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Categories: बीच बहस

जब पूरी दुनिया जीवन बचाने में लगी है, हिंदुत्ववादी नाज़ी हत्या के हथियार खरीद रहे हैं

COVID-19 के कहर से जब पूरी दुनिया के मनुष्यों के जीवन पर संकट छाया हुआ है। दुनिया के तमाम देश अपनी जीडीपी की भारी भरकम रकम कोरोना से सुरक्षा और बचाव पर खर्च कर रहे हैं भारत की सत्ता पर काबिज हिंदुत्ववादी नाजी इजरायल से हत्या के हथियार खरीदने पर भारी रकम खर्च कर रहे हैं।

करीब एक सप्ताह पहले भारत ने इजरायल से 880 करोड़ रुपए की डील साइन की है। जिसके तहत इजरायल की वीपन इंडस्ट्री भारत को 16,479 लाइट मशीन गन (LMG) बेचेगी। ये डील फास्ट ट्रैक प्रोसीजर के तहत हुई है।

बता दें कि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अप्रूवल के बाद भारत के रक्षा मंत्रालय ने इजरायल वीपन इंडस्ट्रीज़ के साथ इस डील को साइन किया।

जबकि भारत के सरकारी अस्पालों के मेडिकल स्टॉफ के पास कोरोना संक्रमित मरीजों को देखने के लिए एन-95 मास्क, और ग्लव्स तक नहीं हैं। पीपीई किट स्तर पर भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की इस स्थिति की बदतरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 जनवरी को भारत के पहले COVID-19 संक्रमित मरीज को देखने वाले डॉक्टर खुद COVID-19 संक्रमित हो गए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमित मरीज के देखते समय उनके पास पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) नहीं था।

जुलाई 2018 में भारत ने अमेरिकी कंपनी Sig Sauer से 72,400 असॉल्ट राइफल और 93, 895 कार्बाइन खरीदा था।

स्वास्थ्य बजट बनाम सुरक्षा बजट

1 फरवरी, 2020 को प्रस्तुत किए गए वर्ष 2020-21 के बजट में रक्षा बजट को 4,71,378 करोड़ रुपए आवंटित किए गए जो कि वर्ष 2020-21 के कुल बजट का 15.49 प्रतिशत है।

जबकि वर्ष 2020-21 के हेल्थ बजट के लिए 69,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। जो कि कुल बजट 3,242,230 का महज 2.268 प्रतिशत ही है।

भारत का हेल्थ बजट चुनावी वर्ष 2019-20 के लिए 61,398 करोड़ है जबकि इससे एक साल पहले यानि 2018-19 में 52,800 करोड़ रुपए था। जबकि 2019-20 का अंतरिम रक्षा बजट 4,31,011 करोड़ रुपए था।

स्वास्थ्य सेवा सुलभ होने के मामले में भारत दुनिया के 195 देशों में 154वें पायदान पर है। यहां तक कि यह बांग्लादेश, नेपाल, घाना और लाइबेरिया से भी बदतर हालत में है। स्वास्थ्य सेवा पर भारत सरकार का खर्च (जीडीपी का 1.15 फीसदी) दुनिया के सबसे कम खर्चों में से एक है। देश में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे और इस क्षेत्र में काम करने वालों की भी बेतहाशा कमी है ।

भारत में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च सबसे कम है। स्वास्थ्य सेवा उपलब्धता के मामले में प्रति डॉलर प्रति व्यक्ति सरकारी खर्च की बात की जाए, तो भारत में यह 1995 में 17 डॉलर था जो 2013 में 69 और 2017 में 58 डॉलर प्रति व्यक्ति सालाना हो गया।

दूसरे देशों के साथ तुलना की जाए तो हम इस मामले में बेहद, बेहद पीछे खड़े हैं।

मलेशिया में यह खर्च 418 डॉलर है, चीन में 322, थाइलैंड में 247 फिलीपींस में 115, इंडोनेशिया में 108, नाइजीरिया में 93 श्रीलंका में 88 और पाकिस्तान में 34 डॉलर है।

मोदी के सत्ता में काबिज होने के बाद जीडीपी का स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च का प्रतिशत बद से बदतर होता गया।

सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) में से स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाले खर्च के आंकड़े को देखें तो वहां भी हमारा देश दूसरे देशों की तुलना में कहीं नहीं ठहरता। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद ये स्थिति भयावह होती गई।

वर्ष 1995 में यह 4.06 फीसदी था जो 2013 में घटकर 3.97 फीसदी हो गया।

मोदी सरकार बनने के बाद साल 2017 में ये आँकड़ा भयावह हद तक घटता हुआ 1.15 फीसदी हो गया।

भारत की तुलना में अगर दूसरे देशों का आँकड़ा देखें तो अमेरिका में यह जीडीपी का 18 फीसदी, मलेशिया में 4.2 फीसदी, चीन में 6, थाइलैंड में 4.1 फीसदी, फिलीपींस में 4.7 फीसदी, इंडोनेशिया में 2.8, नाइजीरिया में 3.7 श्रीलंका में 3.5 और पाकिस्तान में 2.6 फीसदी है।

पीपीई ज़रूरी है या मशीन गन

दुनिया भर में 50 से ज़्यादा डॉक्टर COVID-19  संक्रमित मरीजों करा इलाज करते हुए खुद संक्रमित होकर मर गए। अकेले इटली में 28, चीन में 9 और इंडेनेशिया में 7 डॉक्टर COVID-19 से संक्रमित होकर मारे गए हैं। भारत में पहले कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर समेत 2 डॉक्टर COVID-19 पोजिटिव पाए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी COVID-19 महामारी के खिलाफ लड़ने के बजाय तमाशा लगाए हुए हैं।

कभी वो इन डॉक्टरों के लिए थाली पिटवाते हैं तो कभी थाली। देश को अवाम को प्रधानमंत्री मोदी से उनके ट्विटर एकाउंट पर जाकर पूछना चाहिए कि मोदी जी देश को इस वक्त पीपीई किट की ज़रूरत है, खाने पीने के सामान की ज़रूरत है या मशीन गन की। लॉकडाउन के पीरियड में जो पैसा आपको लोगो के रोजमर्रा की बुनियादी ज़रूरतों को पूरी करने में खर्च करना चाहिए उस पैसे को आप मशीन गन खरीदने में क्यों खर्च कर रहे हैं? जब पूरी दुनिया मनुष्यों को बचाने के अभियान में जुटी हुई है आप हत्या के हथियार क्यों खरीद रहे हैं? पूरी दुनिया में तो सब खुद ही COVID-19 से मर रहे हैं अब आप और किसे मारना चाहते हैं?

(माही पांडेय की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on March 25, 2020 10:55 pm

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