Sunday, October 24, 2021

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बार एसोसिएशन के चुनावों को हाइजैक करने की अनुमति किसी को नहीं

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उच्चतम न्यायालय के जस्टिस एमआर शाह और एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा है कि जो बाहरी लोग संबंधित अदालत के समक्ष नियमित रूप से प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं उन्हें बार एसोसिएशन की चुनाव प्रक्रिया में भाग लेकर सिस्टम को हाईजैक करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। बार एसोसिएशन के चुनावों में केवल संबंधित अदालत के समक्ष प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को ही भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।

पीठ ने माना है कि केवल संबंधित अदालत के समक्ष वास्तविक और नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाले वकीलों को ही ऐसी अदालत के बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चुनाव में मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए। पीठ ने कहा कि बाहरी लोग जो संबंधित अदालत के समक्ष नियमित रूप से प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं, उन्हें बार एसोसिएशन के सदस्यों की चुनाव प्रक्रिया में भाग लेकर सिस्टम को हाईजैक करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

आदेश में कहा गया है कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को वास्तविक मतदाताओं और उच्च न्यायालय और/या संबंधित न्यायालय में नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं द्वारा चुना जाना है। पीठ 14 अगस्त को अवध बार एसोसिएशन में कुछ वकीलों द्वारा हिंसक और अनियंत्रित व्यवहार की घटनाओं से उत्पन्न एक स्वत: संज्ञान मामले में पारित इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के आदेशों के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने चुनाव रद्द कर दिया था और नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया था।

पीठ ने कहा कि जिस तरह से वकीलों ने 14 अगस्त, 2021 को उच्च न्यायालय के परिसर में अवध बार एसोसिएशन का चुनाव चल रहा था, उस पर काम किया और दुर्व्यवहार किया, इसे बर्दाश्त और स्वीकार नहीं किया जा सकता है और इसे बहिष्कृत किया जाना चाहिए। पीठ ने आर. मुथुकृष्णन बनाम रजिस्ट्रार जनरल, मद्रास में उच्च न्यायालय के न्यायिक मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी चर्चा की, जिसमें बार के महत्व और न्याय वितरण प्रणाली के प्रशासन में उनकी भूमिका को दोहराया गया था।

सुपरटेक ने विध्वंस को एक टावर तक सीमित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

रियल एस्टेट कंपनी, सुपरटेक लिमिटेड ने उच्चतम न्यायालय के 31 अगस्त के फैसले में संशोधन की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय में आवेदन दाखिल किया है, जिसके द्वारा कोर्ट ने नोएडा में सुपरटेक के एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट की 40 मंजिला ट्विन टॉवर बिल्डिंग को गिराने का निर्देश दिया था।अपने आवेदन में, सुपरटेक ने प्रार्थना की है कि फैसले को इस तरह संशोधित किया जाए कि दो टावरों में से केवल एक को ध्वस्त किया जाए जबकि दूसरे को यथावत रखा जाए। ऐसा इसलिए है क्योंकि टावरों में से एक, टी 17 को ध्वस्त करने से न्यूनतम दूरी की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय भवन कोड का अनुपालन सुनिश्चित होगा।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच ने 31 अगस्त के अपने फैसले में आदेश दिया था कि दो टावरों को गिराने का काम तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए और बिल्डर को इसका खर्च वहन करना होगा।कोर्ट ने आदेश दिया था कि ट्विन टावरों के सभी फ्लैट मालिकों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ प्रतिपूर्ति की जाए।फैसले में टावर टी-16 और टी17 को गिराने का आदेश दिया था।

