नई दिल्ली। क्रांतिकारी कवि और एक्टिविस्ट वरवर राव समेत जेल में बंद 11 सामाजिक-मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए आज पंजाब में जगह-जगह प्रदर्शन हुए। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स पंजाब (एएफडीआर) समेत दर्जनों संगठनों के आह्वान पर हुए इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में महिलाओं और नौजवानों ने हिस्सा लिया।

संगठन के प्रेस सचिव बूटा सिंह ने बताया कि अकेले बरनाला में तकरीबन 30 जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। दिलचस्प बात यह है कि कोरोना के खतरे के बावजूद लोग सड़कों पर उतरे और उन्होंने सरकार द्वारा अपनाए जा रहे तानाशाही पूर्ण रवैये के प्रति अपना विरोध दर्ज किया।

इस मौके पर हुई सभाओं में नेताओं ने कहा कि जनता की लड़ाई लड़ने वालों को सरकार बेवजह परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कवियों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को एक ऐसे अपराध की सजा दी जा रही है जिसको उन्होंने किया ही नहीं है। उन्होंने इस मामले में सरकार को खींचने के साथ ही न्यायालयों द्वारा बरती जा रही उदासीनता को भी बेहद निराशाजनक बताया।

उनका कहना था कि मोदी सरकार ने पूरे संविधान को ताक पर रख दिया है और तमाम लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बना दिया गया है। समय रहते अगर संस्थाओं में बैठे लोग और देश की जनता नहीं जागती तो इस खूबसूरत देश के इराक और सीरिया बनते देर नहीं लगेगी।

नेताओं का कहना था कि सरकार अभी उन्हीं लोगों को निशाना बना रही है जो उसके मंसूबों को समझ रहे हैं और उसे डर है कि सबसे पहले और सबसे ज्यादा प्रतिरोध उसी हिस्से से खड़ा होना है। लिहाजा उसने ऐनकेन प्रकारेण उनको जेल की सींखचों के पीछे या फिर बचे लोगों को अलग-अलग तरीके से परेशान करना शुरू कर दिया है।

दूसरी जगहें जहां प्रदर्शन हुए उसमें नवां शहर, संगरूर, मोंगा, पटियाला, भटिंडा, जालंधर, मानसा, मुक्तसर, होशियारपुर, गुरदासपुर, लुधियाना, जगरांव, मुल्लनपुर, बाबा भान सिंह, सिरसा (हरियाणा) आदि शामिल थे।

दूसरे संगठन जिन्होंने इसमें हिस्सा लिया उनमें रेशनलिस्ट सोसाइटी, पंजाब, प्रगतिशील लेखक मंच (हरियाणा), पंजाब स्टूडेंट यूनियन, नौजवान भारत सभा, इंकलाबी केंद्र, पंजाब, लोक संग्राम मोर्चा, पीएलएस मंच, भारतीय किसान यूनियन, वर्ग चेतना, पेंडू मजदूर यूनियन (मशाल), पंजाब रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन, बीकेयू (क्रांतिकारी), डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट, डीएमएफ समेत कई दूसरे संगठन शामिल थे।

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