Sunday, October 24, 2021

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झूठ के पर्याय बन गए हैं पीएम मोदी!

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को नई वैक्सीनेशन पॉलिसी का एलान किया। इस पर भी गम्भीर विवाद हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने जिस बात को फरवरी में ही कही थी, उसे प्रधानमंत्री मोदी को मानने में चार महीने का लंबा वक्त लग गया। पीएम मोदी ने कहा कि 21 जून से देश के सभी लोगों को केन्द्र सरकार की तरफ से मुफ्त कोरोना वैक्सीन दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार के खर्च भी केन्द्र की तरफ से भी वहन किए जाएंगे। ममता बनर्जी ने ट्वीट करते हुए कहा कि फरवरी 2021 में मैंने कई बार कहा उसके बाद मैंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखते हुए सभी को मुफ्त वैक्सीन देने की अपनी ओर से मांग रखी थी। यह मानने में उन्हें काफी दबाव के बाद 4 महीने का वक्त लगा और आखिरकार उन्होंने हमारी सुनी और जो बात हम कह रहे थे, वो अब लागू करने जा रहे हैं।

प्रधानमन्त्री का कोई भी ऐलान आपदा में अवसर से मुक्त नहीं रहता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में ऐलान कर दिया कि पूरे देश को मुफ्त मिलेगी कोरोना वैक्सीन। लेकिन इस ऐलान में उन्होंने सारा दोष राज्य सरकारों पर मढ़ दिया। साथ ही कई तथ्य भी प्रधानमंत्री छिपा गए। इस महामारी की शुरुआत से ही लोगों की भलाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। दुर्भाग्य से, पीएम की तरफ से हुई इस देरी की वजह से पहले ही सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस बार बेहतर वैक्सीनेशन ड्राइव होगा और लोगों पर केन्द्रित किया जाएगा या केवल प्रोपगेंडा होगा यह समय बतायेगा।

राष्ट्र के नाम सम्बोधन में पीएम मोदी ने ऐसा प्रदर्शित किया कि देश में वैक्सीन को लेकर मची मारा-मारी और राज्यों की अक्षमता के चलते उन्होंने यह फैसला लिया है कि पूरे देश में वैक्सीनेशन केंद्र करेगा और सबको मुफ्त वैक्सीन मिलेगी। लेकिन यहां याद दिलाना जरूरी है कि बीते 31 मई को उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी की थी कि हमारा संविधान अदालतों को मूक दर्शक बने रहने की परिकल्पना नहीं करता है, जब नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कार्यकारी नीतियों द्वारा किया जा रहा हो।

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कोवैक्सिन, कोविशील्ड और स्पुतनिक वी सहित अब तक के सभी कोविड-19 टीकों के सरकार के खरीद इतिहास पर पूरा डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है । जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एलएन राव और जस्टिस एसआर भट्ट की पीठ ने कोरोना महामारी के दौरान दवा, ऑक्सीजन और वैक्सीनेशन के मामले बुधवार को केंद्र से अहम सवाल पूछे हैं। पीठ ने कहा है कि वैक्सीनेशन के लिए आपने 35 हजार करोड़ का बजट रखा है, अब तक इसे कहां खर्च किया। पीठ ने केंद्र से वैक्सीन का हिसाब भी मांगा और ये भी पूछा कि ब्लैक फंगस इन्फेक्शन की दवा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।यह भी कहा है कि केंद्र इस नीति को तय करने से जुड़े सभी दस्तावेज और फ़ाइल नोटिंग भी कोर्ट को सौंपे। अब ऐसी परिस्थिति में मोदी की वैक्सीन नीति का श्रेय कितना उनका है कितना उच्चतम न्यायालय के चाबुक का यह आप सुधी पाठक ही तय करें?  

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में दो हफ्ते बाद केन्द्र सरकार की ओर से 21 जून से सभी को वैक्सीन लगाने का एलान किया। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत दिए जाने वाले राशन की समय-सीमा को अब दीवाली तक के लिए बढ़ा दी गई है।

इस संबोधन में भी प्रधानमन्त्री मोदी ने कई मुद्दों पर अपनी पीठ थपथपाने से गुरेज नहीं किया। मोदी बोले कि दुनिया के हर कोने से ऑक्सीजन और दवा जुटाई। मोदी बोले कि अप्रैल-मई में ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ी। केंद्र ने ऑक्सीजन रेल चलाई, एयरफोर्स और नौसेना को लगाया। लिक्विड ऑक्सीजन प्रोडक्शन में कम समय में 10 गुना बढ़ोत्तरी की। दुनिया के हर कोने से ऑक्सीजन लाए। जरूरी दवाओं के प्रोडक्शन को कई गुना बढ़ाया। विदेशों में जहां भी दवाइयां थीं, वहां से लाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।

