Subscribe for notification
Categories: बीच बहस

निर्भया के समय मुखर रहीं भाजपा की नेत्रियां हाथरस मामले में क्यों हैं खामोश!

साल 2012 की कड़ाके की ठंड के दौरान दिल्ली में निर्भया कांड हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उसके बाद अब साल 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक और कांड हुआ है। साल 2012 से लेकर 2013 तक देश भर में जहां-जहां बीजेपी थी, सभी जगह रेप के विरोध में प्रदर्शन हुए, जुलूस निकले, मोमबत्तियां जलाईं। बड़े नेताओं से लेकर छोटे नेताओं तक ने निर्भया की राजनीति में अपने हाथ सेंके। अब जबकि हाथरस कांड हुआ है, इस एपीसोड में हम बीजेपी की दस फायर ब्रांड महिला नेताओं और चेहरों के बारे में जानेंगे कि यह लोग निर्भया कांड के वक्त कहां थे, क्या कर रहे थे और अब जबकि हाथरस में निर्भया जैसा, बल्कि एक मायने में उससे भी जघन्य, जिसमें खुद शासन-प्रशासन के शामिल होने की बात सामने आई है, बीजेपी के दस फायर ब्रांड चेहरे पिछले एक हफ्ते यानी कि 28 सितंबर से 4 अक्टूबर तक कहां थे, क्या कर रहे थे?

1. स्मृति ईरानी

https://www.indiatoday.in/india/video/delhi-gangrape-bjp-mp-smriti-irani-death-for-rapists-parliament-405919-2012-12-18

शुरुआत स्मृति ईरानी से करते हैं। दिल्ली के निर्भया कांड के वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए चूड़ियां लेकर पहुंचीं स्मृति ईरानी के मुखारबिंद से हाथरस पीड़िता के लिए एक अदद शब्द नहीं निकला है। 3 अक्तूबर को नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में कृषि कानूनों का प्रचार करने पहुंचीं स्मृति ईरानी को वहां के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे और चूड़ियां दिखाईं। 12 अक्तूबर 2012 को जब ये बलात्कार के विरोध में हरियाणा में प्रदर्शन करने जा रही थीं तो भूपिंदर हुड्डा सरकार ने इन्हें डीटेन किया था। 3 अक्तूबर को जब कांग्रेसियों ने इन्हें बनारस में काले झंडे दिखाए तो उन्होंने कहा कि उन्हें आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा है, उन्होंने उनसे बात की है, दोषियों को सजा मिलेगी, लेकिन दामिनी कांड पर स्मृति ईरानी की ट्विटर प्रोफाइल बताती है कि चार अक्तूबर को इन्होंने कुल पांच ट्वीट किए। एक में काले कृषि कानूनों का प्रचार किया तो चार में नरेंद्र मोदी का ट्वीट रिट्वीट किया।

तीन अक्तूबर को उन्होंने दस रिट्वीट किए। इसमें एक पीयूष गोयल और बाकी नौ नरेंद्र मोदी के ट्वीट थे। हाथरस पीड़िता इनमें भी नहीं थी। 2 अक्तूबर को स्मृति ईरानी के खाते में 29 ट्वीट हैं। इनमें से 25 तो नरेंद्र मोदी और इक्का-दुक्का दूसरे लोगों के ट्वीट्स रिट्वीट किए गए हैं, चार इनके खुद के हैं। इनमें भी कहीं हाथरस केस का जिक्र नहीं है। पहली अक्तूबर को स्मृति ईरानी ने 24 ट्वीट किए हैं। इसमें से तीन-चार तो इनके खुद के हैं, जिसमें इन्होंने लोगों को हैप्पी बर्थडे वगैरह बोला है, बाकी के ट्वीट्स में इन्होंने नरेंद्र मोदी, पीआईबी फैक्ट चेक, नीति आयोग, हिंदुस्तान टाइम्स और दैनिक जागरण में सरकारी नीतियों के समर्थन में छपे दो लेख, योगी आदित्यनाथ के धान खरीद के दो ट्वीट और कई सारे प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर के ट्वीट्स रिट्वीट किए है। यहां भी हाथरस का कोई जिक्र नहीं किया है। इसी तरह से बाकी दिनों में भी उन्होंने हाथरस पीड़िता के बीरे में अपने किसी भी ट्वीट में दो शब्द लिखने की भी जरूरत नहीं समझी।

