बीच बहस

10 हाइकोर्टों में नए आईटी नियमों को चुनौती, याचिकाकर्ताओं ने कहा- कानून अनुच्छेद-14,19ए 19 (1)(जी) का उल्लंघन

भारत की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम- 2021 के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस जेआर मिधा की पीठ ने केंद्र के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। दरअसल 25 फरवरी, 2021 को अधिसूचित किये गए नए आईटी नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए पीटीआई ने तर्क दिया कि यह समाचार और समसामयिक मामलों की खबरों के प्रकाशकों, विशेष रूप से डिजिटल समाचार पोर्टल के प्रकाशकों को विनियमित करने का प्रयास करता है।

डिजिटल न्यूज पोर्टल द लीफलेट ने बृहस्पतिवार को बंबई उच्च न्यायालय में कहा कि नया सूचना प्रद्यौगिकी (मध्यवर्ती दिशनिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम-2021 ‘बोलने की आजादी के मूलभूत अधिकार पर हमला है।पोर्टल ने पिछले सप्ताह याचिका दायर कर नए आईटी नियमों को चुनौती देते हुए दावा किया कि यह संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता), 19ए (भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी), 19 (1)(जी) (कोई भी पेशा करने, या नौकरी, व्यापार करने की आजादी) का उल्लंघन करता है।

द लीफलेट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डैरियस खम्बाता ने बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की पीठ के समक्ष कहा कि इन नियमों का नकारात्मक असर मौलिक अधिकारों पर पड़ता है जिसकी गारंटी संविधान में दी गई है। उन्होंने कहा कि वे (नियम) बोलने की आजादी के मूलभूत अधिकार पर हमला करते हैं। नियम कहता है कि अगर नए संगठन आचार संहिता का अनुपालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई हो सकती है।’

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने पीठ से कहा कि देश भर की विभिन्न अदालतों में इस मामले को लेकर कुल 10 याचिकाएं दायर की गई हैं। इसलिए, केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर सभी याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि इस मामले पर नौ जुलाई को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई होनी है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने द लीफलेट की याचिका पर सुनवाई 16 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी। वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने भी नियमों के मनमाना और गैर कानूनी होने का दावा करते हुए जनहित याचिका दायर की है। उनकी याचिका पर भी 16 जुलाई को सुनवाई होगी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने नए आईटी नियमों के खिलाफ अन्य डिजिटल समाचार आउटलेट जैसे- द वायर, द क्विंट आदि द्वारा दायर इसी तरह की याचिकाओं के साथ ही पीटीआई की याचिका को टैग किया है। अदालत इन याचिकाओं पर 20 अगस्त को सुनवाई करेगी। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए आईटी नियमों के ख़िलाफ़ द वायर, द न्यूज़ मिनट, द क्विंट आदि समाचार वेबसाइट ने अदालत में याचिका दायर की है, जिसमें नियमों का पालन नहीं करने के लिए सरकारी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।

समाचार एजेंसी ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार व्यापक सरकारी निरीक्षण और एक अस्पष्ट शब्द आचार संहिता  लगाकर डिजिटल समाचार मीडिया को विनियमित करने का प्रयास कर रही है। नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए समाचार एजेंसी ने तर्क दिया कि यह समाचार और समसामयिक मामलों की सामग्री के प्रकाशकों, विशेष रूप से डिजिटल समाचार पोर्टलों के प्रकाशकों को विनियमित करने का प्रयास करता है। नियमों को 25 फरवरी, 2021 को अधिसूचित किया गया था।

समाचार एजेंसी ने तर्क दिया है कि नए आईटी नियमों ने निगरानी और भय के युग की शुरुआत की, जिसके परिणामस्वरूप स्व-सेंसरशिप हुई और संविधान के भाग 3 के तहत निहित मौलिक अधिकारों का हनन हुआ। याचिका में कहा गया है कि ये नियम वस्तुत: सरकार को डिजिटल समाचार पोर्टलों पर सामग्री निर्देशित करने की अनुमति देते हैं, जो मीडिया की स्वतंत्रता का पूरी तरह से उल्लंघन करते हैं।

