बेटियों की इज्जत और आबरू बिल्कुल असुरक्षित होकर रह गया है समूचे देश से समाचार माध्यमों में प्रतिदिन महिलाओं के साथ बलात्कार और उनकी हत्या की दुःखद व दिल दहला देने वाली खबरें आ रहीं हैं, कठुआ, जम्मू, उन्नाव, रायबरेली, बदायूं, बाराबंकी, हाथरस, अलीगढ़ आदि हर जगह से ऐसी खबरें लगातार आ रहीं हैं, जहां महिलाओं से सत्तारूढ़ सरकार के कर्णधारों के संरक्षण में पल रहे गुंडे ऐसे जघन्यतम् अपराधों को खुलेआम अंजाम दे रहे हैं। सबसे दुःख की बात यह भी है कि महिलाओं से बलात्कार और हत्या के मामले में सत्तारुढ़ सरकार के विधायक और सांसद सीधे-सीधे संलिप्त हैं। अभी-अभी सूचना माध्यमों से आई खबरों के अनुसार कर्नाटक में सत्तारूढ़ बीजेपी के राज्य सरकार में एक मंत्री एक युवती को नौकरी देने का लालच देकर पिछले काफी दिनों से उसके साथ व्यभिचार कर रहा था, मामला किसी तरह खुलकर बाहर आ गया, अब वह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन वर्तमान समय के ये भ्रष्ट और चरित्रहीन नेता जनता को प्रायः सदाचार का पाठ पढ़ाते नहीं थकते, तो क्या उस महिला युवती से अवैध शारीरिक कदाचार करने वाला मंत्री केवल इस्तीफा दे देने से अपराध मुक्त हो गया ?

इसे तो कठोरतम् दंड मिलनी ही चाहिए, बेशर्मी की हद ये कि इन बलात्कारी विधायकों और साँसदों को कठोरतम् दंड देने के बजाय सत्तारूढ़ सरकार के प्रवक्ता व मुख्यमंत्री उनका बेशर्म बचाव कर रहे हैं। यही कुकर्म अगर कोई गरीब के सिर आता तो उसको फाँसी निश्चित तौर पर दे दी जाती। कुछ सालों पूर्व कोलकाता में एक गरीब व्यक्ति धनंन्जय चटर्जी को केवल बलात्कार के मामले में फाँसी पर लटका दिया गया,जबकि व अपनी बेगुनाही को साबित करने के लिए अपनी गरीबी को कोसता रहा कि अगर हम पैसे वाले होते तो हम भी महंगे वकीलों को फीस देकर अपनी बेगुनाही साबित करके फाँसी पर लटकने से जरूर बच जाते। और इस देश के न्यायव्यवस्था की यही सच्चाई भी है,सदा से और वर्तमान समय में भी पैसे के बल पर कोई भी अमीर व्यक्ति अपने को बेगुनाह साबित कर जेल जाने और फाँसी पर लटकने से साफ बच जाता है।

अभी हाल ही में हाथरस से एक दुःखद खबर आई है कि अपनी लड़की से छेड़खानी करने वाले कुछ गुँडों के खिलाफ पुलिस में मुकदमे दर्ज कराने और अपनी सुरक्षा की गुहार लगाने वाले पिता को पुलिस संरक्षण तो नहीं दे पाई,लेकिन छेड़खानी करने वाले गुँडों ने उक्त लड़की और उसकी माँ की आँखों के सामने ही उसके बाप की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी। यक्ष प्रश्न है मोदी और योगी के कथित रामराज्य में पुलिस वाले सुरक्षा की गुहार लगाने वाले को सुरक्षा न देकर इस बात का इंतजार क्यों करते हैं,कि अपराधी तत्व उस व्यक्ति की हत्या कर दें, तब एक जाँच कमेटी गठित कर दी जाय। आखिर पुलिस की क्या ड्यूटी है ? योगी एक उच्च समिति गठित करके क्या हासिल कर लेंगे ? वे छेड़खानी करने वाले गुँडे उस लड़की के बाप की हत्या कर दिए,तो अब जाँच कमेटी बैठाने का क्या औचित्य है, उस व्यक्ति के जीवन को तो वापस नहीं लाया जा सकता और उसकी लड़की के सिर से अपने बाप की छत्रछाया और सुरक्षा भी छिन गई। अब वह लड़की इस क्रूर और वहशी समाज में और भी बेबस,असहाय और निराश्रित होकर रह गई। अब तो उन हत्यारों के साथ उन पुलिस वालों के भी खिलाफ मुकदमे चलाकर कठोरतम् दंड मिलनी ही चाहिए, जो सूचना देने के बाद भी लड़की के बाप की समुचित सुरक्षा नहीं दे पाए,हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे,जब तक कि छेड़खानी करने वाले गुंडे और हत्यारे उस लड़की के बाप की सरेआम नृशंषतम् हत्या नहीं कर दिए। लेकिन इस भ्रष्ट व्यवस्था में बहुत कम उम्मीद है कि उन हत्यारों और पुलिस वालों को उनके अपराध के समानुपातिक कठोर सजा मिलेगी।

अब यक्षप्रश्न है कि इस प्रश्न का उत्तर किसी के पास नहीं है कि मॉब लिंचिग या हत्या करने वाली भीड़ को इकट्ठी कौन करता है ? उन गुँडों,मवालियों और दरिंदों को इस कुकृत्य को करने को उकसाता और भड़काता कौन है ? हकीकत यह है कि इसका जवाब हम सब जानते हैं, लेकिन उस सच बात को कहने से सभी परहेज़ करते हैं, सभी मुर्दे जैसे चुप हैं। इस देश में पुलिस, अदालतें और इंसाफ आदि सभी कुछ, कुछ संगठित गुँडों के गिरोहों के हाथ बंधक बनकर रह गया है। अब तो इस पूरे देश में, हत्या, आगजनी और बलात्कार का खुला ताँडव हो रहा है। और इन सभी कुकृत्यों को करने वाले मॉफियाओं, हत्यारों पर वर्तमान दौर के सत्ता के कर्णधारों का पूर्णतः मौन समर्थन और आशीर्वाद है,इसीलिए इन गुँडों,मवालियों और हत्यारों को कभी सजा नहीं मिलती और ये गुँडे मदमस्त साँड़ की तरह अगले दिनों में और भयावहतम् दरिंदगी करने की मिसाल कायम करते जाने की हिम्मत करते चले जाते हैं।

(निर्मल कुमार शर्मा पर्यावरणविद हैं और आजकल गाजियाबाद में रहते हैं।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

कोविड काल के दौरान बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति का हुआ बड़े स्तर पर ह्रास

कोविड काल में बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति का काफी बड़ा नुकसान हुआ है। इसका खुलासा ज्ञान विज्ञान समिति...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -