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भारत को बचाना है, न्यूज़ चैनलों को भगाना है; बंद करो टीवी, बंद करो

गुजरात के लाखों युवाओं को बधाई। आखिर उन्होंने सरकार को मानने के लिए बाध्य कर दिया। अब 12 वीं की योग्यता वाले भी इम्तहान दे सकेंगे। परीक्षा की तारीख़ भी आ गई है। 17 नवंबर को परीक्षा होगी।

छात्रों इसी बहाने आपसे अपील है।

न्यूज़ चैनल राम के बहाने उन्माद फ़ैलाने में लग गए हैं। राम मर्यादा पुरुष कहे गए हैं। उनके नाम पर पत्रकारिता की सारी मर्यादाएं तोड़ी जा रही हैं।

उन्हें पता है कि आप राम को आदर्श मानते हैं। लेकिन चैनल वाले उनके नाम पर हर ग़लत और झूठ को हवा दे रहे हैं। उनकी भाषा में जो आग है वो झूठ की आग है। उन्हें राम से मतलब नहीं है। वे राम के नाम पर एक पार्टी का वोटर बना रहे हैं। आप दर्शक हैं। टीवी के सामने आपकी एक ही पहचान है। सिर्फ और सिर्फ दर्शक की।

आपकी पहचान पर हमला हो रहा है। आप मरते हैं तो चैनल नहीं आते। आपकी नौकरी के सवाल पर चैनल नहीं आते हैं। आपकी शिक्षा के सवाल पर चैनल नहीं आते हैं। यह राम का भारत नहीं हो सकता है।

इसलिए एक बार सोच समझ कर फ़ैसला कर लीजिए। अगर आपको अंधेरे का यह रास्ता सही लगता है तो उसी तरफ़ निकल पड़िए। लेकिन फ़ैसला सोचा-समझा होना चाहिए। अगर चैनलों का यह रास्ता सही नहीं लगता है तो फिर घर-घर से टीवी कनेक्शन कटवाने के आंदोलन में शामिल हो जाइये।

भारत की पत्रकारिता भारत को शर्मसार कर रही है। मर्यादा राम को कलंकित कर रही है। राम सत्य के प्रतीक हैं। चैनलों पर हर दिन हुज़ूर-ए-हिन्द की शान में झूठ परोसा जा रहा है। जनता की आवाज़ का गला घोंटा जा रहा है।

मेरी बात न मानिए लेकिन कुछ देर के लिए सोच कर देखिए। आस्था के नाम पर यूपी और बिहार को लंबे समय के लिए अंधेरे में धकेला जा रहा है। इन दो प्रदेश के लोग पूरे देश में दर-बदर हैं। कालेज ठप्प हैं। कोचिंग कोचिंग शहर-शहर बदल रहे हैं। मज़दूरी के लिए केरल तक जा रहे हैं। महानगरों में हाड़ तोड़ रहे हैं। राम के नाम पर नेताओं को आराम है।

देश में इतनी समस्याएं हैं। सवाल हैं। सारे सवाल स्थगित कर उन्माद फैलाया जा रहा है।

मेरी बात मानिए। न्यूज़ चैनल नहीं देखेंगे तो आपका कुछ नहीं बिगड़ेगा। इन चैनलों में अब कोई सुधार की संभावना नहीं बची है। इसलिए टीवी देखना बंद कीजिए।

बहुत ही प्यारा मुल्क है ये। इसकी फिज़ा को बर्बाद कर दिया गया है। भारत के न्यूज़ चैनल लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। आप इस हत्या के मूक साक्षी नहीं बन सकते। पंजाब महाराष्ट्र कोपरेटिव बैंक के तीन लोगों की मौत हो गई। चैनलों पर मंदिर का कार्यक्रम चल रहा है। उनका सारा पैसा ऐसे विषयों पर खर्च हो रहा है। पत्रकारिता पर नहीं।

आप यकीकन भारत से बहुत प्यार करते हैं। आप इसके लोकतंत्र को चंद चैनलों के ज़रिए कैसे बर्बाद होने दे सकते हैं। आप राम को भी प्यार करते हैं। यकीनन आप उनके देश में कैसे मर्यादाओं की धज्जियां उड़ने दे सकते हैं?

भारत को बचाना है, न्यूज़ चैनलों को भगाना है। बंद करो टीवी बंद करो।

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है।)

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