सुपरटेक ने कहा है कि यह 31 अगस्त के फैसले की वैधता या सार को चुनौती नहीं दे रहा है बल्कि करोड़ों रुपये बचाने के लिए केवल संशोधन चाहता है।यह तर्क दिया गया है कि अकेले टी 17 को ध्वस्त करके, किसी अन्य भवन से न्यूनतम दूरी की आवश्यकता, टी 1 को प्राप्त किया जा सकता है। टी 16 को बरकरार रखा जा सकता है क्योंकि यह पहले से ही T1 से 43 मीटर की दूरी पर है और यह अवैध नहीं है।डेवलपर ने कहा है है कि वह टी 17 के ध्वस्त स्थल पर एक ग्रीन ज़ोन स्थापित करेगा और टी 16 में उन सभी को फ्लैट आवंटित करेगा जिन्होंने अभी भी अपना आवंटन वापस नहीं लिया है।इसने एक अंतरिम उपाय के माध्यम से मामले की सुनवाई और शीर्ष अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने तक पूरे विध्वंस अभ्यास पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है।

नीट एग्जाम कैंसल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार

उच्चतम न्यायालय में कुछ स्टूडेंट्स की ओर से अर्जी दाखिल कर नीट यूजी 2021 एग्जाम कैंसल करने की गुहार लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि 12 सितंबर को हुए नीट अंडर ग्रेजुएट 2021 एग्जाम के पेपर लीक हुए हैं और उसमें कुछ कोचिंग इंस्टीट्यूट की मिलीभगत है। ऐसे में मेरिट वाले स्टूडेंट्स के हित को प्रोटेक्ट करने के लिए एग्जाम कैंसल किया जाए और दोबारा एग्जाम लिया जाए। नीट यूजी2021 के जरिए मेडिकल कोर्स में दाखिला होता है।

देश भर के आवेदकों की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि नीट यूजी 2021 एग्जाम 12 सितंबर को आयोजित किया गया था। इसके पेपर लीक हुए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ कोचिंग संस्थानों की साजिश और मिलीभगत है। इस मामले में पेपर कैंसल किया जाए क्योंकि इससे मेरिट वाले स्टूडेंट्स के हित प्रभावित हो रहे हैं और उसे प्रोटेक्ट किया जाना चाहिए और दोबारा एग्जाम लिया जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट ममता शर्मा ने कहा कि नीट एग्जाम के दिन सीबीआई ने केस दर्ज किया और चार लोगों को गिरफ्तार किया। साथ ही अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। कहा गया है कि एग्जाम में हेरफेर किया गया और कुछ कैंडिडेट के बदले अन्य को प्रॉक्सी बनाया गया। इसके लिए कोचिंग संस्थानों ने प्रति कैंडिडेट 50 लाख रुपये चार्ज किए थे। सीबीआई द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज किया जाना यह दर्शाता है कि पेपर लीक हुआ है।

सुराज इंडिया ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव दहिया अदालत की अवमानना के दोषी

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को सुराज इंडिया ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव दहिया को अदालत को बदनाम करने व न्यायाधीशों और अदालत कर्मियों के खिलाफ बार-बार याचिका दायर करके न्यायिक समय बर्बाद करने के लिए अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया। यह देखते हुए कि दहिया ने 25 लाख रुपये का जुर्माना जमा नहीं किया है, जो पहले उन पर तुच्छ जनहित याचिका दायर करने के लिए लगाया गया था, अदालत ने भू-राजस्व विभाग को बकाया वसूली के रूप में उनकी संपत्ति से उक्त राशि की वसूली का निर्देश दिया।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि अवमानना कर्ता ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे मैं बिल्कुल कीचड़ फेंकूंगा, चाहे वह अदालत हो, प्रशासनिक कर्मचारी या राज्य सरकार। इसलिए इस कीचड़ से घबराकर , वो पीछे हट सकते हैं। पीठ ने सख्ती से कहा कि हम पीछे हटने से इनकार करते हैं।

