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अखलाक से इखलाक तक पांच सालों में बदल गया पूरा देश

28 सितंबर, 2015 (मोदी सरकार के सत्तासीन होने के साल भीतर) नोएडा के दादरी में बीफ रखने के आरोप में अख़लाक़ नामक अधेड़ व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। तब पूरे देश में मोदी सरकार के खिलाफ़ तीव्र प्रतिक्रिया हुई थी। विशेषकर बौद्धिक समुदाय के बीच में। लेकिन 23 अगस्त, 2020 को पानीपत में पानी मांगने पर हाथ काट दिया गया सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उसके हाथ में 786 लिखा हुआ था। जो उसकी मुस्लिम पहचान को उजागर करता था। लेकिन इस बार कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। आखिर क्या अखलाक़ से इकलाख़ तक के पांच सालों के सफ़र में मुस्लिमों की हत्याओं को मान्यता मिल गई?

आखिर जो बात प्रतिक्रियात्मक थी, वो नॉर्मल कैसे हो गई। तो इसका कारण भी अखलाक़ की हत्या में ही छुपी हुई है। जिस तरह से मरहूम अखलाक़ को ही आरोपी बनाकर उसके खिलाफ़ बीफ रखने का केस दर्ज़ किया गया और उसके हत्यारों को भाजपा विधायक की सिफारिश में एनटीपीसी में नौकरी दिलवाई गई उससे हत्यारों का मनोबल बढ़ा।

पीड़ित का बयान

इखलाक़ के भाई इकराम सलमानी के मुताबिक़ उसका 28 वर्षीय भाई नाई का काम करता है और कोरोना के चलते काम धाम न मिलने के चलते वो 15 दिन पहले सहारनपुर से पानीपत काम की तलाश में गया था। वहां कुछ लोगों ने उससे उसका नाम पूछा और मुस्लिम पहचान होते ही उस पर हमला कर दिया। 4 आदमी और दो औरतों ने जब उसके दाहिने हाथ पर ‘786’ लिखा टैटू देखा तो उसे पकड़कर ले गए और आरा मशीन से उसका हाथ काटकर उसे रेलवे पटरी पर फेंक दिए।

होश आने पर एक राहगीर की मदद से परिजनों को कॉल किया। भाई का आरोप है कि वह 15 दिन से किशनपुरा चौकी और थाना जीआरपी के चक्कर काट रहा है। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

कस्बा ननौता जिला सहारनपुर (यूपी) के रहने वाले इकराम सलमानी ने बताया कि भाई इकलाख 23 अगस्त को पानीपत काम की तलाश में आया था। अगले दिन सुबह करीब 5 बजे उसने किसी के मोबाइल से कॉल कर बताया कि उसकी हालत गंभीर है। उसने पानीपत में रहने वाले एक परिचित को इकलाख के पास भेजा। परिचित ने उसे किशनपुरा चौकी की मदद से सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया। वह उसी दिन सुबह 10 बजे पानीपत पहुंच गए। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया।

दुष्कर्म करके भागते वक़्त हादसे का शिकार होने से कटा हाथ- पानीपत पुलिस

किशनपुरा में युवक इखलाक का हाथ कटने की घटना में अब दूसरा पक्ष भी सामने आया है। डीएसपी सतीश वत्स कहना है कि उसका हाथ काटा नहीं गया, बल्कि ट्रेन से कटा था। वह सात वर्ष के बच्चे के साथ कुकर्म कर रहा था। स्वजनों ने उसे देख लिया। उसकी पिटाई कर दी। इसी दौरान वो वहां से फरार हो गया। रात को ट्रेन से उसका हाथ कट गया।

