Subscribe for notification
Categories: बीच बहस

बिहार के ब्रह्म बाबा और लालू प्रसाद की केमिस्ट्री एक, कौन सहेगा जुदाई!

बिहार का चुनावी तापमान चढ़ा हुआ है। एक तो सरकार में लौटने को लेकर एनडीए और महागठबंधन के बीच संग्राम है तो दूसरी तरफ नेताओं के बदलते रंग और पार्टी की अदलाबदली बिहार की राजनीति को दिलचस्प बना रही है। कई राजद नेता नीतीश कुमार की शरण में चले गए हैं तो कई नेता नीतीश से नाराज होकर राजद में समा गए। ये सारे बिहार के कथित समाजवादी हैं।

पार्टी की अदला बदली हमारे लोकतंत्र का हिस्सा रहा है, लेकिन जिस आधार को बताकर पार्टियां बदली जा रही हैं वह मौकापरस्ती से कुछ भी कम नहीं है। ऐसा भी संभव है कि जब चुनाव में ऐसे नेताओं की मात होगी, तब तुरंत ये उसी पार्टी को अपनाएंगे जिससे निकल कर भागे हैं। बिहार में ऐसे दर्जनों नेताओं की सूची तैयार है, जो मौक़ा देखकर इरादा बदल  देते हैं। बिहार में इसीलिए बहार है, लेकिन सच यही है कि ऐतिहासिक बिहार को ऐसे नेताओं ने ही कंगाल और बदनाम बना दिया है।

रघुवंश बाबू की परेशानी
इसी बीच खबर तैर गई कि राजद के संस्थापक नेताओं में शुमार और लालू प्रसाद के हर सुख-दुःख के साथी रघुवंश बाबू राजद से इस्तीफा देकर कहीं और जाने की तैयारी में हैं। कहा जा रहा है कि वे नीतीश की पार्टी जदयू के साथ जाएंगे। रघुवंश बाबू की तरफ से एक पत्र भी मीडिया के बाजार में तैर रहा है। लगे हाथ लालू प्रसाद का वह पत्र भी सार्वजिनक हो गया है, जिसमें लालू प्रसाद रघुवंश बाबू से पार्टी न छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं।

अब खबर आ रही है कि लालू प्रसाद जेल से ही रघुवंश बाबू को रोकने की कोशिश में लगे हैं और उम्मीद की जा रही है कि राजद की यह कोशिश रंग लाएगी। रघुवंश बाबू कहीं नहीं जाएंगे। याद रहे पिछले काफी समय से रघुवंश बाबू राजद के नए नेतृत्व से नाराज हैं। लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद वे हाशिये पर चल रहे हैं, इसमें कोई शक नहीं। इसी बीच सूबे की बदलती राजनीति में रघुवंश बाबू को उस समय बड़ा झटका लगा जब राजद नेता तेजस्वी यादव वैशाली के सांसद रामा सिंह को पार्टी में लाने की तैयारी करने लगे। बता दें कि पिछले चुनाव में रामा सिंह से रघुवंश बाबू को हार मिली थी। भला उस व्यक्ति को पार्टी में रघुवंश बाबू कैसे बर्दाश्त करते। हालांकि रघुवंश बाबू की नाराजगी के बाद राजद ने रामा सिंह प्रकरण को त्याग दिया, लेकिन उसकी गुंजाइश अभी भी बाकी है और यही रघुवंश बाबू की परेशानी है।

वैशाली के ब्रह्म बाबा और लालू का प्रेम
वैशाली का बच्चा-बच्चा रघुवंश बाबू को ब्रह्म बाबा के नाम से ही जानता है। उन्हें सब जानते हैं और वे सबको जानते हैं। वे अपने घर पर कम ही सोते और रहते हैं। उनकी दिनचर्या किसी गांव से शुरू होती है और किसी गांव में देर रात रुककर किसी साथी के यहां सो जाते हैं। इस देहाती नेता की जमीनी पकड़ है और सबसे प्यार भी। खांटी समाजवादी और जेपी के अनुयायी रघुवंश बाबू का लालू प्रसाद से मिलना और उनके साथ रहना कोई मामूली बात नहीं। जैसे लालू ही रघुवंश बाबू हैं। अंतर सिर्फ इतना ही है कि लालू प्रसाद विवादों में रहे, लेकिन रघुवंश बाबू विवादरहित होकर अपनी राजनीति को बढ़ाते रहे। कई अवसरों पर रघुवंश बाबू लालू पर जमकर बोले भी। खुलेआम उन्होंने लालू प्रसाद पर उंगली भी उठाई, लेकिन कभी लालू से अलग नहीं हुए।

जिस गांव-देहात, गरीब-गुरबा, खेत-खलिहान, गंवई अंदाज, बोल चाल के लालू माहिर माने जाते हैं, वही जीवन कुछ रघुवंश बाबू का भी है। कभी-कभी लगता है कि एक गणितज्ञ भला राजनेता कैसे हो गया? रघुवंश बाबू की पहचान एक गणितज्ञ के रूप में है। वे गणित के प्रोफ़ेसर रहे हैं और उनके विद्यार्थी रहे लोग आज भी उन पर नाज करते हैं। ऐसे में उनका लालू के साथ आना और फिर साथ छोड़ने की कहानी बिहारी समाज के लिए किसी दर्द से कम नहीं। वे बेलौस हैं। देहाती अखड़पन भी है और निडरता के साथ किसी के सामने अपनी बात कहने की ताकत भी है। विपक्ष के नेता भी रघुवंश बाबू के कायल रहे हैं। लालू प्रसाद और रघुवंश बाबू देहाती राजनीति की उपज हैं। दोनों का जुदा होना भला कौन चाहेगा।

राजनीति संभावनाओं का खेल
अगर रघुवंश बाबू नहीं माने तो बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह राजद के लिए तगड़ा झटका है। पार्टी के दिग्गज नेता और लालू प्रसाद यादव के दोस्त रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से इस्तीफा  दे दिया है। हालांकि, उनके इस्तीफे के तुरंत बाद लालू यादव का एक पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने रघुवंश प्रसाद सिंह का इस्तीफा नामंजूर करते हुए मनाने की कोशिश की और कहा कि वो कहीं नहीं जा रहे हैं।

लालू यादव के इस डैमेज कंट्रोल का असर भी नजर आ रहा है। ऐसी संभावना है कि रघुवंश प्रसाद सिंह अपने फैसले से पीछे हट सकते हैं। वो एक या दो दिनों में अपना रुख पूरी तरह से साफ कर देंगे। कुछ समय पहले ही रघुवंश प्रसाद सिंह ने आरजेडी के उपाध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ही उनके आरजेडी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। उधर जदयू खुश है और उसे उम्मीद है कि रघुवंश बाबू उधर ही आएंगे।

लालू ने खुद संभाला मोर्चा
दूसरी ओर रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफे की खबर सामने आते ही लालू प्रसाद यादव ने मोर्चा संभाल लिया। डैमेज कंट्रोल करने के लिए जेल में बंद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पहल की और उन्होंने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को तत्काल रघुवंश प्रसाद सिंह से मुलाकात करने का निर्देश दिया। लालू के निर्देश पर तेजस्वी यादव के अलावा पार्टी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने रघुवंश प्रसाद सिंह से दिल्ली के एम्स में मुलाकात की है।

(अखिलेश अखिल वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं और आप की बिहार की राजनीति पर गहरी पकड़ है।)

This post was last modified on September 11, 2020 7:30 pm

Share