एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश दरकिनार

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हम पहले या आप पहले में हैदराबाद में महिला वेटनरी डॉक्टर के साथ गैंगरेप और हत्या के चारों आरोपियों के एनकाउंटर की जांच याचिका उच्चतम न्यायालय और तेलंगाना हाईकोर्ट के बीच टल गई है। तेलंगाना हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के कारण उच्चतम न्यायालय पहले तो इसे सुनना ही नहीं चाहता था, लेकिन याचिकाकर्ताओं के यह कहने पर कि हाईकोर्ट की याचिका में दूसरा अनुतोष मांगा गया है तब याचिका विचारार्थ स्वीकार की गई।

उधर तेलंगाना हाईकोर्ट ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल याचिका का हवाला देकर सुनवाई 12 दिसंबर के लिए टाल दी। इस बीच तेलंगाना सरकार ने भी अपने अधिकारियों के बचाव में आनन फानन में एक एसआईटी गठित कर दी है, लेकिन उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप अभी तक मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

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हैदराबाद में महिला वेटनरी डॉक्टर के साथ गैंग रेप और हत्या के चारों आरोपियों के एनकाउंटर की जांच याचिका सुप्रीम कोर्ट ने विचारार्थ स्वीकार कर ली है। एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर और एनकाउंटर की जांच की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और इस याचिका पर 11 दिसंबर को सुनाई जाएगी। इस बीच तेलंगाना हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि पुलिस मुठभेड़ में मारे गए चारों आरोपियों के शवों को 13 दिसंबर तक संरक्षित रखा जाए। हाईकोर्ट ने कहा है चूंकि उच्चतम न्यायालय बुधवार 11 दिसंबर को इस मामले से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा, इसलिए हाईकोर्ट 12 दिसंबर को इस मामले की सुनवाई करेगा।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने हैदराबाद मुठभेड़ मामले की शीघ्र सुनवाई करने के वकील जीएस मणि के अनुरोध का संज्ञान लिया। मणि ने कहा कि इस मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ स्वतंत्र जांच के लिए दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है।

एक अन्य अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने भी इसी तरह की याचिका दायर की है। शर्मा की याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों की निगरानी में विशेष जांच दल की जांच होनी चाहिए। याचिका में मणि और वकील प्रदीप कुमार यादव ने दावा किया है कि यह मुठभेड़ फर्जी थी और इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।

वकीलों की याचिका में कहा गया है कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय के 2014 के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। दिशा निर्देशों के अनुसार एनकाउंटर होने के बाद उसकी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है। एनकाउंटर में मारे गए या घायल हुए लोगों के परिवार को तुरंत सूचना देनी होगी। सभी मौतों की मजिस्ट्रेट जांच होगी। एनकाउंटर की जांच सीआईडी की टीम या किसी दूसरे पुलिस स्टेशन की टीम करेगी। ये जांच एनकाउंटर में शामिल टीम के प्रमुख से एक पद ऊंचे अधिकारी की निगरानी में होगी। एनकाउंटर में होने वाली मौत की सूचना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राज्य मानवाधिकार आयोग को देना जरूरी है।

गौरतलब है कि तेलंगाना उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय द्वारा प्राप्त एक प्रत्यावेदन का संज्ञान लिया, जिसमें हैदराबाद की 27 वर्षीय पशु चिकित्सक से बलात्कार और जला कर हत्या करने के चार आरोपियों की मुठभेड़ ‘हत्याओं’ के संबंध में न्यायिक हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया था।

दरअसल शुक्रवार सुबह तड़के एक मुठभेड़ में सभी आरोपी मारे गए, पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने भागने का प्रयास किया था और पुलिस पर हमला किया था। उच्च न्यायालय की दो जजों की पीठ के सामने शुक्रवार रात आठ बजे तेलंगाना के एडवोकेट जनरल पेश हुए और पीठ को सूचित किया था कि चारों आरोपियों का पोस्ट मार्टम महबूबनगर के जिला सरकारी अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक की निगरानी में किया जा रहा है, जिसमें हैदराबाद के गांधी अस्पताल के फोरेंसिक डॉक्टर भी शामिल हैं। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी की जा रही है।

हाईकोर्ट ने वीडियो को एक सीडी या पेन-ड्राइव में महबूबनगर के प्रमुख जिला न्यायाधीश को सौंपने का निर्देश दिया और न्यायाधीश को हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को इसे देने के निर्देश दिए थे। पीठ ने सभी चार आरोपियों के शवों को नौ दिसंबर की रात आठ बजे तक संरक्षित करने का भी निर्देश दिया था और कहा था कि मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ नौ दिसंबर को सुबह 10:30 बजे मामले की सुनवाई करेगी।

इस बीच तेलंगाना सरकार ने एनकाउंटर की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है। एसआईटी का नेतृत्व राचकोंडा के पुलिस आयुक्त महेश एम भागवत करेंगे। सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता के चार आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था। इसके बाद से ही एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे थे। साइबराबाद पुलिस के खिलाफ एक शिकायत भी दर्ज करवाई गई है, जिसमें कहा गया है कि हैदराबाद एनकाउंटर फर्जी था।

पुलिस की कहानी के अनुसार शुक्रवार सुबह हैदराबाद के एनएच 44 पर पुलिस ने जांच के दौरान क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्ट करने के लिए आरोपी को अपराध स्थल पर लाया। यहां पर आरोपियों ने पुलिसकर्मियों से हथियार छीन लिए और पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें चेतावनी देते हुए आत्म समर्पण करने के लिए कहा, लेकिन वे गोलियां चलाते रहे। फिर पुलिस ने गोलाबारी की और चारों मुठभेड़ में मारे गए। मुठभेड़ के दौरान पुलिस के दो जवान घायल हो गए। उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।

हैदराबाद पुलिस की इस पूरी कार्रवाई को यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने सही करार दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पुलिस के पास कोई विकल्प नहीं बचता है। एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए उन्होंने हैदराबाद पुलिस को बधाई भी दी। पुलिस के इस एनकाउंटर को लेकर कई और लोगों ने पुलिस की सराहना की तो कई ने इस पर सवाल भी उठाए।

एक ओर जहां पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष और बाबा रामदेव जैसी हस्तियों ने इसका समर्थन किया तो दूसरी ओर कांग्रेस सांसद शशि थरूर, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू, भाजपा सांसद मेनका गांधी, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे समाज के लिए अस्वीकार्य बताया।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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