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Monday, September 20, 2021

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मोदी के बयान से खुला विवादों का पिटारा, जवान गलवान घाटी में शहीद क्यों हुए ?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन तनाव पर शुक्रवार 20 जून को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में दावा किया कि न कोई हमारे क्षेत्र में घुसा और न ही किसी ने हमारी चौकी पर कब्जा किया है। लेकिन इससे विवादों का पिटारा खुल गया है और जहां सेना के पूर्व अधिकारी प्रधानमंत्री के दावे को झुठलाने वाले बयान दाग रहे हैं वहीं विपक्ष यानि कांग्रेस ने ऐसे तीखे सवाल पूछे हैं जिसका जवाब अभी तक मोदी सरकार ने नहीं दिया है और इसे भी राष्ट्रवाद की अस्मिता से जोड़ने की कोशिश भक्त ब्रिगेड से कराने की कोशिश शुरू हो गयी है।

चीन के मामले में दक्षिणपंथी वामदलों को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करते रहे हैं लेकिन सीपीआई (एम) ने तो अपना स्टैंड साफ कर दिया है। माकपा के सचिव सीताराम येचुरी ने मोदी सरकार से पूछा है कि अगर सीमा पर कोई विवाद नहीं है तो हमारे जवान गलवान घाटी में शहीद क्यों हुए? अगर ऐसा नहीं है तो सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई गई थी? क्या हमारे सैनिकों की जान बचाई जा सकती थी? खामियों, खुफिया नाकामियों आदि पर अनेक सवाल उठे हैं। करगिल के बाद वाजपेयी सरकार ने खामियों का पता लगाने तथा सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए सुझाव देने के लिहाज से के सुब्रमण्यम समिति बनाई थी। क्या इस तरह का कोई विचार है?

इसके विपरीत मोदी सरकार ने अभी तक कोई साफ स्टैंड नहीं लिया है और चीन से आयात,चीनी कम्पनियों के निवेश, चीनी सामानों के बहिष्कार पर कोई साफ फैसला या निति सामने नहीं आई है।आरोप है कि इससे विशेष रूप से सरकार के नजदीकी गुजराती कारोबारियों को भरी नुकसान होगा।

गालवान घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई हिंसा को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बात फिर पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला हैं। राहुल गांधी ने मोदी सरकार से सवाल पूछते हुए ट्वीट किया है कि प्रधानमंत्री ने भारतीय क्षेत्र को चीन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। अगर जमीन चीन की थी तो हमारे जवान क्यों मारे गए। उन्हें किस जगह मारा गया। राहुल गांधी ने यह ट्वीट पीएम नरेंद्र मोदी के उस बयान के बाद दिया है, जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि न वहां (गालवान घाटी) कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है। आज हमारे पास ये कैपेबिलिटी है कि कोई भी हमारी एक इंच जमीन की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देख सकता है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर शनिवार को सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री ने चीन को क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने ट्वीट किया किप्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सीमा में कोई विदेशी (मतलब चीनी) नहीं है। अगर यह सही है तो पांच-छह मई को क्या हुआ? पिछले दिनों दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष क्यों हुआ? भारत ने अपने 20 जवानों क्यों खोए?”

पूर्व गृह मंत्री ने यह सवाल भी किया कि अगर चीनी सैनिकों ने कोई घुसपैठ नहीं की है तो फिर छह जून को कोर कमांडर स्तर की बैठक क्यों हुई थी? क्या यह बैठक मौसम के बारे में हुई थी? अगर कोई चीनी सैनिक ने एलएसी पार नहीं किया तो फिर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान में पूर्व यथास्थिति की बहाली की बात क्यों हुई?”उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री ने चीन को क्लिन चिट दिया है? अगर ऐसा है तो फिर चीन से बातचीत क्यों? मेजर जनरल बातचीत क्यों कर रहे हैं और किस बारे में बात कर रहे हैं?

सरकार से सर्वदलीय बैठक में सोनिया गांधी ने सात सवाल पूछे

  • चीनी सेनाओं ने लद्दाख में हमारे क्षेत्र में किस तारीख को घुसपैठ की?
  • सरकार को हमारे क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के बारे कब जानकारी हुई?
  • खबरों की मानें तो घुसपैठ 5 मई को हुई, क्या यह सही है या फिर घुसपैठ उसके बाद हुई?
  • क्या सरकार को नियमित रूप से हमारे देश की सीमाओं की सैटेलाइट तस्वीरें नहीं मिलती हैं?
  • क्या हमारी खुफिया एजेंसियों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर घुसपैठ की जानकारी नहीं दी?
  • क्या सेना की इंटेलिजेंस ने सरकार को एलएसी पर चीनी कब्जे और भारतीय क्षेत्र में चीनी सेना की मौजूदगी के बारे में सचेत नहीं किया?
  • क्या सरकार यह स्वीकार करेगी कि यह खुफिया तंत्र की विफलता है?