समाचार एजेंसी ने कहा है कि ये नियम आईटी अधिनियम के उद्देश्य और दायरे से परे हैं और इस बात पर जोर दिया कि सामग्री, जिसे आईटी अधिनियम द्वारा विनियमित किया जाना था, अपराध के रूप में, यौन स्पष्ट सामग्री, बाल पोर्नोग्राफी तक सीमित थी। याचिका में कहा गया है कि इन अपराधों पर मुकदमा चलाया जाना था और सामान्य अदालतों द्वारा मुकदमा चलाया जाना था।

याचिका में कहा गया है कि वे एक विशिष्ट और लक्षित वर्ग के रूप में ‘समाचार और वर्तमान मामलों की सामग्री’ के साथ डिजिटल पोर्टल पेश करते हैं, जो एक ढीले-ढाले ‘आचार संहिता’ द्वारा विनियमन के अधीन होते हैं, और केंद्र सरकार के अधिकारियों द्वारा पूरी तरह से निरीक्षण किया जाता है।” पीटीआई ने तर्क दिया कि वह कोई सुरक्षा नहीं चाहता और वह उस सामग्री के लिए किसी भी सुरक्षा के प्रावधान का हकदार नहीं है जिसे वह होस्ट और प्रकाशित करता है, और वह प्रकाशित सामग्री की पूरी जिम्मेदारी लेता है।

गौरतलब है कि द वायर ने 9 मार्च, 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने नोटिस जारी किया था, प्रतिवादी के रूप में केंद्र सरकार ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। बुधवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान द क्विंट, द वायर और ऑल्ट न्यूज की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ को याद दिलाया कि उन्होंने मौखिक आश्वासन दिया था कि याचिकाकर्ता सरकार द्वारा दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की स्थिति में अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

नित्या रामकृष्णन ने कहा कि उसके बाद सरकार ने याचिकाकर्ताओं को पत्र लिखकर मांग की कि वे आईटी नियमों के लिए आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करें या गैर-अनुपालन के दंडात्मक परिणामों का सामना करें। उन्होंने कहा कि नियमों पर नोटिस चला गया है और उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया है। अब वे मुझे उन्हें रिपोर्ट करने के लिए कह रहे हैं। अनुशासन (सरकार द्वारा सामग्री के नियमन के) को प्रस्तुत करने में यह पहला कदम है। कृपया मेरे स्टे आवेदन को सुनें और मुझे सुरक्षा प्रदान करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का आचरण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है कि मीडिया की सामग्री का सरकारी विनियमन अस्वीकार्य है।

इसके जवाब में अतिरिक्त सॉलिसीटर चेतन शर्मा ने कहा कि 1700 डिजिटल मीडिया आईटी नियमों के अनुरूप जानकारी पहले ही दे चुके हैं। इस पर रामकृष्णन ने कहा कि यह ध्वनिमत का मामला नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अदालत के समक्ष डिजिटल मीडिया पोर्टल्स ने नए आईटी नियमों को चुनौती देना पसंद किया है।

इन याचिकाओं में आईटी नियमों, विशेष रूप से नियमों के भाग III , की संवैधानिक वैधता को चुनौती दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है, नियमों का भाग III आईटी अधिनियम (जिसके तहत नियमों को फ्रेम किया गया है) द्वारा निर्धारित अधिकार क्षेत्र से परे है और यह संविधान के विपरीत भी है।

कई व्यक्तियों और संगठनों, जिनमें द वायर, द न्यूज मिनट की धन्या राजेंद्रन, द वायर के एमके वेणु, द क्विंट, प्रतिध्वनि और लाइव लॉ शामिल हैं,ने अपने-अपने राज्यों में विशेष रूप से महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली और तमिलनाडु के उच्च न्यायालयों में इसे चुनौती दी है। डिजिटल न्यूज में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले 13 परंपरागत अखबार और टेलीविजन मीडिया की कंपनियों ने भी डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) के तहत मद्रास हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर करते हुए इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 को संविधान विरोधी, अवैध और संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19 (1) क और अनुच्छेद 19 (1) छ का उल्लंघन करने वाला घोषित करने की मांग की है। मद्रास हाईकोर्ट ने 23 जून को याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 9, 2021 10:16 am

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