राहुल का ब्रिटेन दौरा: हंगामा है क्यूं बरपा

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ब्रिटेन में राहुल गांधी ने ऐसा क्या कह दिया कि भाजपा बौखला गई है। क्या राहुल गांधी ऐसा कुछ कह दिया, जो उन्हें नहीं कहना चाहिए था। क्या बीजेपी उन्हें संसद से निलंबित करने की धमकी को हकीकत में बदल पाएगी? सिर्फ इसलिए कि उन्होंने विदेशी जमीन पर आलोचनात्मक टिप्पणी की थी?

जब से राहुल गांधी ब्रिटेन दौरे से लौटे हैं बीजेपी ने उनके बयानों को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया है। लेकिन राहुल गांधी के लिए परेशानी तब खड़ी हुई जब 19 मार्च को पुलिस की एक टीम उनके घर पहुंची और उन महिलाओं के बारे में जानकारी मांगने लगी, जिनके बारे में उन्होंने बताया था कि उनके साथ बलात्कार हुआ है। उन्होंने ब्रिटेन के कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में अपने लेक्चर के दौरान इसका उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि वे महिलाएं पुलिस के पास नहीं जाना चाहती थीं क्योंकि उन्हें इससे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता था।

ब्रिटेन में राहुल गांधी ने सरकार, बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ तीखी बातें की थीं। उन्होंने कहा था कि ‘लोकतंत्र, संसद, प्रेस, न्यायपालिका इन सभी पर हमला हो रहा है। हम भारतीय लोकतंत्र के मूल ढांचे पर हमले का सामना कर रहे हैं’।

ब्रिटेन में राहुल गांधी के तीन प्रमुख कार्यक्रम थे। वह कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में छात्रों को लेक्चर देने वहां गए थे। लेकिन इसके बाद उन्होंने लंदन के थिंक टैंक चैथम हाउस में बैठकें कीं और वहां भारतीय पत्रकार संघ द्वारा आयोजित एक बैठक में प्रेस से भी बातचीत की।

हर मौके पर उन्होंने उसी के हिसाब से कपड़े पहने। कैंम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के छात्रों के सामने एक सूट और टाई, चैथम हाउस में एक बंदगला और भारतीय पत्रकारों के सामने कुर्ता पायजामा पहना था।

राहुल गांधी ने अपनी सभी बैठकों में सावधानी और स्पष्टवादिता का असामान्य मिश्रण प्रदर्शित किया। वे सरकार पर हमला करने से नहीं हिचके। उन्होंने कहा ‘ आप भारत में यात्रा करते हुए देख सकते हैं कि दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों के लिए क्या किया जा रहा है।

विदेशी प्रेस में हर समय ऐसे लेख प्रकाशित होते रहते हैं कि भारतीय लोकतंत्र के साथ एक गंभीर समस्या है। बीजेपी को बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं है। वे जानते हैं कि देश में क्या चल रहा है।’

उन्होंने सरकार द्वारा सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ‘किसी भी विपक्षी नेता से पूछिए कि एजेंसियों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। मेरे फोन पर पेगासस लगा था। जब हम सत्ता में थे तब ऐसा नहीं हो रहा था’।

सुप्रीम कोर्ट की एक कमेटी ने अपनी जांच में पाया था कि राहुल गांधी के फोन में पेगासस का इस्तेमाल नहीं किया गया था। हालांकि कई अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा है कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि पेगासस कई फोन पर मौजूद था। इसके अलावा उन्होंने अपने ऊपर लगे आपराधिक मानहानि के मामलों का भी जिक्र किया।

राहुल गांधी भारतीय लोकतंत्र के बारे में बहुत विस्तार से बात करना पसंद करते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि यह तभी सार्थक हो सकता है जब बातचीत हो, और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘बातचीत मोड’ में नहीं होने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि ‘लोकतंत्र 1.4 अरब लोगों के बीच एक समझौता है। बातचीत संस्थानों के माध्यम से होती है। मेरी चिंता यह है कि उस बातचीत के ढांचे पर हमला किया जा रहा है और उसे तोड़ा जा रहा है।

