हरियाणा में प्रत्याशी बदलने के बावजूद भाजपा की राह नहीं आसान

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भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में 5 लोकसभा सीटों- सिरसा, हिसार, कुरुक्षेत्र, करनाल और सोनिपत में अबकी बार अपने प्रत्याशी बदल दिये है। 2019 में भाजपा ने हरियाणा की सभी 10 सीटों पर जीत हासिल की थी। वर्तमान परिस्थितियों में सिरसा से अशोक तंवर की जीत की संभावनाएं कमज़ोर ही है। कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद अशोक तंवर तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी से होते हुए कुछ समय पहले भाजपा में शामिल हुए हैं। कांग्रेस के टिकट पर एक बार पहले 2009 में सिरसा से चुनाव जीते थे।

48 वर्षीय अशोक तंवर ने अपनी राजनीति की शुरुआत कांग्रेस में छात्र संगठन के सदस्य के रूप में शुरू की थी, हरियाणा प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल में कोई विशेष उपलब्धि कांग्रेस को नहीं मिली। सिरसा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। कहा जा रहा है कि भाजपा की वर्तमान सांसद सुनीता दुग्गल कुछ खास कार्य इस क्षेत्र में करने में असफल ही रही और मतदाताओं की नाराजगी से बचने के लिए भाजपा ने अपना प्रत्याशी बदल दिया।

हिसार से भाजपा ने सिरसा के रानियां से वर्तमान निर्दलीय विधायक रणजीत सिंह चौटाला को मैदान में उतारा है। उन्हें कल ही भाजपा में शामिल किया गया था। रणजीत सिंह चौटाला देवी लाल के पुत्र व जजपा के पूर्व उपमुख़्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के दादा के छोटे भाई हैं। 1987 में रणजीत चौटाला सिरसा के रोड़ी हल्का से विधयक बने थे। 1990 में हरियाणा से राज्य सभा के लिए चुने गए थे। 78 वर्षीय रणजीत चौटाला जनता दल, इंडियन लोकदल और कांग्रेस में रह चुके हैं। माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की हरियाणा में बिछायी राजनीतिक विसात के रणजीत सिंह एक अहम मोहरे हैं।

हिसार लोकसभा सीट जाट बहुल मानी जाती है और लोगों में चर्चा है कि भाजपा में चल रही गुटबाजी के परिणाम में रणजीत सिंह को पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु व भजन लाल परिवार से कुलदीप बिश्नोई को उनकी राजनितिक हैसियत दिखने के लिए हिसार लोक सभा सीट पर लाया गया है। हाल ही में हिसार के भाजपा के सांसद ब्रिजेन्द्र सिंह ने भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए।

भिवानी महेन्द्रगढ़ की सीट पर भाजपा ने निवर्तमान सांसद धर्मवीर सिंह को फिर से उतरा है। हालांकि काफी समय से अटकलें चल रही थी की सांसद धर्मवीर सिंह अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने की जुगत के चलते नयी संभावनाओं को भी समानांतर तौर पर तलाश रहे थे। इसी क्षेत्र से पूर्व में सांसद रही सुधा यादव को भाजपा द्वारा पार्टी के पार्लियामेंटरी बोर्ड व केंद्रीय चुनाव समिति का सदस्य नियुक्त किया गया था।

हरियाणा सरकार में कृषि मंत्री जय प्रकाश दलाल भी इसी क्षेत्र से आते हैं। पहले किसान आंदोलन के समय सांसद धर्मवीर को पूरे क्षेत्र में काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। यह क्षेत्र सिंचाई व पानी की कमी से झूझ रहा है। राजपूत व अहीर समुदाय के परंपरागत वोट भाजपा के पक्ष में जाने का लाभ यहां पिछली लोकसभा चुनावों में जीत को सुनिश्चित करता रहा। लेकिन अबकी बार चुनौती अग्निवीर जैसी योजनओं ने इस क्षेत्र में कड़ी कर दी हैं। 

रोहतक की सीट से अरविंद शर्मा को फिर से प्रत्याशी बनाया गया है। पिछली बार बहुत ही कम अंतर से ये सीट कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा हार गए थे। अबकी बार कठिन चुनौती भाजपा को यहां मिलने वाली है। महिला पहलवानों के मुद्दे पर व किसानों के आंदोलन को लेकर इस क्षेत्र में  भाजपा के प्रति स्थानीय मतदातों में रोष है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा का यह गढ़ भी माना जाता है। पूर्व सैनिकों की पेंशन के लाभ व कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली को लेकर निरंतर आवाज़ें  यहां से उठती रही है। प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थितियों की छाया भी इस क्षेत्र में विकट है। हाल ही में इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष नफे सिंह राठी की हत्या ने प्रदेश को हिला दिया था।

सोनीपत की सीट पर भाजपा को अपना प्रत्याशी बदलना पड़ा है। रमेश कौशिक की एक आपत्तिजनक सीडी कुछ ही दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि सांसद रमेश कौशिक ने अपने कार्यकाल में इस क्षेत्र में पूरी गंभीरता से काम नहीं किये और स्थानीय लोगों का कौशिक के प्रति मोह भंग हो चुका था और बचा खुचा पर्चा सीडी ने आउट कर दिया। अब सोनीपत से मोहन लाल बड़ोली को मैदान में उतरा गया है। मोहन लाल बड़ोली राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे हैं। पहली बार 2019 में सोनीपत की राइ विधानसभा से विधयक बने थे। सोनीपत के बहालगढ़ में कपड़े की दुकान चलते रहे मोहन लाल कौशिक बड़ोली राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता रहे है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के मजबूत प्रत्याशी की चुनौती अगर यहां खड़ी  हो गई तो मोहन लाल कौशिक को काफी कठिनाई का समाना करना पड़ेग। 

करनाल की सीट पर भाजपा को हरियाणा के मुख्यमंत्री पद से हटा कर मनोहर लाल खट्टर को उतरना पड़ा है। यह अपने आप में ही एक बड़ा संकेत राजनीतिक गलियारों में उभरने लगा है कि भाजपा के लिए अबकी बार हरियाणा में चुनौतियां कितनी गंभीर हो गयी हैं। मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री काल के लाभ को करनाल में भाजपा भुना कर सीट को अपने खाते में लाना चाहती है। यह अंदजा लगाना मुश्किल नहीं की एक एक सीट भाजपा के लिए जीत सुनिश्चित करने के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो गयी है।

कुरूक्षेत्र लोक सभा सीट पर भाजपा ने 2014 और 2019 में जीत हासिल की थी। 2014 में जीत पाने वाले राजकुमार सैनी ने भाजपा के लिए हरियाणा में जातीय ध्रुवीकरण का बड़े जोर शोर से बिगुल बजाया था। बहुसंख्यक जाटों के विरुद्ध विवादित बयान राजकुमार सैनी की पहचान रही है। लेकिन 2019 में भाजपा ने नायब सैनी को कुरुक्षेत्र में उतारा और फिर से जीत दर्ज की थी। नायब सैनी को अब हरियाणा प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाया गया है।

अब भाजपा ने कुरुक्षेत्र में अपनी हांड़ी नवीन जिंदल के मार्फ़त फिर से चढ़ाई है। नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र से कांग्रेस के 2004 व 2009 में 2 बार संसद रहे है। अब अचानक अमृत काल में हृदय परिवर्तन होने के कारण कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए। भारतीय जनता पार्टी और प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी नवीन जिंदल पर कोयला चोरी में संलिप्त्ता के आरोप अपने मंचों से जोर शोर से लगते रहे हैं। भाजपा के लिए नवीन जिंदल को कुरूक्षेत्र से तीसरी बार जितवाना महाभारत के चक्रव्यूह को भेदने के सामान ही रहेगा। 

अम्बाला आरक्षित सीट पर भाजपा ने पूर्व सांसद दिवंगत रतन लाल कटारिया की पत्नी बन्तो कटारिया को उतरा है। बाढ़ संभावित क्षेत्र में सहानुभूति की नाव कैसे पार पहुंचेगी यह एक अगल ही कहानी होने वाली है। किसान आंदोलन का सबसे तीव्र प्रभाव इसी लोकसभा क्षेत्र में स्थापित है। प्रदेश में वर्तमन भाजपा सरकार के पुनर्गठन से व्यथित भाजपा के बड़बोले नेता अनिल विज भी अम्बाला से ही हैं।

फरीदाबाद की सीट पर किशन पाल गुज्जर भाजपा के उमीदवार के तौर पर तीसरी बार अपनी किस्मत आजमाएंगे। केंद्रीय मंत्री रहे किशन पाल गुज्जर के लिए अपेक्षाकृत चुनौतियां कुछ कम ही दिखाई दे रही हैं। अपनी जीत के लिए वह केंद्रीय नेतृत्व को पूरी तरह आश्वस्त भी कर चुके हैं। चुनावी बांड के खुलासों की परछाई से भाजपा जिस तरह ग्रस्त हुयी है उसके प्रभाव से किशन पाल गुज्जर को भी देश में अन्य भाजपा उम्मीदवारों की तरह खुद को बचा पाने की चुनौती रहेगी।   

गुरुग्राम की सीट पर भाजपा ने राव इंदरजीत पर सीट जीतने का भरोसा जताया है। गुरुग्राम लोक सभा क्षेत्र भजपा के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण की प्रयोगशाला के रूप में भी सुरक्षित सीट मानी जा रही है। मेवात के साम्प्रदायिक संघर्ष व गुरुग्राम में मुस्लिम समुदाय के द्वारा खुले में नमाज़ अदा करने को लेकर विगत में हिन्दू संगठनों के विरोध प्रदर्शन से स्थितियां बार बार तनावपूर्ण होती रही हैं। भाजपा इस सीट पर अपनी जीत के किये पूरी तरह से आश्वस्त है। 

फाल्गुन की रितु कैसे कैसे राजनीति के रंग आने वाले समय में बिखरेगी ये ज्येष्ठ की तपती गर्मी में सामने आएंगे। राजनीति की लू में अबकी कौन कितना झुलसेगा ये चौंकाने वाला होगा।

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