आइने में उत्तर-पूर्व-1: “असम के मुसलमानों को एनआरसी से फायदा हुआ”

Estimated read time 1 min read

(इंदौर से पत्रकारों की एक टीम असम और नगालैंड के दौरे पर गयी थी। इस दौरान उसने असम में एनआरसी और नगालैंड में जारी अलगाववादी आंदोलन का बेहद करीब से जायजा लिया। टीम में शामिल दीपक असीम और संजय वर्मा ने वहां से लौटकर कुछ रिपोर्ट लिखी हैं। उनकी कुछ रिपोर्टें जनचौक पर दी जा रही हैं। पेश है उसकी पहली किस्त-संपादक)

गुवाहाटी। हम एनआरसी का समर्थन करते हैं, उसका स्वागत करते हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में एनआरसी की प्रक्रिया बिल्कुल पारदर्शी रही। लाखों मुसलमानों पर तलवार लटक रही थी कि वह बांग्लादेशी हैं। एनआरसी के जो आंकड़े आए हैं। उनसे लाखों मुसलमानों के ऊपर से हर तरह का संदेह हट गया है। हमें चिंता इस बात की है कि हमारे गृहमंत्री अमित शाह एनआरसी को सिर्फ मुसलमानों के लिए बताते हैं।

उनका यह कहना बहुत ही शर्मनाक है कि हम धर्म के आधार पर नागरिकता तय करेंगे। यह कानून और संविधान दोनों के खिलाफ है। यह सब बातें ऑल इंडिया यूनाइटेड फ्रंट के मुखिया और सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कही। वे असम का मुस्लिम चेहरा हैं। गुवाहाटी के दौरे पर गए दीपक असीम से उन्होंने विस्तार से बातचीत की। पेश है बदरुद्दीन अजमल से  बातचीत का पूरा ब्योरा।

दीपक असीम: आप पर आरोप है कि आपने लाखों बांग्लादेशी मुसलमानों को फर्जी कागजात से भारत का नागरिक बनवा दिया है। असम भाजपा एनआरसी के परिणामों से नाराज है। उसका कहना है कि फिर से एनआरसी होना चाहिए।

बदरुद्दीन अजमल: एनआरसी में सारी जांचें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार हुई हैं। भाजपा शुरू से कहती रही कि असम में एक करोड़ बांग्लादेशी मुस्लिम हैं। अब वह नहीं है तो मैं क्या कर सकता हूं। यह जो जांच हुई है इसमें 96% अफसर असम के हिंदू अफसर थे। मुसलमानों की तो 4% भी भागीदारी प्रशासन में नहीं है। असल बात यह है की एनआरसी का दांव भाजपा के लिए उल्टा पड़ गया है। अभी जो 19 लाख लोग भारत से बाहर के माने जा रहे हैं उनमें ग्यारह लाख हिंदू हैं। दो लाख बच्चे हैं और करीब छह लाख मुसलमान हैं। यह आंकड़ा कुछ दूसरे लोगों ने बताया है और सभी जगह यह बात चल रही है। एक अफवाह थी जो सच नहीं निकली इसका मैं जिम्मेदार नहीं हूं।

असम में एनआरसी की प्रक्रिया।

दीपक असीम: एनआरसी के नतीजों से आप सन्तुष्ट हैं?

 बदरुद्दीन अजमल: हां बिल्कुल संतुष्ट हूं। क्योंकि जो भी कुछ हुआ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ। लाखों मुसलमानों के सिर पर जो तलवार लटकती रहती थी वह तलवार हट गई। अब हर मुसलमान की जेब में भारत का नागरिक होने का प्रमाण पत्र रखा है। यह एक बहुत बड़ी राहत है और अफवाहों का वाजिब जवाब है।

दीपक असीम: एनआरसी में जिन लोगों के नाम नहीं आए उन लोगों के लिए आप क्या कहते हैं?

बदरुद्दीन अजमल: मैंने तो संसद में कहा था कि जितने घुसपैठिए हैं सबको बॉर्डर पर ले जाकर गोली मार दो। मगर तय करो कि कौन घुसपैठिया है। सब पर शक मत करो। इससे पहले यह लोग घुसपैठियों को जंगल में ले जाकर छोड़ देते रहे हैं। अगर वह बचकर निकल गया या वापस आ गया तो ठीक। नहीं तो जानवर उसे खा जाते थे। जब मैंने संसद में कहा की घुसपैठियों को गोली मार देना चाहिए तो मेरे अपने वोटर नाराज हुए लेकिन मैंने उनकी नाराजगी सही और सच का साथ दिया।

दीपक असीम: लेकिन जो लोग एनआरसी की लिस्ट से बाहर रह जाएंगे उनका आखिर होगा क्या, होना क्या चाहिए?