2. निर्मला सीतामण

https://www.csmonitor.com/World/Asia-South-Central/2012/1221/Delhi-gang-rape-case-could-be-turning-point-for-India-s-rape-laws

अब चलते हैं मोदी की फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमन के ट्विटर एकाउंट की तलाशी लेने। पहले आपको बता दें कि दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड में निर्मला जी कहां थीं, क्या कर रही थीं। तब मोहतरमा बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता थीं और 21 दिसंबर 2012 को उन्होंने बयान दिया था कि हर राजनीतिक दल को निर्भया कांड पर आगे आना चाहिए और कहा था कि चूंकि अब दिल्ली सरकार औरतों को सुरक्षा देने में नाकाम हो गई है तो संसद में इसके लिए कानून बनाना चाहिए। अब चलते हैं निर्मला जी के वर्तमान में। चार अक्तूबर को इनकी प्रोफाइल पर पहला ट्वीट हरि मांझी के ट्वीट का रीट्वीट है, जिसमें वे दिखा रहे हैं कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हाथरस की पीड़िता से मौज मजा लेने के लिए मिलने जा रहे हैं। उसी तारीख को उन्होंने अटल टनल के लिए बधाई दी है।

दो अक्तूबर को निर्मला सीतारमन के खाते में एक भी ट्वीट नहीं है। माना कि उनकी हाथरस की गैंगरेप पीड़िता से वैचारिक रंजिश हो सकती है, मगर महात्मा गांधी के लिए भी उनके मुंह से एक अक्षर नहीं निकला है। हो सकता है कि उस दिन उन्होंने ट्वीट व्रत रखा हो। पहली अक्तूबर को 16 ट्वीट किए हैं, जिसमें से नब्बे प्रतिशत तो उन्होंने अपने खुद के ऑफिस के ट्वीट्स रीट्वीट किए हैं। खुद एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को हैप्पी बर्थडे बोला है। यहां भी निर्मला जी के मुखारबिंद से उस बच्ची के लिए एक शब्द भी नहीं निकला है, जिसे हमने आधी रात को जबरदस्ती जलते देखा है। 30 सितंबर को उन्होंने कुल छह ट्वीट किए हैं। इनमें से दो उन्होंने खुद किए हैं, जिसमें किसी के पिता के मर जाने पर कंडोलेंस दी है, और एक में उन्होंने कांग्रेस को घेरने की असफल कोशिश की है। बाकी के तीन उन्होंने अपने ही दफ्तर को अपने यहां रीट्वीट कर लिया है।

अब चलते हैं 29 सितंबर की तारीख पर। इस दिन उन्होंने कुल जमा तीन ट्वीट किए हैं, दो में कांग्रेस को कृषि कानून पर घेरने की असफल कोशिश की है और बाकी के एक में उन्होंने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का एक ट्वीट रीट्वीट किया है। 28 सितंबर को इन्होंने एक भी ट्वीट नहीं किया है। फिर 27 सितंबर को अरविंद पनगढ़िया के चार ट्वीट रीट्वीट किए हैं। निर्मला सीतारमन अक्सर अपनी स्त्री पहचान जाहिर करती रहती हैं, लेकिन शायद हाथरस की बेटी को वे स्त्री जाति का ही नहीं मानती होंगी। या फिर शायद ब्राह्मण होकर कैसे कोई दलित के गैंगरेप और हत्या पर बोल सकता है, अपवित्र न हो जाए, यह सोचकर उनके मुंह से पीड़िता के लिए एक शब्द न निकले हों।