सर्वदलीय बैठक में सोनिया गांधी ने पूछा, क्या खुफिया तंत्र फेल रहा, सरकार ने कहा, नहीं, यह खुफिया विफलता नहीं।सोनिया गांधी ने सवाल पूछा था कि क्या चीनी सैनिकों के धोखे को भांपने में हमारा खुफिया तंत्र नाकाम रहा? इस पर राजनाथ सिंह ने जवाब दिया, नहीं। कोई खुफिया विफलता नहीं थी। वहीं बाकी सवालों पर पीएम मोदी ने जवाब दिया।पीएम मोदी ने विपक्ष के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि न तो उन्होंने (चीन) हमारी सीमा में घुसपैठ की है, न ही उनके द्वारा (चीन) किसी पोस्ट पर कब्जा किया गया। हमारे 20 जवान शहीद हो गए। जिन लोगों ने भारत मां की तरफ आंख उठाकर देखा, उन्हें हमारे सैनिक सबक सिखा गए। आज हमारे पास यह क्षमता है कि कोई भी हमारी जमीन के एक इंच हिस्से को भी नहीं ले सकता है। भारत के सशस्त्र बलों में एक बार में कई क्षेत्रों में जाने की क्षमता है।चाहे वह तैनाती, कार्रवाई, जवाबी कार्रवाई हो … हवाई, जमीन या समुद्र, हमारे देश की रक्षा के लिए हमारे सशस्त्र बलों को जो कुछ भी करना है, वे करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अपनी सीमाओं की रक्षा करने के लिए हमने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे के विकास को महत्व दिया है। हमारे सशस्त्र बलों की आवश्यकताएं चाहे वह लड़ाकू विमान हों, उन्नत हेलीकॉप्टर, मिसाइल रक्षा प्रणालियां हों, उन्हें महत्व दिया जा रहा है।अब तक जिन लोगों से कभी पूछताछ नहीं की गई या उन्हें रोका नहीं गया। अब हमारे जवान उन्हें रोकते हैं और उन्हें कई क्षेत्रों में चेतावनी देते हैं।पहले जिन क्षेत्रों की निगरानी नहीं की गई थी, वहां भी हमारे जवान अब निगरानी करने और एक्शन लेने में सक्षम हैं।जवान सीमा पर चट्टान की तरह खड़े हैं। चीन ने जो किया, उससे पूरा देश आक्रोशित है, आहत है।मैं आपको आश्वस्त कर रहा हूं, हमारी सेना देश की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

पीएम मोदी ने कहा कि चीन के साथ कूटनीतिक बात भी जारी है। देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर निर्माण कार्य जारी। सेना को उचित कार्रवाई के लिए खुली छूट दी गई है। पेट्रोलिंग बढ़ने से सतर्कता बढ़ी है। सेना एक साथ मूवमेंट में सक्षम है। दुनिया को जो संदेश जाना चाहिए वो पहुंचेगा। डिप्लोमैटिक जरियों से भी चीन को अपनी बात दो टूक स्पष्ट कर दी है।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ट्विटर पर सवाल पूछा कि अगर चीन सीमा पर घुसपैठ नहीं हुई है तो बातचीत किस बारे में चल रही है? उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि क्या गलवान घाटी पर भारत ने अपना दावा छोड़ दिया? अगर चीन ने हमारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा ही नही किया तो चीन वार्ता किस विषय में चल रही है? अगर क़ब्ज़ा नही तो 2.5 किमी चीन पीछे कहां से गया? हमारे 20 जवानो ने अपनी धरती आजाद कराने के लिये अपने प्राणों का बलिदान दिया, बीजेपी कह रही आल इज वेल।

एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी पीएम मोदी की चुप्पी को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस वक्त मोदी सरकार अपनी विश्वसनीयता खोती जा रही है और चीन के स्टैंड को ही अपना रही है।ये इंटरनेशनल कम्युनिटी के लिए भी एक गलत संदेश है।

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