बदरुद्दीन अजमल: सबसे इंसानियत का बर्ताव होना चाहिए हालांकि अभी कुछ फाइनल होने में बहुत देर है। जिन 19 लाख लोगों के नाम एनआरसी में आने से रह गए हैं उन्हें फॉरेन ट्रिब्यूनल में जाकर नागरिक होने का दावा पेश करना है। मगर उसके लिए खास अदालतें बहुत कम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पूरे असम में 1 हज़ार विशेष अदालतें बनाई जाएं। सुनते हैं कि सरकार 300 बनाने पर राजी है। मगर अभी तो वह 300 अदालतें भी बनी नहीं हैं। पहले वह अदालत बनेगी जिनमें लोग दावा पेश कर सकें। फिर बाद में सरकार 120 दिन का समय सब को देगी। उसके बाद आदमी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है।

दीपक असीम: क्या यह प्रक्रिया बहुत लंबी और तनाव देने वाली नहीं है?

बदरुद्दीन अजमल: यहां पर 100 से ज्यादा लोग इस तनाव में आत्महत्या कर चुके हैं अभी और पता नहीं कितने लोग इस तनाव में खुदकुशी कर बैठेंगे।

शेख हसीना और पीएम मोदी।

दीपक असीम: आखिर यह सब कब तक चलता रहेगा और अगर यह पूरे देश में चला तो क्या होगा?

बदरुद्दीन अजमल: देश के जो राज्य एनआरसी की मांग कर रहे हैं उन्हें असम से सबक लेना चाहिए। अफवाहें सच नहीं होतीं। एनआरसी कराने में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है। मगर अंत में ना पानी काम का रहता है ना दूध।

दीपक असीम: क्या आप सरकार को यह सलाह देंगे की वह बांग्लादेश सरकार से बात करे और कहे कि आप अपने इलाके से हमारे इलाके में घुसपैठिए ना आने दें? क्या आप बांग्लादेश सरकार से बात करने वाली किसी कमेटी में शामिल होना चाहेंगे?

बदरुद्दीन अजमल: आपने बिल्कुल वाजिब बात कही। मेरे भी मन में यह सवाल आ रहा है कि अभी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना हमारे यहां आई थीं। तब प्रधानमंत्री ने उनसे क्यों नहीं कहा कि आप अपने नागरिकों का कुछ कीजिए और जो हमारे यहां हैं उन्हें ले जाइए। उल्टे शेख हसीना यह कह कर गई हैं कि मुझे मोदी जी ने भरोसा दिया है की एनआरसी का दोनों देशों के संबंधों पर कोई असर नहीं होगा।

अगर भाजपा सचमुच ही बांग्लादेशियों के घुसपैठ से परेशान है तो उसे बात करनी चाहिए थी लेकिन उल्टे उन्होंने आश्वस्त कर दिया की दोनों देशों के संबंधों में इससे असर नहीं पड़ेगा। इसी से मालूम पड़ता है कि भाजपा करोड़ों मुस्लिम घुसपैठियों का झूठा हल्ला मचाती है। जमीन पर ऐसा कुछ नहीं है यह उसे भी पता है। आपने सही कहा कि अगर ऐसी कोई कमेटी बनती है तो मैं उसमें जाऊंगा और बांग्लादेश से भी एक आंकड़ा पूछूंगा कि आप के हिसाब से हमारे यहां कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं।

दीपक असीम: अमित शाह  ने कहा कि वे नागरिकता संशोधन बिल लाएंगे। आप इस पर क्या कहेंगे?

बदरुद्दीन अजमल: उन्होंने जो कहा वह बहुत गलत कहा। उनके हिसाब से जो घुसपैठिए हैं वह अगर मुसलमान नहीं है तो उनका स्वागत है और मुसलमान हैं तो पकड़ लेंगे। यह संविधान के भी खिलाफ है और कानून के भी। देश का गृहमंत्री ऐसा कहे तो यह बहुत अफसोसनाक है।

You May Also Like

More From Author

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments