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Categories: बीच बहस

वित्त मंत्री ने पहले दिल तोड़ा और अब जले पर नमक छिड़क दिया

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के 12 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के ऐलान के क्रम में वित्तमंत्री ने मंगलवार को मात्र 4.4 लाख करोड़ के अप्रत्यक्ष पैकेज को देख और सुन कर लोगों का दिल टूट गया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन राहत पैकेज का ब्रेकअप बता कर किसानों, मजदूरों और रेहड़ी वालों के जले पर नमक छिड़क दिया। पूरे देश को उम्मीद थी कि शायद कोई फौरी राहत उन्हें मिलेगी, लेकिन उसे दो दिन में वित्त मंत्री ने चूर-चूर कर दिया। दो दिन की राहत घोषणा से यह स्पष्ट है कि सरकार के पास या तो वित्तीय गुंजाइश नहीं है या है भी तो सरकार फौरी लाभ देशवासियों को देना नहीं चाहती।वित्त मंत्री या सरकार को कौन बताये की यह बजट घोषणा नहीं राहत पैकेज है।

वास्तव में वित्तमंत्री ने जिन पैकेजों की घोषणा की है वो सिर्फ ऋण योजनायें हैं, कोई राहत नहीं है। इनमें से ज्यादातर पुरानी हैं। इन पुरानी योजनाओं की एक तरह से ये री-पैकेजिंग है। देश में 43% रोजगार कृषि पर निर्भर हैं, इसके बावजूद मेगा राहत पैकेज में किसान के लिए कुछ खास नहीं है। किसानों को सबसे बड़ी राहत उनकी क़र्ज़ माफ़ी होती। आज भी हजारों की संख्या में मजदूर पैदल हजारों किलोमीटर की दूरी मरते-खपते पूरी कर रहे हैं, कहाँ उनके लिए वहां है, कहाँ रास्ते में राहत शिविर हैं और कहाँ निःशुल्क भोजन की व्यवस्था है ?

इसे इस तरह समझें कि जब लॉकडाउन में सारे शहर ,सारे कस्बे ,गाँव, देहात सब जगह कोरोना कर्फ्यू है तो जो पहले से ही दिवाले हैं वही नहीं बैठ पा रहे हैं तो कर्ज़ लेकर रेहड़ी कहाँ और कब लगायेंगे? सरकार ने दिहाड़ी मजदूरी 182 रुपए प्रतिदिन से बढ़ाकर 202 रुपए प्रतिदिन कर दिया लेकिन सरकार को पता नहीं ये मालूम है या नहीं कि बड़े शहरों में मजदूर को न्यनतम 600 रूपये की दिहाड़ी मिलती है और श्रम के आउटसोर्सिंग से मजदूर स्वयं ठेके का काम लेकर एक दिन में 12-15 सौ कमा लेते हैं। इनका 202 रुपए प्रतिदिन से काम कैसे चलेगा।वित्तमंत्री की ऋण योजना में माफ़ी का प्रावधान नहीं है बल्कि ऋणों की वसूली भी है थोड़ी रियायत के साथ।

वित्त मंत्री ने कुल 9 घोषणाएं कीं। इनमें से 3 घोषणाएं प्रवासी मजदूर, 2 छोटे किसानों और एक-एक घोषणा मुद्रा लोन, स्ट्रीट वेंडर्स, हाउसिंग और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार से जुड़ी थीं। लेकिन उनकी राहत पैकेज सम्बन्धी दो प्रेस कांफ्रेंस के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार राहत के नाम पर अधिकतम मिलने वाले कर्ज की गारंटी भर ले सकती है और इससे ज्यादा कुछ नहीं। कर्ज तो चुकाना ही होगा, जबकि आने वाला वक्त भयंकर अनिश्चितताओं वाला है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए अगले दो महीने तक मुफ्त राशन देने के नाम पर 3500 करोड़ का हिसाब आज सामने रख दिया। लेकिन यह काम तो लॉकडाउन लागू होने के पहले दिन ही करना था। लॉकडाउन के 50वें दिन हुई यह घोषणा क्या माफीनामा है? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह नहीं बताया कि देशभर में कहाँ-कहाँ और कितने केन्द्रों से यह मुफ्त वितरण हो रहा है? सरकार को या तो इन मजदूरों की मौजूदगी का एहसास नहीं है या फिर वह पूरी तरह इनकी अनदेखा कर चुकी है। सरकार ने मोटे तौर पर उन्हें उनके हाल पर ही छोड़ दिया है। सरकार ने ऐसा कोई भी ऐलान नहीं किया जिससे किसी को आने वाले समय में कोई राहत मिलने वाली हो।

सीएमआईई के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश की एक तिहाई आबादी एक सप्ताह के अंदर बेहद मुश्किलों का सामना करने वाली है। लेकिन केंद्र सरकार को इसकी परवाह नहीं है कि देश की करीब एक चौथाई कामकाजी आबादी बीते दो महीने से बेरोजगार हो चुकी है और उनके पास जो भी मामूली जमा पूंजी या संसाधन थे वह अब खर्च हो चुके हैं। ऐसे में 20 लाख करोड़ के पैकेज की पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणा से पूरे देश को जो उम्मीद बंधी थी उसे दो दिन में वित्त मंत्री ने चूर चूर कर दिया।

वित्त मंत्री की प्रेस कांफ्रेंस में अगर कोई अच्छी बात गुरुवार को दिखी तो वह सिर्फ यह कि सरकार ने राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी लागू कर दी है यानी एक ही राशन कार्ड पूरे देश में चल जाएगा। लेकिन यह बात केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान एक से अधिक बार कह चुके हैं। वित्त मंत्री ने यह ऐलान तो कर दिया, लेकिन अपने खजाने में निगाह शायद उन्होंने नहीं डाली। सरकार का मजदूरों के लिए यह कदम भी सिर्फ राज्यों के आपदा राहत कोष के इस्तेमाल तक ही सीमित रहा जो कि प्रवासी मजदूरों के लिए शेल्टर मुहैया कराने में काम आएगा। सरकार ने इस मद में राज्यों को 11,002 करोड़ का एडवांस जारी किया है। लेकिन देश भर में कितने राहत कैंप चल रहे हैं और वहीं क्या सुविधाएं दी जा रही हैं इसका डेटा सरकार के पास नहीं है।

किसानों को दिए गए ऋण पर इस बात की छूट दी गई है कि 3 महीने तक किसी तरह का ब्याज नहीं देना है। कृषि के क्षेत्र में पिछले मार्च और अप्रैल महीने में 63 लाख ऋण मंजूर किए गए। जिसका एमाउंट लगभग 86 हजार 600 करोड़ रुपए है। फसल की खरीद के लिए 6,700 करोड़ रुपए की कार्यशील पूंजी भी राज्यों को उपलब्ध कराई गई। बताया गया कि लॉकडाउन की शुरुआत से ही किसानों को ये सुविधाएं दी जा रही हैं, जो इसी तरह आगे भी जारी रहेंगी। तो नया फायदा या राहत क्या मिला?

प्रवासी मजदूरों को कम किराए के मकान मिलेंगे लेकिन कब मिलेगा यह अभी तय नहीं है। किसानों को 30 हजार करोड़ रुपए की मदद मिलेगी लेकिन कब मिलेगा यह सरकार ने साफ नहीं किया है। 2.5 करोड़ किसानों के लिए 2 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। किसानों को कम ब्याज दरों पर कर्ज की सुविधा मिलेगी। ब्याज दरों पर छूट कितनी होगी, यह अभी साफ नहीं है। 2.5 करोड़ किसान, मछुआरे और पशु पालने वाले इसका फायदा उठा सकेंगे। यह फायदा किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए दिया जाएगा। सरकार ने इसके लिए 2 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। कब मिलेगा यह सरकार ने यह साफ नहीं किया है।

सरकार ने छोटे किसानों के लिए इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम और वक्त पर कर्ज चुकाने पर इन्सेंटिव देने की स्कीम बढ़ा दी है। जो किसान 3 लाख रुपए तक का शॉर्ट टर्म लोन लेते हैं, उनका 2 फीसद ब्याज एक साल के लिए सरकार चुकाती है। इसी तरह अगर वे कर्ज समय पर चुकाते हैं तो उन्हें ब्याज में 3% की छूट दी जाती है। यह एक तरह की इंटरेस्ट सब्सिडी होती है। यह स्कीम 31 मई तक बढ़ा दी गई है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on May 15, 2020 9:03 am

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