3. पंकजा मुंडे

कभी महाराष्ट्र में बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए ढका-छुपा दावा करने वाली महाराष्ट्र बीजेपी की फायरब्रांड नेता पंकजा गोपीनाथ मुंडे के मुंह से भी हाथरस पीड़िता के लिए एक शब्द नहीं निकले हैं। चार अक्तूबर को पंकजा मुंडे ने कुल एक ट्वीट किया और केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री श्रीपद नायक को हैप्पी बर्थडे बोला। फिर तीन अक्तूबर को उन्होंने कुल दो ट्वीट किए, जिसमें उन्होंने बीजेपी के आशीष शेलर और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को हैप्पी बर्थडे बोला। दो अक्तूबर को पंकजा मुंडे ने कुल दो ट्वीट किए। एक ट्वीट महात्मा गांधी के हवाले रहा तो दूसरा लाल बहादुर शास्त्री के खाते में। दो अक्तूबर को भी उनके मुंह से हाथरस पीड़िता के लिए एक बोल नहीं फूटा। पहली अक्तूबर को उन्होंने सिर्फ एक ट्वीट किया और राष्ट्रपति कोविंद को हैप्पी बर्थडे बोला।

29 सितंबर को पंकजा मुंडे ने दो ट्वीट किए। एक में वेंकैया नायडू को गेट वेल सून बोला तो दूसरे में त्रिपुरा के बीजेपी इंचार्ज सुनील देवधर को हैप्पी बर्थडे बोला। 28 सितंबर को उन्होंने भगत सिंह को याद किया तो 27 को जसवंत सिंह को श्रद्धांजलि दी, लेकिन हाथरस पीड़िता के लिए उनके मुंह से ट्विटर पर एक शब्द नहीं निकला। न ही कोई ट्वीट निकला, और न ही रिट्वीट। 2012 दिसंबर में इनके बारे में तो कोई खबर नहीं मिली, लेकिन इनके पिता जी स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे के बारे में एक खबर यूट्यूब पर देखने को मिली। 12 दिसंबर की इस खबर के मुताबिक उस साल उन्होंने अपना जन्मदिन न मनाने का एलान किया था, और यह एलान निर्भया कांड के चलते नहीं हुआ था, बल्कि बाला साहेब ठाकरे की मृत्यु के शोक में था।

4. शाइना एनसी

https://www.mid-day.com/articles/have-modi-will-party/193790

https://photogallery.indiatimes.com/events/mumbai/anu-sunny-dewans-party/Shaina-NC/articleshow/17752855.cms

शाइना एनसी ने चार अक्तूबर को दो ट्वीट किए। एक तो उन्होंने हाथरस केस में कॉन्सपीरेसी थ्योरी लांच करने वाले टाइम्स नाऊ चैनल का विडियो रिट्वीट किया तो दूसरे में उन्होंने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे सैयद जफर को शुभकामनाएं दीं। 3 अक्तूबर को उन्होंने तीन ट्वीट किए। एक में अटल टनल पर ज्ञान दिया, एक में गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात करके ज्ञान लिया और एक में उन्होंने विविध भारती का हैप्पी बर्थडे मनाया। 3 अक्तूबर को भीउनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला, लेकिन 2 अक्तूबर को शाइना ने हाथरस केस पर एक ट्वीट किया है। इस ट्विट में इनका कहना था कि यह औरतों के खिलाफ सबसे जघन्य अपराध है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया कि इस केस को फास्ट ट्रैक के हवाले करके दोषियों को फांसी पर लटकाया जाए।

दो अक्तूबर का दूसरा ट्वीट महात्मा गांधी के हवाले रहा। पहली अक्तूबर को शाइना एनसी ने सुशांत के लिए न्याय की गुहार लगाती अपनी न्यूज 18 की दो क्लिप रिट्वीट की। इसी दिन उन्होंने राष्ट्रपति को गेट वेल सून भी कहा। तीस सितंबर को उन्होंने ट्वीट करके योगा पर प्रवचन दिया, मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी पर अवैध रूप से पैसे लेने के आरोप लगाए और बात खत्म कर दी। उसी दिन उन्होंने भूपेंद्र चौबे से बातचीत की एक क्लिप शेयर की, जो बिहार चुनाव पर थी और एक व्यक्तिगत ट्वीट किया। 29 सितंबर को साइना ने फिर से सुशांत का झंडा उठाया, कृषि बिल पर अकालियों को घेरा और एम्स की बिसरा रिपोर्ट पर न्यूज 18 की एक क्लिप रिट्वीट की। सात दिन में साइना एनसी को सिर्फ एक बार हाथरस पीड़िता की याद आई।