मोदी ने दावा किया कि 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज दिए गए। मोदी ने कहा कि दुनिया भी सोच रही थी कि भारत इतनी बड़ी आबादी को कोरोना से कैसे बचाएगा। पर जब नीयत साफ होती है और नीति स्पष्ट, साथ ही निरंतर परिश्रम होता है तो नतीजे भी मिलते हैं। हर आशंका को दरकिनार करके भारत में एक साल में ही एक नहीं, दो मेड इन इंडिया वैक्सीन लॉन्च कर दी। हमारे देश के वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े-बड़े देशों से पीछे नहीं है। आज देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज दिए जा चुके हैं।

मोदी ने दावा किया कि सवा साल में ही नया हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया। कोरोना बीते 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है। इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी और न अनुभव की थी। इससे हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है। कोविड अस्पताल बनाने से लेकर आईसीयू बेड्स की संख्या बढ़ाना, वेंटिलेटर बनाने से लेकर टेस्टिंग लैब का नेटवर्क तैयार करना हो, हर मोर्चे पर हमने काम किया। बीते सवा साल में देश में नया हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है।

उन्होंने यह ऐलान भी किया कि देश में बनने वाली कुल वैक्सीन का 25 फीसदी निजी अस्पतालों को दिया जाएगा और निजी अस्पताल वैक्सीन की कीमत के अलावा प्रति डोज़ अधिकतम 150 रुपए सर्विस चार्ज के रूप में ले सकेंगे। पीएम ने कहा कि अब देश के लिए सारी वैक्सीन हासिल करने का काम केंद्र सरकार ही करेगी और राज्यों को समय रहते बता दिया जाएगा कि किस राज्य को कब और कितनी वैक्सीन खुराकें मिलेंगी। उन्होंने घोषणा की कि 21 जून से देश में 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन मुफ्त में दी जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को भी दीवाली तक बढ़ाने का ऐलान किया। इस योजना में गरीबों को राशन मुफ्त दिया जाता है।

आपदा में अवसर की अपनी नीति के तहत  अपने भाषण की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने जो कुछ कहा, वह भारत जैसे विविधता वाले लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री के शब्द कम और चुनावों के दौरान किसी राजनीतिक दल के नेता के ही अधिक प्रतीत हुए।प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले तक देश में वैक्सीनेशन कवरेज सिर्फ 60 फीसदी था, और वैक्सीन हासिल करने में दशक लग जाते थे। प्रधानमंत्री का यह दावा तथ्यात्मक रूप से सही प्रतीत नहीं होता। सिर्फ पोलियो की ही बात करें तो भारत को जनवरी 2014 में पोलिय मुक्त घोषित किया जा चुका है, वह भी इससे पहले के तीन साल तक देश में पोलियो का एक भी केस सामने न आने के बाद। भारत में पोलियो का आखिरी केस जनवरी 2011 में सामने आया था। इस उपलब्धि का कारण सिर्फ वैक्सीन ही थी, जिसे पोलियो ड्रॉप कहा जाता था। इस तरह वैक्सीन निर्माण, वैक्सीन विकास और देश को वैक्सीन उपलब्ध कराने का पीएम का दावा सही नहीं है।

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इस साल जनवरी में वैक्सीनेशन की शुरुआत से लेकर अप्रैल अंत तक वैक्सीनेशन का सारा काम केंद्र सरकार की देखरेख में ही हो रहा था। यानी वैक्सीन को खरीदने से लेकर उसके वितरण तक का काम केंद्र ही कर रहा था। पीएम का कहना था कि इसके लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और संसद में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बातचीत के बाद ही ऐसी व्यवस्था की गई थी।लेकिन अगर मीडिया रिपोर्ट्स कुछ और ही कहती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स से स्पष्ट है कि कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठकें किस तरह की रही हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा बैठक का सीधा प्रसारण करने और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा पीएम से फोन पर हुई बातचीत सामने रखने से स्थिति स्पष्ट हो जाती है। तो पीएम का यह कहना है कि सारी व्यवस्था राज्यों से बात करके तय हुई थी, सही नहीं है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि एक साल के भीतर ही भारत ने कोरोना की वैक्सीन तैयार कर ली। उन्होंने कहा कि भारत के पास इस समय दो देसी वैक्सीन हैं। उनका भाव ऐसा था मानो यह भी उन्हीं की सरकार की उपलब्धि हो। लेकिन यहां ध्यान देना होगा कि जो दो वैक्सीन इस समय देश में उपलब्ध हैं, उन्हें बनाने वाली कंपनियों की स्थापना मोदी के सत्ता में आने से दशकों पहले हो चुकी थी।

एक और बात जो तथ्यात्मक रूप से प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में गलत थी वह थी अभी तक देश में दी गई कोरोना वैक्सीन की संख्या। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस समय वे देश से संबोधित हैं उस समय तक देश में 23 करोड़ वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। उनके इस बयान से ऐसा भाव आता है कि देश में 23 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। लेकिन वास्तविकता यह है कि देश में अब तक ऐसे लोगों की संख्या 4 करोड़ 62 लाख, 71 हजार, 7 सौ 9 है, जिन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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