डीएसपी सतीश वत्स ने दूसरे पक्ष के बयान को पुलिस का आधिकारिक बयान बनाते हुए मीडिया से कहा- दूसरे पक्ष से बात की गई है। यहां रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि 23 अगस्त की रात को उसका सात वर्षीय बेटा चारपाई से गायब हो गया। उसने पत्नी को जगाया। पड़ोसियों की मदद से बेटे की तलाश शुरू कर दी। घर का पिछला गेट खुला मिला तो बच्चे को तलाशते हुए किशनपुरा पार्क में पहुंचे। वहां पर इखलाक बच्चे के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश कर रहा था। इखलाक ने उसकी तरफ ईंट फेंकी। फिर उसके साथ हाथापाई की। भाई मौके पर आया तो इखलाक पार्क की ग्रिल कूदकर नग्नावस्था में ही फरार हो गया। बच्चे के होंठ सूजे हुए थे, खून निकल रहा था।

परिवार के सदस्य बच्चे को लेकर घर लौट गये। पुलिस कार्रवाई के झंझट से बचने के लिए उन्होंने मामले की शिकायत नहीं की। इधर, आरोपित गोहाना रोड पर रेलवे ट्रैक पार करने की कोशिश करने लगा तो ट्रेन की चपेट में आ गया।

डीएसपी सतीश वत्स के मुताबिक, इखलाक ने स्टेशन अधीक्षक धीरज कपूर और आरपीएफ के जवान को ट्रेन की चपेट में आने से हाथ कटने की बात कही थी। जीआरपी ने उसे सामान्य अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया।

दोनों तरफ की पुलिस झाड़ती रही पल्ला
7 सितंबर को दोनों पक्षों की एफआईआर दर्ज़ की गई। पुलिस के मुताबिक़ दूसरे पक्ष ने पुलिस की झंझट से बचने के लिए शिकायत नहीं दर्ज़ करवाया था। जबकि इखलाक़ के भाई इकराम का आरोप है कि किशनपुरा चौकी तो कभी जीआरपी थाने का चक्कर काटते रहे हैं। दोनों ही पुलिस अपने-अपने क्षेत्र का मामला न होने की बात कह रही है। इसलिए उसने सोशल मीडिया पर मामला वायरल कर दिया। मामला वायरल होने पर जीआरपी ने जीरो एफआइआर दर्ज कर केस थाना चांदनी बाग ट्रांसफर कर दिया। जीआरपी के एसएचओ राजकुमार का कहना है कि मामला चांदनीबाग थाने का है। फिलहाल बयान दर्ज कर लिए हैं। केस दर्ज कर थाना चांदनीबाग को भेजा जाएगा।

पीड़ित को आरोपी बना देने का इतिहास

मोदी सरकार में पिछले 6 साल में पीड़ित को ही आरोपी बना देने का पूरा इतिहास है। अखल़ाक की मॉब लिचिंग होने के बाद यूपी पुलिस ने अखलाक़ पर ही बीफ रखने का केस दर्ज़ किया था। इसी तरह कासिम की मॉब लिचिंग होने पर उसे चोर, और पहलू ख़ान की मॉब लिचिंग होने पर उसे गौ तस्कर साबित करके आरोपियों को छोड़ दिया गया था।

जेएनयू में छात्रों पर हमला करके उन्हें लहूलुहान करने की घटना के बाद पीड़ित पक्ष को ही आरोपी बनाकर जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत तमाम लोगों के खिलाफ़ केस दर्ज़ करवा दिया गया था। इसी तरह फरवरी, 2020 में प्रायोजित दिल्ली हिंसा में पीड़ित पक्ष को ही साजिशकर्ता बनाकर जेलों में ठूंस दिया गया जबकि असली अपराधियों को पुलिस ने लिखित शिकायत के बावजूद, तमाम वायरल वीडियो फुटेज के बावजूद पूछताछ तक के लिए नहीं बुलाया। ख़ैर ये मोदी सरकार की पुलिस है इसका काम करने का यही तरीका है। वो गांव में एक कहावत है ना कि – ‘जबरा मारै, रोवन न देय’। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on September 11, 2020 6:33 pm

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