Sunday, October 17, 2021

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देश की मान, मर्यादा और प्रतिष्ठा को धूल-धूसरित कर रही है नफ़रत और घृणा की चाशनी में पगी जाहिल भक्तों की जमात

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पिछले कुछ वर्षों में देश के अंदर सुनियोजित षड्यन्त्र के तहत जिस प्रकार एक समुदाय विशेष के प्रति नफरत को फैलाकर सियासत साधने की कोशिश की गई अब उसके दुष्प्रभाव सामने आने शुरू हो गए हैं। 

फर्जी राष्ट्रवादियों ने देश के माहौल को इतना दूषित कर दिया है कि विदेशों में रह रहे करोड़ों भारतीयों के रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश को शर्मसार होना पड़ रहा है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन नफरती अलगाववादियों और अराजक लोगों की हरकतों के कारण भारतीय राजदूत को आगे आकर संदेश देना पड़ गया है।

ताजा मसला खाड़ी के देश संयुक्त अरब अमीरात की राजकुमारी हेंद अल कासिमी के ट्वीट से जुड़ा हुआ है। दरअसल कोरोना संकट के बीच तबलीगी जमात के बहाने एक देश के अंदर एक सम्प्रदाय विशेष को जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है वह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। सोशल मीडिया पर भद्दी-अश्लील टिप्पणियाँ और अभद्र भाषा के प्रयोग ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। ट्विटर पर ऐसे ही एक अलगाववादी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए संयुक्त अरब अमीरात की राजकुमारी हेंद अल कासिमी ने कड़ा एतराज  जताया ।

संयुक्त अरब में एक महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत कारोबारी सौरभ उपाध्याय ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट करते हुए तबलीगी जमात के लोगों को भारत में कोरोना फैलाने का जिम्मेदार बताते हुए मुस्लिम समुदाय पर अभद्र टिप्पणी की थी। जिसमें उन्होंने मुस्लिम संप्रदाय के सदस्यों को “इस्लामी आतंकवादी” तक कहा। अपने ट्वीट में उसने गलियों का भी प्रयोग ट्रोल भाषा में किया। 

सौरभ उपाध्याय ने लिखा कि ये लोग सुसाइड बम्बर से ज्यादा खतरनाक हैं, ये लोग रेडिकल इस्लामिक टेरिरिस्ट हैं, इन पर नजर रखा जाना चाहिए। मुसलमानों का एक ही ईलाज है कि इनका सामाजिक -आर्थिक बहिष्कार किया जाए। सौरभ ने अपने एक अन्य ट्वीट में ये भी दावा किया कि दुबई शहर को हिंदुओं ने बनाया है और विशेष समुदाय ने उसे हड़प लिया।

इसी बीच कुछ वर्ष पुराना एक अन्य ट्वीट भी सोशल मीडिया में तैरने लगा। ये ट्वीट बीजेपी नेता तेजस्वी सूर्या की था।

इस ट्वीट में तेजस्वी सूर्या ने तारिक फतेह के एक बयान के संदर्भ में मुस्लिम महिलाओं के लिए बेहद अभद्र और अपमानजनक शब्द का प्रयोग करते हुए लिखा कि – ” अरब की करीब 95% मुस्लिम महिला ‘एक्ट ऑफ सेक्स’ की वजह से माँ बनती है।” हालाँकि बाद में विवाद बढ़ने पर तेजस्वी सूर्या ने अपने ट्वीट को डिलीट करते हुए माफी माँग ली थी।

सौरभ उपाध्याय जैसे अराजक तत्व ऐसे नफरती ट्वीट तो कर देते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि नफरत की आग में अंततः नफरती अराजक तत्वों को ही जलना होता है। इस ट्वीट के बाद संयुक्त अरब अमीरात की राजकुमारी हेंद अल कासिमी ने इस तरह के ट्वीट पर असहमति जताई और ट्विटर उपभोक्ता के ट्वीट को ‘इस्लामोफोबिक ट्वीट’ बताया। हेंद अल कासिमी ने महात्मा गांधी की याद दिलाती हुई लिखीं –

“मैं भारतीयों के साथ पली-बढ़ी हूँ , वे इस तरह के नहीं होते। गांधी सभी लोगों के अधिकारों व गरिमा के लिए बेखौफ होकर अभियान चलाते थे, उन्होंने लोगों के दिल व दिमाग को जीतने के लिए लगातार अहिंसा को बढ़ावा दिया, इसने पूरी संसार पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी।”

संयुक्त अरब अमीरात की एक बड़े व्यापारिक घराने से ताल्लुक रखने वाली महिला जो हेट स्‍पीच के खिलाफ अभियान भी चलाती हैं, जब इस प्रकार की बात करती हैं तो इसकी अहमियत को सहज समझा जा सकता है। हमें ठहर कर सोचना ही होगा …  सौरभ उपाध्याय जैसे जाहिलों और नफ़रती अराजक व्यक्तियों के कारण देश कब तक शर्मसार होता रहेगा।

राजकुमारी हेंद अल कासिमी ने लिखा कि UAE में इस तरह का व्यवहार और बयान सहन नहीं किया जाएगा। घृणा फैलाने वाली बातें नरसंहार की शुरुआत करने की तरह है। अल कासिमी ने यूएई में रह रहे भारतीय हिंदुओं को मुस्लिमों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर कड़ी चेतावनी दी। कासिमी ने कुछ भारतीयों के आपत्तिजनक ट्वीट के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए यहाँ तक कह डालीं कि- “कोई भी जो खुले तौर पर यूएई में नस्लवादी और भेदभावपूर्ण व्यवहार करता है, उस पर जुर्माना लगाया जाएगा और उसे देश छोड़ने के लिए कहा जाएगा”।

शेख हिंद कासिमी ने ये भी कहा कि-  “सत्तारूढ़ परिवार भारतीयों के अच्छे दोस्त हैं, लेकिन एक शाही के रूप में आपकी अशिष्टता का स्वागत नहीं है। सभी कर्मचारियों को काम करने के लिए भुगतान किया जाता है, कोई भी मुफ्त में नहीं आता है, आप इस जमीन से अपनी रोटी कमाते हैं जिसे आप खाते हैं, ऐसे में नफरती बयान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किए जा सकते”। 

इतना ही नहीं, कुवैत में मिनिस्ट्री ऑफ अवकॉफ और इस्लामिक अफेयर्स के एक मिनिस्टर अब्दुल्ला अल सूर्यखां ने ट्वीट कर लिखा – “मुसलमानों के साथ जो व्यवहार हो रहे हैं, और जिस तरह उन पर लगातार हमले हो रहे हैं उससे भारतीय गुड्स के लिए बाज़ार में संकट में खड़ा जाएगा, उन पर पाबंदी लग जाएगी”।

स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए भारतीय राजदूत पंकज कपूर को आगे आना पड़ा। पंकज कपूर ने ट्वीट करते हुए लिखा-  “कुछ लम्पट, अराजक दिमाग वाले लोग अपनी हरकतों से अरब में बैठे तीन करोड़ भारतीयों और भारत में उन पर निर्भर अन्य तीन करोड़ की रोटी-रोजी, जीवन सभी को दांव पर लगा रहे हैं”

अब समय आ गया है कि हम ठहर कर सोचें … सौरभ उपाध्याय जैसे अलगाववादी लोग तो नफरत फैलाकर अपने ट्विटर एकाउंट को डीएक्टिवेट करके गायब हो गए लेकिन कितने भारतीयों की रोजी-रोटी पर संकट उत्पन्न कर दिया। गाँधी के इस देश की प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिर रही है, भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि अब धूमिल हो रही है। सबसे अहम कि आख़िर कौन सी वह शक्ति और विचारधारा है जो ऐसे अराजक अलगाववादियों को नफरत फैलाने की शक्ति और सहयोग प्रदान करती है ? 

कौन सी विचारधारा ऐसे कम्यूनल क्रिमिनलों को कवर फायर दे रही है?

(दया नन्द स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और शिक्षा के पेशे से जुड़े हैं।)

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