पीठ ने कहा कि अदालत को बदनाम करने की उनकी हरकतों को माफी नहीं दी जा सकती। वह अपने अवमाननापूर्ण व्यवहार के साथ जारी है। पीठ ने कहा कि उसे मामले को इसके तार्किक निष्कर्ष पर ले जाना है। पीठ ने कहा कि दहिया की ओर से दिया गया माफीनामा काफी नहीं है और यह केवल परिणामों से बाहर निकलने का एक प्रयास है। पीठ ने कहा कि इसके बाद फिर से आरोपों का एक और सेट, इस प्रकार ये सब एक छलावा है। अवमाननाकर्ता की ओर से कोई पछतावा नहीं है।

पीठ ने कहा कि चूंकि दोषसिद्धि और सजा पर उन्हें एक संयुक्त नोटिस जारी किया गया है, इसलिए सजा पर उन्हें अलग से सुनने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, पीठ ने कहा कि वह उसे एक और मौका दे रही है, और मामले को 7 अक्टूबर को सजा पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

स्किन-टू-स्किन टच पोक्सो के लिए जरूरी नहीं

उच्चतम न्यायालय में अटॉर्नी जनरल ने कहा है हाई कोर्ट के उस फैसले को खारिज किया जाए जिसमें पोक्सो के तहत अपराध के लिए स्किन-टू-स्किन टच अनिवार्य है। अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि हाई कोर्ट का फैसला गलत नजीर बनेगा। यह खतरनाक होगा। पोक्सो कानून के तहत स्किन-टू-स्किन टच अनिवार्य नहीं है।

स्किन-टू-स्किन टच मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करने के लिए अटॉर्नी जनरल ने उच्चतम न्यायालय से गुहार लगाई है। साथ ही राष्ट्रीय महिला आयोग ने अलग से अर्जी दाखिल कर बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। महिला आयोग की ओर से भी दलील दी गई कि हाई कोर्ट के फैसले को खारिज किया जाए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि नाबालिग के अंदरूनी अंग को बिना कपड़े हटाए छूना तब तक सेक्सुअल असॉल्ट नहीं है जब तक कि स्किन-से-स्किन का टच न हो। इस फैसले के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने 27 जनवरी को हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

वेणुगोपाल बोले कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने पोक्सो कानून को गलत तरीके से परिभाषित किया है। कहा कि आईपीसी की धारा-354 में महिला के साथ छेड़छाड़ के लिए सजा है। लेकिन, मौजूदा मामला 12 साल की बच्ची के लिए है और उसी कारण पोक्सो एक्ट बनाया गया है। बच्चे ज्यादा खतरे में होते हैं और उन्हें प्रोटेक्ट करने के लिए पोक्सो कानून बनाया गया है और उस कानून के तहत कहीं भी स्किन-टू-स्किन टच की अनिवार्यता नहीं है।

साथ ही कहा कि हाई कोर्ट का फैसला खतरनाक नजीर बनेगा और वह भविष्य के लिए गलत नजीर साबित होगा। राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से गीता लूथरा ने दलील दी कि पोक्सो कानून में स्किन-टू-स्किन टच की अनिवार्यता नहीं है।

पटाखों में प्रतिबंधित केमिकल के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त

पटाखों में प्रतिबंधित केमिकल के इस्तेमाल पर उच्चतम न्यायालय ने सख्त नाराजगी दिखाई है। पटाखों में बेरियम का उपयोग करने के लिए शिवकाशी (तमिलनाडु) के 6 निर्माताओं को अवमानना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

पटाखों में प्रतिबंधित केमिकल बेरियम का उपयोग करने के लिए शिवकाशी (तमिलनाडु) के 6 निर्माताओं को अवमानना के लिए उच्चतम न्यायालय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अदालत के पहले के आदेशों का उल्लंघन करने के लिए आपके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों ना शुरू की जाए। बच्चे पीड़ित हैं, अस्थमा से लोग पीड़ित हैं। हमारे देश में हम हर दिन कुछ न कुछ आयोजित करते हैं और इन समारोहों में पटाखे चलाते हैं। हम जश्न के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम दूसरों को उसकी वजह से मरने नहीं दे सकते।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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