वैसे 24 दिसंबर 2012 के मिड डे में पत्रकार मालविका सांघवी की एक रिपोर्ट में इनका एक जिक्र यह मिलता है कि तब तक वे बीजेपी नेता हो चुकी थीं, पार्टी में वे डिनर टेबल पर आईं और बोलीं, गुजरात में इन दिनों बड़े मेले-ठेले का माहौल है, लोगों के हाथ उनके हिस्से का मीठा लग गया है। 25 दिसंबर 2012 को वे अनु और सन्नी दीवान की पार्टी में भी थीं।

5. किरण खेर

अब चलते हैं परम बीजेपी भक्त अनुपम खेर की पत्नी किरण खेर की ओर। चार और तीन अक्तूबर को किरण खेर ने कोई ट्वीट नहीं किया। 2 अक्तूबर को उन्होंने तीन ट्वीट किए। दो उन्होंने खुद किए और एक नरेंद्र मोदी का रिट्वीट किया। यह तीनों ट्वीट गांधी और शास्त्री जयंती के बारे में ही रहे। पहली अक्तूबर को उन्होंने नरेंद्र मोदी के चार ट्वीट्स को रिट्वीट किया। लड़कियों को दबकर रहने की सलाह देने वाली किरण खेर ने अपने ट्विटर एकाउंट में भी लड़कियों को एक तरह से दबाए ही रखा और हाथरस की पीड़िता के लिए उनके मुंह से एक अक्षर भी नहीं निकला। फिर तीस सितंबर को उन्होंने दो ट्वीट किए और दोनों ही नरेंद्र मोदी के ट्वीट्स को ही रिट्वीट किया था। यहां भी हाथरस पीड़िता की कोई बात नहीं की।

29 सितंबर को किरण खेर कुछ नहीं बोलीं। 28 सितंबर को उन्होंने तीन ट्वीट किए और भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर ये नरेंद्र मोदी के ट्वीट्स को रिट्वीट करना नहीं भूलीं, लेकिन हाथरस की पीड़िता बच्ची के लिए उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला। 1 दिसंबर से लेकर 4 फरवरी 2012 तक हमने सर्च किया, लेकिन अब की ही तरह, तब भी उनके मुंह से निर्भया के लिए कुछ नहीं छपा पाया गया। न ही ट्विटर पर और न ही गूगल पर। हालांकि यह जरूर मिला कि यह लगातार पार्टियों में आती जाती रहीं।

6. हेमा मालिनी

http://pages.rediff.com/photoalbum/preview/rediff-bollywood-photos/deepika-padukone-with-ranveer-singh-at-candle-march-for-delhi-rape-victim/5050551/40457401/202510/13/jaya-bachchan-and-hema-malini-at-the-silent-candle-march-for-delhi-gang-rape-victim-in-mumbai–1-

हाथरस से मथुरा की दूरी महज 42 किलोमीटर है, जहां से ड्रीम गर्ल कही जाने वाली हेमा मालिनी भाजपा सांसद हैं। इनके संसदीय क्षेत्र से सटे हाथरस में इतना बड़ा कांड हो गया तो हेमा मालिनी का बोलना तो बनता ही था। सांसद न सही, एक स्त्री होने की वजह से तो बोलतीं। मगर हेमा मालिनी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। चार अक्तूबर को उन्होंने कुल जमा एक ट्वीट किया, जो कि बीजेपी का ही रिट्वीट था, और जिसमें अटल टनल की बात थी। फिर तीन को ये सिफर रहीं। दो अक्तूबर को उन्होंने रस्मी तौर पर दो ट्वीट किए। एक तो लाल बहादुर शास्त्री का और दूसरा महात्मा गांधी का। पहली अक्तूबर से लेकर 29 सितंबर तक फिर से ड्रीम गर्ल ट्वीटर पर सिफर रहीं। 28 सितंबर को उन्होंने चार ट्वीट किए। एक में नड्डा को बधाई दी, एक में लता मंगेशकर को बधाई दी और एक अपने मथुरा क्षेत्र की बड़ाई की तो एक में अपनी बेटियों की फोटो शेयर की। मगर पिछले सात दिनों में हाथरस की बेटी के लिए उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला। ये दिल्ली में निर्भया गैंग रेप के वक्त राज्यसभा सदस्य जया बच्चन के साथ विरोध मार्च में शामिल थीं।

7. साधवी प्रज्ञा

मालेगांव में बम विस्फोट करके बेगुनाह लोगों की जान लेने की आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से वैसे तो हाथरस की पीड़िता के लिए शब्दों की अपेक्षा करना बेमानी ही है, फिर भी हमने चेक किया कि शायद भूले से ही सही, इनके स्त्री हृदय में रातों रात जला डाली गई उस बच्ची के लिए दो बोल फूट पड़े हों। उम्मीद के मुताबिक उनके मुंह से वाकई कुछ नहीं निकला। चार अक्तूबर से लेकर 1 अक्तूबर तक उन्होंने कोई ट्वीट नहीं किया। 30 सितंबर को उन्होंने दो ट्वीट किए, जिनमें से एक में उनका कहना था कि सब कुछ राम जी की कृपा से हो रहा है और दूसरे में ओम बिरला के पिता की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। हाथरस की बिटिया पर उन्होंने शोक व्यक्त नहीं किया, पर हम अभी भी नहीं मानते कि हाथरस की बिटिया की मौत पर वह खुश हुई होंगी। वैसे मालेगांव वारदात के बाद उन्होंने खुश होकर आइसक्रीम जरूर मंगाई थी। 29 सितंबर को उन्होंने मोदी की फैलाई कृषि बिल की अफवाह और फैलाई और 28 सितंबर को भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी। वैसे भगत सिंह होते तो प्रज्ञा जैसियों का क्या करते, यह हम सभी अच्छे से जानते हैं। अब चलते चलते ये भी बता दें कि दिसंबर 2012, जब निर्भया कांड हुआ था, तब साध्वी प्रज्ञा जेल में थीं।

8. मीनाक्षी लेखी

https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/if-acp-suspended-after-rape-why-not-police-chief-delhi-hc/articleshow/17963503.cms

https://www.dailymail.co.uk/indiahome/indianews/article-2255482/Fast-track-justice-Lawyers-say-watertight-gang-rape-case-mean-quick-decision-courts.html

चैनलों पर बीजेपी के लिए चीखने-चिल्लाने वाली मीनाक्षी लेखी को हाथरस कांड पूरी तरह से राजनीति का मौका नजर आया। उन्होंने पिछले सात दिनों में ताबड़तोड़ ढेरों ट्वीट किए हैं। सबसे ज्यादा तो उन्होंने नरेंद्र मोदी का वह बयान ट्वीट किया, जिसमें वे दिल्ली के निर्भया कांड के वक्त यह कह रहे थे कि वे रेप पर राजनीति नहीं करेंगे। हालांकि यह सभी लोगों ने देखा था कि किस तरह से भाजपाई उस वक्त चूड़ियां लेकर राजनीति कर रहे थे, बल्कि रेप के मामलों में चूड़ियां चलाने का श्रेय भाजपाइयों को ही जाता है। 10 जनवरी 2013 को दिल्ली हाई कोर्ट में मीनाक्षी लेखी दलील दे रही थीं कि निर्भया गैंगरेप की सुनवाई मीडिया के सामने होनी चाहिए। क्या ऐसी ही कोई दलील मीनाक्षी जी हाथरस कांड में भी देंगी, यह पूछने वाली बात है। पहली जनवरी 2013 को उनकी मांग थी कि अदालत निर्भया कांड में 31 मार्च 2013 तक फैसला दे दें, क्योंकि सब कुछ बिलकुल साफ है। अब उनका कहना है कि योगी सरकार जांच कर रही है और जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई है।