प्रधानमंत्री एक दिन उठते हैं और अचानक भारतीय मुद्रा का विमुद्रीकरण कर देते हैं। जिसके बारे में आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) को भी नहीं पता था। सब कुछ दरकिनार करके किया गया। इसी तरह जीएसटी को भी लागू किया गया था’।

भारत के बारे में अपनी चर्चा में उन्होंने दार्शनिक अंदाज अपनाया। उन्होंने कहा ‘भारत में दो दर्शन हैं। एक अनंत में विश्वास करता है जो कहता है कि आप हमेशा के लिए जीवित रहेंगे। दूसरा कहता है कि तुम मौजूद नहीं हो। भारत इन दोनों के बीच काम करता है।‘

अपनी साढ़े चार महीने तक चली भारत जोड़ो यात्रा की जबरदस्त सफलता के बारे में बात करते समय वह विशेष रूप से भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि वे 125 लोगों की कोर टीम लेकर चले, तो उन्हें शुरूआत में वे वास्तव में नहीं जानते थे कि किसी दिन लगभग 3,000 या 4,000 की भीड़ उनके साथ आएगी। एक समय तो वे लगभग एक लाख लोगों के एक जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे।

राहुल गांधी ने कहा कि ‘मुझे नहीं पता था कि मै खुद के लिए क्या प्राप्त कर रहा था। मैं रोजाना 10 किलोमीटर दौड़ता हूं तो मैंने सोचा कि रोजाना 30 किलोमीटर पैदल चलना इतना भी मुश्किल नहीं हो सकता।

यह केवल दूरी की बात नहीं थी। यह इस चीज में निहित ऊर्जा के बारे में था’। राहुल गांधी ने यह भी बताया कि कैसे उनके घुटने ने उन्हें परेशान किया। इसलिए वे सुबह उठते और सोचते थे कि “केवल 3,500 किलोमीटर बाकी है।”

उनकी सबसे चौंकाने वाली व्यक्तिगत खोज यह थी कि देश के एक छोर से दूसरे छोर तक तेज गति से 4,000 किलोमीटर चलने के बाद भी उनका वजन एक औंस भी कम नहीं हुआ था। ‘4,000 किलोमीटर चलने के बाद भी मेरा वजन एक किलो बढ़ गया।’  उन्होंने अफसोस के साथ कहा कि ‘व्यायाम आपको वजन कम करने में मदद नहीं करता है’।

हर स्तर पर भारत जोड़ो यात्रा ने उन सभी सीमाओं को पार कर लिया जिनकी योजना बनाई गई थी। उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों के सुरक्षा चिंताओं पर बात करते हुए जोर देकर कहा था कि उनके चारों ओर एक स्पष्ट जगह मौजूद होनी चाहिए। गांधी ने कहा कि ‘मैं एक अवधारणा के साथ सामने आया कि मुझे यह सुनिश्चित करना है कि मेरे सामने जगह सुरक्षित है। महिला, विकलांग, जो भी इस क्षेत्र में आता है उसे महसूस होना चाहिए कि वह घर आ गया है।

जिस समय उन्होंने अपनी भारत जोड़ो यात्रा को एक घर बनाने का विचार किया, उन्होंने राजनीतिक चर्चा करना बंद कर दिया। एक राजनीतिक विचार एक व्यक्तिगत विचार बन गया। उन्होंने कहा कि ‘लोग उन चीजों के बारे में बात करने लगे जिनके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं था कि वे बात करेंगे।

लोग हमें अपनी सबसे निजी बातें बताने लगे’। दो लड़कियों ने उन्हें बताया कि कैसे उनके साथ बलात्कार किया गया। लेकिन उन्होंने कहा कि वे पुलिस को नहीं बता सकतीं। क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा होना पड़ेगा। यही वो कारण था कि रविवार को पुलिस उसके घर पर आई।