9. उमा भारती

हाथरस कांड में बीजेपी की इकलौती नेता उमा भारती की प्रशंसा करनी पड़ेगी। उमा भारती खुद कोरोना से संक्रमित थीं, लेकिन हाथरस कांड में उन्होंने एक के बाद एक कई सारे ट्वीट किए और योगी सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने लिखा है कि वे कोरोना वार्ड में बहुत बेचैन हैं और अगर अस्पताल में भर्ती न होतीं, तो हाथरस में पीड़ित परिवार के साथ जरूर बैठी होतीं। जब मीडिया वालों को पीड़िता के गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा था, तब उमा भारती ने आदित्यनाथ को ट्वीट करके मीडिया वालों को गांव में घुसने देने का अनुरोध भी किया था। शायद यही वजह है कि उमा भारती पिछले काफी दिनों से बीजेपी में किनारे लगा दी गई हैं, उनकी कोई सुनता ही नहीं। 24 दिसंबर 2012 को निर्भया कांड पर उमा भारती ने कई चैनलों से बात की थी और निर्भया आंदोलन को आगे बढ़ाने और तेजी से चलाने की बात कही थी। इस बार हाथरस कांड पर हर शहर हर गली में जो आंदोलन चल रहा है, उसे तेज करने की बात तो उमा जी ने नहीं ही कही है।

10. कंगना रनौत

https://www.outlookindia.com/photos/dayin/01/08/2013?photo-65881

और अब आखिरी नंबर है कंगना रनौत का। पिछले दिनों सुशांत सिंह राजपूत को लेकर बीजेपी की गोद में खेलने वाली कंगना ने सुशांत के मुद्दे पर ट्वीट्स की झड़ी लगा रखी है। 4 अक्तूबर से लेकर 28 सितंबर तक के सात दिनों में जरा इनका हाल मुलाहजा फरमाइए। चार अक्तूबर, जीरो ट्वीट। तीन अक्तूबर को उन्होंने सुशांत राजपूत के मुद्दे पर कुल चार ट्वीट किए। फिर दो अक्तूबर को ये चुप रहीं। पहली अक्तूबर को उन्होंने सिर्फ एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने अपनी फिल्म की जानकारी दी, अपनी तीन सेल्फी डाली। तीस सितंबर को उन्होंने पहले तो अपने बचपन को याद किया, फिर जवानी की एक फोटो डाली, फिर एक फैशन वॉक की फोटो डाली और एकदम आखिरी में उन्हें हाथरस कांड याद आया, वह भी अपार श्रद्धा के साथ़ ट्वीट करके बताया कि उनको योगी आदित्यनाथ में इमेंस फेथ है, यानी कि अपार श्रद्धा। अपनी इस अपार अपरंपार श्रद्धा को हाजिर नाजिर मानकर कंगना जी इस ट्वीट में योगी आदित्यनाथ से कहती हैं कि बलात्कारियों को आप भी गोली मार देना।

अच्छी बात है कि उन्होंने साथ में हाथरस हॉरर और हाथरस हॉरर शॉक्स इंडिया का हैशटैग भी लगाया है। 29 सितंबर को उन्होंने सात ट्वीट किए। एक में शेखर कपूर को फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का प्रेसीडेंट बनने पर बधाई दी। चार में सुशांत सिंह राजपूत पर अपना रोना रोया और एक में अपनी बनी ठनी फोटो डाली। 28 सितंबर को उन्होंने पहले तो एक ट्वीट करके भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी। फिर दूसरे ट्वीट में उन्होंने लता मंगेशकर को हैप्पी बर्थडे बोला और इसके बाद तीसरे ट्वीट में ये जाकर जावेद अख्तर से भिड़ गईं और कहने लगीं कि उन्हें इस बात पर बड़ा आश्चर्य है कि भगत सिंह आज अगर जिंदा होते तो अपने ही लोगों की चुनी सरकार के खिलाफ विद्रोह कर देते।

8 जनवरी 2013 को ये दिल्ली के इंडिया गेट पर सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाती देखी गईं थीं। वैसे 2012 में हुए निर्भया कांड के खिलाफ गूगल पर तकरीबन छह जगहों पर तो यह मिलता ही हैं कि इन्होंने पब्लिकली उस कांड के विरोध में बयान दिया था। ये खबर पुष्ट नहीं है, लेकिन शायद राज्यसभा सांसद जया बच्चन के नेतृत्व में जो निर्भया कांड के विरोध में मुंबई में बॉलिवुड वालों का मौन जुलूस निकला था, उसमें कंगना भी थीं।

  • राइजिंग राहुल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

This post was last modified on October 6, 2020 1:58 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

Share
Published by