राहुल गांधी कहते हैं कि देश भर में जिन लोगों से उन्होंने बात की, उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी था। इसके अलावा उन्होंने कहा कि ‘हम जहां भी गए लोग जलवायु परिवर्तन के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन वे स्थानीय स्तर पर इसके बारे में बात कर रहे थे कि पानी बहुत प्रदूषित है। वे स्थानीय समस्या और वैश्विक समस्या के बीच संबंध नहीं बना पा रहे थे’।

राहुल गांधी ने लंदन में एक के बाद एक दर्शकों को बताया कि भारत जोड़ो यात्रा शुद्ध रूप से राजनीति से परे थी और लगभग यह एक रहस्यमयी अनुभव था। उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ अपने कानों से ही नहीं सुनना शुरू किया। हाथ से सुनने लगे, आंखों से सुनने लगे। उन्होंने कहा कि मैं चुप रहने लगा। यह ऐसा था जैसे एक अंधेरी झील थी और धीरे-धीरे मुझे बहुत सी चीजें महसूस होने लगीं। जो मैं पहले महसूस नहीं कर सकता था।

क्या राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना करते हुए हदें पार कर दीं? उन्होंने जो कुछ भी कहा एक स्वस्थ लोकतंत्र की प्रगति के लिए जरूरी था। अमेरिका पर एक नजर डालें जहां यह माना जाता है कि सार्वजनिक हस्तियों को उनके खिलाफ सभी प्रकार के हमलों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। ब्रिटेन के लिए भी यह बात लागू होती है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी कहते हैं, ‘इंग्लैंड में जनहित में कही गई बातों पर केस लॉ है’। वह आगे  कहते हैं कि ‘भारत में विशेषाधिकार हनन के नियम लगभग समान हैं’। राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखकर लंदन में अपनी टिप्पणी के बारे में सदन में बोलने के लिए समय देने का अनुरोध किया है।

क्या राहुल गांधी ने वैश्विक शक्तियों से भारत में हस्तक्षेप करने को कहा था? निश्चित रूप से राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया को भारतीय लोकतंत्र की स्थिति के बारे में चिंतित होना चाहिए। ‘भारतीय लोकतंत्र एक सार्वजनिक अच्छाई है। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह लोकतांत्रिक प्रणाली का बचाव करने के बारे में है।

‘उन्होंने चीन के साथ सीमा मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘वे हमारे क्षेत्र के 2,000 वर्ग किमी पर बैठे हैं। और जब उन्होंने ऐसा कहा तो प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय क्षेत्र का एक इंच भी नहीं लिया गया है। चीनी जानते हैं कि वे हमारे क्षेत्र में बैठे हैं। सेना इसे जानती है’।

लंदन में अपनी सार्वजनिक उपस्थिति के दौरान, राहुल गांधी ने गौतम अडानी और नरेंद्र मोदी के साथ के घनिष्ठ संबंधों का भी जिक्र किया। सत्तारूढ़ दल बीजेपी ने अडानी मामले से ध्यान हटाने के लिए लंदन में राहुल गांधी के बयानों को तूल देते हुए उसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया। तथ्य यह है कि संसद में नारेबाजी का नेतृत्व बीजेपी ने किया है।

आने वाले हफ्तों में हम देखेंगे कि क्या बीजेपी राहुल गांधी को संसद से निलंबित करने की मांग पर अमल करती है या नहीं। हाल ही के एक चौंका देने वाले कार्टून में राहुल गांधी के मुंह पर एक बड़ा सा हाथ दिखाया गया है और एक आवाज कह रही है, ‘आप संसद में बोल नहीं सकते।‘ राहुल गांधी आश्चर्य से जवाब देते हैं, ’मैंने लंदन में यही कहा था’।

(कुमुद प्रसाद जनचौक की कॉपी एडिटर हैं)

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